आदर्श स्‍थापित करता आदर्श विद्यालय

aadarsh Vidyalay
aadarsh Vidyalay

आदर्श स्‍थापित करता आदर्श विद्यालय

बीकानेर। यहां चित्र में आप जो देख रहे हैं वह किसी निजी शिक्षण संस्‍थान अथवा किसी कॉर्पोरेट ऑफिस की तस्‍वीर नहीं है, यह हमारे राज्‍य के ही एक आदर्श विद्यालय की तस्‍वीर है। यह एक नज़ीर है कि किसी प्रकार एक आदर्श विद्यालय आदर्श स्‍थापित कर सकता है।

राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान की शुरूआत में संभवत: सरकार की भी यही मंशा रही हो कि हर पंचायत समिति मुख्‍यालय पर कम से कम एक ऐसा स्‍कूल बनाया जाए, जिसे देखकर क्षेत्र के अन्‍य विद्यालयों का स्‍तर निर्धारित किया जा सके। शैक्षिक परिणामों के इतर स्‍कूल के माहौल के रूप में इसे आदर्श स्थिति कही जा सकती है।

teachers in aadrsh vidyalay

राज्य के सरकारी शिक्षण ढांचें में सकारात्‍मक परिवर्तन की बयार दिखाई देने लगी है। आज हम आपको रूबरू करवा रहे हैं एक ऐसे आदर्श विद्यालय से जहां केवल शिक्षण के प्रति ही शिक्षक गंभीर नहीं है, बल्कि स्‍कूल का प्रजेंटेशन भी प्राइवेट स्‍कूलों को मात करता हुआ दिखाई देता है। यह स्‍कूल है बरसिंहपुरा-खण्‍डेला का राजकीय आदर्श माध्‍यमिक विद्यालय।

पिछले दिनों राज्‍य सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी सरकारी स्‍कूलों में शिक्षकों के बारे में जानकारी मय फोटो नोटिस बोर्ड पर चस्‍पा करने के निर्देश दिए थे। आप देख सकते हैं, इस स्‍कूल में बहुत खूबसूरती से सभी 11 शिक्षकों जिनमें प्रधानाध्‍यापक, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी और शारीरिक शिक्षकों के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी गई है। नाम और फोटो के अलावा शिक्षक की जन्‍मतिथि और स्‍कूल ज्‍वाइन करने की डेट भी शामिल है।

notice board in govt schools

इस स्‍कूल का युवा स्‍टाफ केवल सरकारी आदेश मानने तक ही मुस्‍तैद नहीं है, बल्कि स्‍कूल के सभी शिक्षक यूनिफार्म में स्‍कूल आते हैं। जैसा कि चित्र में स्‍पष्‍ट है कि सभी शिक्षक न केवल यूनिफार्म में है, बल्कि सभी शिक्षकों के पहचान पत्र भी धारण किए हुए हैं। राज्‍य के सभी स्‍कूलों में इस प्रकार के सकारात्‍मक परिवर्तन दिखाई दें तो शिक्षा नए आयाम छू सकेगी।

किसी भी राज्‍य के तीन मुख्‍य उत्‍तरदायित्‍व हैं, शिक्षा, सुरक्षा और भोजन। इनमें शिक्षा सबसे महत्‍वपूर्ण है। इस विद्यालय में पढ़कर निकले छात्रों में कॉर्पोरेट सेक्‍टर के लिए जरूरी अनुशासन स्‍वत: आएगा, इसके लिए अलग से कक्षाएं लगाने की जरूरत नहीं है। शिक्षकों की जीवनचर्या ही छात्रों में स्‍वाभाविक अनुशासन और तौर तरीका सिखा देगी।

राजस्‍थान शिक्षा न्‍यूज पोर्टल की टीम ऐसे सभी शिक्षकों के सकारात्‍मक प्रयास का अभिनन्‍दन करती है और उम्‍मीद करती है कि इस आदर्श विद्यालय से प्रेरणा लेकर राज्‍य के अन्‍य विद्यालय भी शिक्षण के साथ अपने प्रजेंटेशन को भी मिसाल बना पाएं।