right to education
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राज्य में प्रारम्भिक शिक्षा के तहत संचालित हो रहे 974 स्कूलों ने 5वीं और 8वीं के बच्चों के परीक्षा आवेदन पत्र नहीं भरवाए। इसमें राजस्थान बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल और सीबीएसई स्कूल तक शामिल हैं। निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम नियम 2009 के तहत राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त स्कूलों की ओर से नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

अधिनियम के अनुसार राज्य में प्रारम्भिक शिक्षा के तहत अध्ययन कर रहे करीब 4 लाख 50 हजार विद्यार्थियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया है। इसमें खास बात ये है कि नियमों की अवेहलना किए जाने पर शिक्षा विभाग ने अभी तक इन स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

दरअसल, वर्तमान में राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा विभाग से प्रारंभिक स्तर की मान्यता लेकर स्कूल 8वीं तक के बच्चों को शिक्षा मुहैया कर रहे हैं। इन स्कूलों में मान्यता नियमों के तहत प्रारम्भिक शिक्षा स्तर पर एसआईआरटी उदयपुर का पाठ्यक्रम लागू होना चाहिए। लेकिन इन स्कूलों में यह पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जा रहा है। साथ ही, स्कूलों को मिली प्रारम्भिक शिक्षा मान्यता नियमों के अनुसार ही पाठ्यक्रम का वितरण करना था, लेकिन इसके बावजूद इन स्कूलों में दूसरा पाठयक्रम वितरण किया जा रहा है।

खास बात ये है कि प्रारम्भिक शिक्षा के तहत सरकारी और गैर सरकारी सभी स्कूलों ने शैक्षिक वर्ष 2016-17 में कक्षा 8 में अध्यनरत स्टूडेंटस का परीक्षा आवेदन पत्र ही नहीं भरवाया। इसके कारण पिछली साल करीब 4 लाख 50 हजार परीक्षार्थी परीक्षा में बैठने वंचित रह गए। उनको प्रारम्भिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर को शैक्षिक प्राधिकारी बनाया गया था। इसके तहत परीक्षा का आवेदन भरना राज्य के सभी विद्यालयों के लिए अनिवार्य था।

इस साल 2018 में भी 974 स्कूलों ने कक्षा 8वीं और 5वीं के स्टूडेंट के लिए आयोजित की जाने वाली प्रारम्भिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र परीक्षा-2018 और प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन परीक्षा 2018 का आवेदन नहीं भरे हैं, जो कि शिक्षा विभाग की ओर से भरना अनिवार्य था। इसमें नीरजा मोदी, कपिल ज्ञानपीठ, दिल्ली पब्लिक स्कूल, संस्कार पब्लिक स्कूल, वर्द्धमान स्कूल, कैंब्रिज कोर्ट, महावीर पब्लिक, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, इंडिया इंटरनेशनल स्कूल, वाॅरेन एकडेमी, एजीपीस, एमजीडी और एसएमएस जैसी नामी स्कूलों के नाम शामिल हैं।

974 शिकायतें भेजी हैं अजमेर बोर्ड और प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर

नियमों की अवेहलना किए जाने से स्कूलों में अध्यनरत लाखों बच्चों के अधिकारों का हनन हुआ है। साथ ही विद्यालय ने निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 और उसके अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा नियम 2010 की अवेलहना तो की है। साथ ही मान्यता नियमों की भी। इसको लेकर बच्चों के अधिकारों के लिए कार्यरत सेवा संस्थान की ओर से 974 शिकायतें भी अजमेर बोर्ड और प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर को भी भेजी गई हैं। बावजूद इसके शिक्षा विभाग की ओर से इन नामी स्कूलों पर कार्रवाई नहीं की गई है।

ये हैं नियम

अधिनियम की अवेहलना किए जाने पर नियमों के तहत ऐसे सरकारी स्कूलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और गैर सरकारी स्कूलों के खिलाफ मान्यता रद्द किया जाना तय किया है, लेकिन अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से इन स्कूलों पर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जिलेवार कुल स्कूलों की संख्या इस प्रकार है

  • करौली-7
  • सिरोही-14
  • हनुमानगढ़-19
  • दौसा- 15
  • नागौर-20
  • डूंगरपुर 11
  • बूंदी-11
  • धौलपुर-8
  • झुंझुनू-52
  • गंगानगर-44
  • भरतपुर-6
  • जोधपुर-45
  • जयपुर-149
  • राजसमन्द -12
  • कोटा-57
  • जैसलमेर-12
  • सवाईमाधोपुर-10
  • अजमेर-53
  • अलवर-56
  • बारां -14
  • बांसवाड़ा-16
  • बीकानेर-19
  • टोंक-21
  • उदयपुर-41
  • बाड़मेर-11
  • भीलवाड़ा-29
  • सीकर-35
  • चूरू-16
  • झालावाड़-14
  • चित्तौड़गढ़-16
  • पाली-17
  • अन्य 124

यानि कुल 974


प्रारम्भिक शिक्षा के तहत 5वीं और 8वीं तक सभी स्कूलों के लिए परीक्षा आवेदन भरवाने अनिवार्य हैं। चाहें वे सरकारी स्कूल हों या गैर सरकारी सीबीएसई स्कूल। जिन सरकारी स्कूलों ने फाॅर्म नहीं भरे हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और गैर सरकारी सीबीएसई स्कूलों के खिलाफ मान्यता नियमों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

सीएम भार्गव,
असिस्टेंट डायरेक्टर,
प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर

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