Samsa samgra Shiksha Abhiyan

बीकानेर। केन्द्र सरकार प्रवर्तित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) और सर्व शिक्षा अभियान का एकीकरण कर दिया गया है। अब इसे नया नाम समग्र शिक्षा परिषद (समसा) दिया गया है।

इसके लिए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद और राजस्थान प्राथमिक शिक्षा परिषद का एकीकरण कर राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद का गठन किया गया है जो राज्य में समग्र शिक्षा पूर्व प्राथमिक से लेकर बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा के लिए योजना बनाने, उसके क्रियान्वयन और उसकी निगरानी के लिए जिम्मेदार होगी।

राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को हाल ही में केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब ऐसा माना जा रहा है कि माध्यमिक शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा निदेशालय शिक्षा आयुक्त के अधीन काम करेंगे।

राज्य सरकार ने ही एक जैसे उद्देश्यों के लिए चलाई जा रही केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का एकीकरण कर सुदृढ़ तरीके से शिक्षा के उन्नयन का अभियान चलाने का प्रस्ताव भेजा था। केन्द्र सरकार ने पिछले सप्ताह ही राज्य सरकार के प्रस्ताव को मान लिया। अब केन्द्र सरकार की समग्र शिक्षा परिषद नाम से चलने वाली परियोजना में शिक्षा के संसाधनों के विकास का काम होगा।

इस संबंध में संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा (कार्मिक) नूतन बाला कपिला ने बताया कि केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की अवधि पूरी हो गई है। अब दोनों योजनाओं का एकीकरण कर इसे नया नाम समग्र शिक्षा अभियान कर दिया गया है। इसमें आयुक्त का पद नया सृजित किया गया है।

रिपोर्ट – श्‍याम शर्मा


मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 24 मई 2018 को सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समग्र शिक्षा योजना’ की शुरूआत की। इसके माध्यम से शिक्षा का स्तर सुधारने तथा तकनीकी इस्तेमाल बढ़ाकर विद्यार्थी और शिक्षकों को अधिक सशक्त बनाया जायेगा।

इस योजना का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है तथा साथ ही बच्चों को समग्र रूप से विकास की ओर अग्रसर करना है।

नए सत्र से पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक शिक्षा व्यवस्था की गतिविधियों का संचालन अब नई व्यवस्था के अधीन होगा। सत्र 2018-19 से शुरू होने जा रही इस नई व्यवस्था का नाम है समग्र शिक्षा अभियान। सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए), शिक्षक प्रशिक्षण डायट केंद्रों का विलय कर उसका एकीकरण किया जा रहा है। इन तीनों के एकीकरण के बाद अब स्कूल में पहली से कक्षा 12वीं तक के लिए नई शिक्षा योजना ‘समग्र शिक्षा अभियान’ यानी एसएसए के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।

नीति आयोग के निर्देश पर केंद्रीय मानव संसाधन विभाग ने यह निर्णय लिया है। समग्र शिक्षा अभियान ही सरकारी स्कूलों के 12वीं तक के विद्यार्थियों, स्कूलों आधारभूत संरचना समेत सभी गतिविधियों को नियंत्रित करेगा। बजट भी समग्र शिक्षा अभियान के तहत तैयार किया जाएगा। सर्व शिक्षा अभियान एवं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के क्रियान्वयन के लिए जिलास्तर पर अलग-अलग परियोजना अधिकारी मौजूदा समय में कार्य कर रहे हैं। नई योजना में मुख्य शिक्षा अधिकारी एकीकृत योजना से संबंधित कार्यो का निष्पादन करेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जिला स्तर पर सभी अभिलेखों का अध्ययन करने और वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका बजट दो साल के लिए एक ही बार बनेगा।

पहली से आठवीं और नौवीं से 12वीं तक की शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग बजट नहीं होगा। जिला स्तर पर बजट तैयार करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विभाग ने जिलों को 10 मई तक का समय दिया है। राज्य को बजट तैयार कर 15 मई तक केंद्रीय मानव संसाधन विभाग को भेज देना है।

समग्र शिक्षा अभियान के मुख्य तथ्य

• पांचवी तक के स्कूल में खेल सामग्री के लिए हर साल 5,000 रुपये, दसवीं तक के स्कूल में 10,000 तथा 12वीं तक के स्कूलों में 15,000 रुपये दिए जाएंगे.

• सभी स्कूलों में एक घंटा फिजिकल एक्टिविटी के लिए देना अनिवार्य होगा.

• स्कूलों में लाइब्रेरी होना बेहद जरूरी है, इसके लिए केंद्र सरकार स्कूलों को किताबों के लिए हर वर्ष 5,000 से लेकर 20,000 तक की सहायता राशि मुहैया कराएगा.

• दूर-दराज और गांव में रहने वाली लड़कियों को शिक्षा देने के लिए आरंभ की गई कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना पहले छठी से नौवीं तक ही सीमित थी. इसे अब छठी से बारहवीं तक बढ़ाया गया है.

• विकलांग विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए 200 रुपये प्रतिमाह दिया जायेगा.

• कौशल भारत में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी.


यह होगा मुख्य कार्य दायित्व

  • नए स्कूलों की स्थापना और पुराने का अपग्रेडेशन।
  • नए उच्च प्राथमिक स्कूलों को दस लाख रुपये प्रति स्कूल और नए माध्यमिक स्कूल के लिए प्रति स्कूल 25 लाख रुपये आवंटन
  • नए उच्चतर माध्यमिक स्कूल में एक संकाय के लिए 50 लाख, दो के लिए 55 और तीन संकाय के लिए 70 लाख रुपये का आवंटन।
  • प्रत्येक अतिरिक्त संकाय के लिए प्रतिवर्ष 15 लाख रुपये का अनुदान।
  • कम आबादी, पहाड़ी क्षेत्र और घने जंगली इलाके व अन्य दुर्गम क्षेत्र में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल खोलना।
  • सुदूर क्षेत्र एवं विरल आबादी वाले इलाकों में परिवहन की व्यवस्था।
  • पहली से 12वीं कक्षा तक बच्चों का मूल्याकन एनसीईआरटी के आधार पर होगा। इस मद में जिले की क्षमता पर दस से 20 लाख रुपये मिलेंगे।
  • गणित और विज्ञान के प्रोत्साहन के लिए कक्षा छठी से 12वीं में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान।
  • गुणवत्ता में सुधार और शिक्षा के उपयोग के लिए इनोवेशन का बढ़ावा।
  • प्री-नर्सरी स्कूल के लिए दो लाख रुपये तक का अनुदान।
  • कस्तूरबा गाधी बालिका विद्यालयों को छठी से आठवीं तक 60 लाख, छठी से दसवीं तक 80 लाख और छठी से 12वीं तक एक करोड़ का वार्षिक अनुदान।
  • छठी से 12वीं तक की छात्राओं के लिए तीन माह का सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम।
  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 3000 रुपये प्रति छात्र प्रतिवर्ष का प्रावधान।
  • खेल और शारीरिक शिक्षा के तहत प्राथमिक के लिए 5000, मध्य विद्यालय दस हजार और माध्यमिक विद्यालय के लिए 25 हजार का प्रावधान।

Government launches integrated school education scheme

The Union Ministry of Human Resource Development (HRD) on Thursday launched an integrated scheme for school education from pre-school till Class 12 and promised to increase the budget for the entire school education next year by 20 per cent.

The new scheme, called “Samagra Shiksha“, is integration of three components into which school education was divided earlier. Thus, the Sarva Shiksha Abhiyan (SSA) and Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan RMSA) — which took care of the school

education at primary and secondary levels — and Teacher Training will now be coalesced into one whole.

“We can’t see education in parts…. People choose to send their kids to private schools because there aren’t pre-schools in government schools… It has been almost 25 years since SSA was started. It worked fine but we thought change was necessary with time.

This is a way to see education holistically,” HRD Minister Prakash Javadekar told the media while inaugurating the scheme. “The budget (for school) has been enhanced from Rs 28,000 crore in 2017-18 to Rs 34,000 crore in 2018-19 and further it will be Rs 41,000 crore in 2019-20. This is our commitment,” he said.

The Minister announced that 11,50,000 schools under the scheme would receive sports rants. The amount of grant will be Rs 5,000 for primary, Rs 10,000 for upper primary and up to Rs 25,000 for SSC and HSC schools.

Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya scheme — under which girls from disadvantaged sections are provided education with hostel facility — would also be extended from class 6- 8 to class 6-12 under Samagra Shiksha, the Minister said.

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