UGC University Grants Commission
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केन्द्र सरकार ने भारतीय उच्च शिक्षा आयोग ( UGC निरसन अधिनियम) 2018 से संबंधित मसौदा अधिनियम पर विभिन्न पक्षकारों से सुझाव मांगा है। सुझाव देने की आखिरी तारीख सात जुलाई 2018 है। यूजीसी की जगह भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) को लाया जा रहा है।

एचईसीआई को अकादमिक स्तर पर बेहतर बनाने और पठनपाठन पर खास ध्यान देने पर जोर देने की बात कही गई है। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने अधिनियम के बारे में विभिन्न शिक्षाविदों, शिक्षा से जुड़े पक्षकारों एवं आम लोगों से सुझाव देने की अपील की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था बनाने की दिशा में नियामक एजेंसियों में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल की है। इस उद्देश्य से नियामक ढांचा तैयार करने और यूजीसी अधिनियम के पुनर्गठन के लिये बजट में घोषणा की गई थी।

उच्च शिक्षा में सुधार की कवायद के तहत कई कदम पहले ही उठाये गए हैं, जिसमें नैक सुधार, विश्वविद्यालयों को ग्रेड के अनुरूप स्वायत्ता (ऑटोनोमस) संबंधी नियमन, कॉलेजों को स्वायत्त (ऑटोनोमी) दर्जा प्रदान करना, दूरस्थ शिक्षा के लिये नियमन, ऑनलाइन डिग्रियों के नियमन (रेगुलेशन) शामिल है।

अधिकारी ने बताया कि यह मसौदा अधिनियम सरकार के नियामक प्रणाली में सुधार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसमें शिक्षा प्रणाली के समग्र विकास और अधिक स्वायत्ता प्रदान करने की पहल पर जोर दिया गया है।

इसमें मुख्य रूप से अनावश्यक जांच की व्यवस्था को समाप्त कर मेधा के आधार पर निर्णय लेने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

दिल्ली यूनिवर्सिटी टीजर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि इस कदम से स्वायत्ता खतरे में होगी। यूजीसी का बजट पहले ही 9800 करोड़ से घटाकर 4700 करोड़ कर दिया गया। निजीकरण को उच्च शिक्षा में लाने की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस बिल में वित्तीय शक्ति को अलग किया जा रहा है। अकादमिक शक्तियां मंत्रालय के अधीन चली जाएगी। मंत्रालय विश्विद्यालयों पर नियंत्रण रख सकेगा। सिलेबस पर उनकी पैनी नजर रहेगी। इसके ठीक विपरीत पूरी दुनिया में उच्च शिक्षा को सरकारी मशीनरी से बाहर रखा जाता है।

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