8th board

बांसवाड़ा। जिले में पांचवीं के बच्चों को बोर्ड परीक्षा का अनुभव देने के लिहाज से उसी तर्ज पर किए इंतजाम महज हौवा प्रतीत हो रहे हैं। प्रारंभिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन नाम से इस परीक्षा को लेकर शिक्षकों में भी इसलिए गंभीरता दिखलाई नहीं दे रही कि जब कोई बच्चा फेल होना ही नहीं है, तो क्या देखें। दूसरी ओर, डाइट भी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में लापरवाह दिखलाई दिया है। शहर के कुछ परीक्षा केंद्रों का मुआयना करने पर सुबह पेपर बंटने तक संजीदगी दिखी। फिर आधे घंटे बाद परीक्षा कक्षों के हालात ऐसे लगे मानो लोकल एग्जाम है। इस परीक्षा के लिए प्रश्न-पत्र भेजने अौर बैठक व्यवस्था से लेकर रिजल्ट तक नियमावली तय की गई, लेकिन केंद्रों पर सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे अलग-अलग रखे गए। कायदे से बड़ा हॉल, कमरा हो या बरामदा, परीक्षा में एक कतार में सरकारी स्कूल के बच्चे बैठाने थे, तो उसके पास की कतार में निजी स्कूल में, लेकिन शहर के चंद्रपोल गेट बालिका सीनियर सैकंडरी स्कूल और जिले के सबसे बड़े नूतन स्कूल में भेद स्पष्ट नजर आया। यहां एक कमरे में निजी स्कूल के बच्चे बैठाए गए, तो दूसरे में सरकारी स्कूल के। पर्चा हाथ में आते ही बच्चों में डर दिखलाई दिया, लेकिन वीक्षकों में गंभीरता नहीं मिली। परीक्षा परिणाम में ग्रेडिंग के साथ प्रमोट होने से किसी को नहीं रोकने के प्रावधान है। इसके चलते परीक्षा केंद्रों पर माहौल औपचारिक हो गया है।

डाइट की गफलत, चौथी के बच्चे भी परीक्षार्थियों में किए शामिल, हटवाने पड़े नामदूसरी ओर, इम्तिहान की तैयारी के दौरान छूटी डाइट, गढ़ी की गलतियां भी परेशानी का कारण रही। चंद्रपोल गेट स्कूल में तो एक निजी स्कूल के चौथी कक्षा के चार बच्चे भी फेहरिस्त में आ गए। केंद्राधीक्षक भी यह जानकर चकित रह गईं। बाद में संबंधित स्कूलों के संस्था प्रधानों ने संपर्क किया, तब डाइट को इनके नाम हटाने पड़े। दरअसल, परीक्षार्थियों की सूची पोर्टल से उठाई गई, उसी में गड़बड़ी रही। आरटीई के पोर्टल से भी मदद ली गई, जिसमें सीबीएससी के बच्चों के नाम भी थे। ऐसे में गफलतें बढ़ गईं।

बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर करवाकर पांचवीं के बच्चों को अनुभव देने का लक्ष्य गौण

पोर्टल पर डबल नामांकन से कुछ स्कूलों में परीक्षार्थियों को लेकर दिक्कतें आईं। चौथी के बच्चे परीक्षार्थियों की सूची में शामिल हुए तो इसका दायित्व संबंधित संस्था प्रधान और पीईईओ का है। डाइट इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

-बीएल रोत, प्राचार्य डाइट

पांचवीं की परीक्षा बोर्ड पैटर्न से ही करवानी है। पीईईओ को इसे हल्के स्तर पर नहीं लेना चाहिए। बैठकों में व्यस्त होने से हिंदी-अग्रेजी की परीक्षाओं के दौरान जायजा नहीं ले पाया।

-आरपी द्विवेदी, डीईओ माध्यमिक

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