आंगनबाड़िया बनेगी आंगनबाड़ी पाठशाला

आंगनबाड़ी केन्‍द्र
आंगनबाड़ी केन्‍द्र

आंगनबाड़िया बनेगी आंगनबाड़ी पाठशाला

समेकित बाल विकास सेवाएं कार्यक्रम के तहत प्रदेश की आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से शून्य से छह वर्ष तक के नन्हे मुन्हे बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा की सेवाएं और अधिक बेहतर एवं प्रभावी करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अनेक प्रकार के नवाचार व नवीन गतिविधियां संचालित की जा रही है। आंगनबाड़िया बनेगी आंगनबाड़ी पाठशाला!

नवाचार और नवीन गतिविधियों से एक और बच्चों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं. वहीं दूसरी और आंगनबाड़ी केन्द्रों की तस्वीर भी बदल रही हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल ने बताया कि नन्हे-मुन्हे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश कि आंगनबाड़ी केन्द्रों को सीखने और खेलने के केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर शाला पूर्व शिक्षा के लिए लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि करने एवं जनसमुदाय को इस संबंध में जागरुक करने के लिए प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आंगनबाड़ी चलो अभियान के तहत प्रवेशोत्सव खिलौना बैंक एवं शिक्षण सामग्री बैंक की स्थापना की गई.

उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी चलो अभियान से एक और आंगनबाड़ी केन्द्र या आने वाले नन्हे-मुन्हें बच्चों की संख्या में वृद्धी हुई, वहीं दूसरी और केन्द्रों के प्रति समाज की जागरूकता और भागीदारी भी बढ़ी. भदेल ने बताया कि आंगनबाड़ी चलो अभियान के तहत जहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका व आशा-सहायोगिनी द्वारा घर-घर संपर्क कर बच्चों का आंगनबाड़ी केन्द्र पर पंजीयन कराने के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया, वहीं आंगनबाड़ी केन्द्र की गतिविधियों के संबंध में जनसमुदाय कि भागीदारी बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी स्तरीय समीति की बैठक भी आयोजित की गई.

उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रवेशोत्वक मनाया जाने से तीन लाख नएं बच्चे जुड़े इससे समेकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम के तहत प्रदेश में लाभांवित बच्चों की संख्या बढ़कर 15 लाख तक पहुंच गई.

भदेल ने बताया प्रदेशभर कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कि गई नवीन गतिविधियों में अजमेर जिले से वीडियों कॉन्फ्रेस के माध्यम से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने खिलौना बैंक स्थापना की. इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर विभाग व जन सहयोग से 15 लाख 36 हजार खिलौने प्राप्त हुए.

उन्होंने बताया कि इन खिलौनो से जहां एक और आंगनबाड़ी केन्द्रों पर शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों के लिए आंगनबाड़ी चलो अभियान के तहत जनसहयोग से 8 लाख पुस्तकें व 28 लाख कॉपियां, पेंसिल, रबर इत्यादी प्राप्त हुए.

उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पहली बार सधन पौधारोपण कार्यक्रम के तहत 2 लाख पौधे लगाए गए. पौधारोपण कार्यक्रम से एक ओर जहां आंगनबाड़ी केन्द्रों का वातावरण स्वस्थ व स्वच्छ होगा वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले बच्चों मे प्रकृति के प्रति लगाव भी पैदा होगा


मानव जीवन के पहले छह साल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस आयु वर्ग में सर्वाधिक तेजी से विकास होता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे का विकास संरक्षित वातावरण, परिचित माहौल में देखरेख, सेहत, पौषण, खेलकूद एवं प्रारम्भिक सीख-समझ के अभिन्न तत्वों पर निर्भर करता है। इसलिए प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा जरूरी है। ऐसे में आंगन बाडि़यों को पाठशाला का रूप दिया जाएगा।

बच्चों के सीखने की क्षमता बढ़ाने एवं विकास के उत्तम अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार ने प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा की कार्य योजना बनाई है। प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा (शालापूर्व शिक्षा) पायलेट प्राजेक्ट यूनिसेफ के सहयोग से समेकित बाल विकास विभाग के सभी 304 परियोजना के लगभग 4200 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रारम्भ की गई। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 3-6 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों के सर्वांगीण एवं बहुमुखी विकास को सुनिश्चित करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों को सीखने एवं खेलने के केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

पायलेट प्रोजेक्ट से इन केन्द्रों पर आने वाले बच्चों के विकास के विभिन्न आयामों भाषा विकास, शारीरिक विकास, बोद्धिक विकास, रचनात्मक विकास एवं सामाजिक संवेगात्मक विकास को समाहित करते हुए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा के लिए उठाए कदम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार पर प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम एवं पाठ्यचर्या का निर्माण किया गया है। प्रदेश में वर्ष 2015 में मंत्रीमण्डल के निर्णय द्वारा इस विषय को महिला एंव बाल विकास विभाग की कार्यसूची में शामिल कराया गया। तदोपरान्त यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से ईसीसीई पाठ्यक्रम तैयार कराया गया। इसी प्रकार लगभग 1500 पूर्व प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की गई। विभाग द्वारा प्री-स्कूल किट, गतिविधि पुस्तिका, वर्कबुक तैयार किए गए हैं। इनमें आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों की शाला पूर्व शिक्षा के लिए गतिविधियों का संकलन, गतिविधि पुस्तिका, बच्चे के सीखने की प्रगति का आंकलन आदि कार्य किए जाएंगे।

प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा के उद्देश्य

आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतों का निर्माण करना प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है। इस माध्यम से बच्चों को प्रभावी संवाद तथा आत्मविश्वास के साथ बोलने व सुनने के लिए तैयार करना। बच्चों में रंगों की पहचान, आकार, वर्गीकरण, मिलान, संख्या ज्ञान आदि बौद्धिक क्षमताओं का विकास भी किया जायेगा।

इसी प्रकार बच्चों में बौद्धिक विकास अवधारणाओं की समझ पैदा करना तथा उनकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना, बच्चों के शब्द भण्डार व भाषा का विकास करना एवं पढ़ने-लिखने की तैयारी करने के अवसर भी बच्चों को प्रदान किये जायेंगे। आंगनबाड़ी केन्द्र पर अनौपचारिक रूप से प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा प्रदान करते हुए बच्चाें का औपचारिक विद्यालय में गमन को भी सुगम बनाना जायेगा।