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1954 में खुला विद्यालय

गनोड़ा। गनोड़ा तहसील के दूकवाड़ा गांव का एक ऐसा स्कूल जो सन 1954 में खुला 1980 में आठवीं तक बना, लेकिन आज तक यह विद्यालय सेकंडरी स्तर तक का नहीं बन सका है। दूकवाड़ा गनोड़ा पंचायत में आता है मगर पंचायत मुख्यालय से इस स्कूल की दूरी 9 किलोमीटर तक की होती है। दूकवाड़ा एवं आसपास के कई गांवों के गरीब परिवार के बच्चे पैदल चलकर इस विद्यालय में आखर ज्ञान के लिए आते हैं। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को विद्यालय की क्रमोन्नति के लिए गुहार लगाई है, मगर हर बार उन्हें निराश होना पड़ा और सेकंडरी के लायक यह स्कूल आज तक 8 वीं तक का स्कूल बनकर खड़ा हुआ है।

विद्यालय में सारी सुविधाएं है उपलब्ध

दूकवाड़ा का यह स्कूल सभी भौतिक संसाधनों से युक्त है। विद्यालय में 12 कमरे बने हुए हैं, एक बड़ा खेल मैदान पुस्तकालय पीने के साफ पानी की सुविधा एवं स्कूल में बिजली की व्यवस्था भी है। ग्रामीणों की यह मांग की समय से चल रही है मगर न तो विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि इस विद्यालय को क्रमोन्नत कराने में कोई रुचि ले रहे हैं। बच्चे तो पढ़ लिखकर आगे बढ़ना चाह रहे हैं और खासकर इस क्षेत्र की बालिकाएं पढ़ने की ललक रख रही हैं।

आठवीं के बाद बच्चों की बढ़ जाती है मुश्किल

दूकवाड़ा के इस स्कूल में अधिकांश बच्चे आदिवासी बहुल इलाकों से यहां पढ़ने के लिए आते हैं। ये बच्चे जैसे तैसे करके आठवीं तक की पढ़ाई तो यहां से कर लेते हैं, मगर आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें या तो यहां से 4 किलोमीटर बोरदा, 5 किलोमीटर बस्सी आड़ और 7 किलोमीटर गनोड़ा तक जाना पड़ता है और आवागमन के साधनों की कमी इस इलाके में ज्यादा है। स्कूलें दूर होने की वजह से ये बच्चे अपनी आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते और बीच में ही छोड़नी पड़ती है।

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