आरेफा की बुक ‘ The Elephant Bird’ का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

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आरेफा की बुक ‘ The Elephant Bird’ का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

उदयपुर: विलुप्त हो चुके विशालकाय एलिफेंट बर्ड की जिन्दगी पर लिखी गई पुस्तक लाखों बच्चों तक उसके वजूद की कहानी को पहुंचा रही है। शहर की युवा लेखिका आरेफा तहसीन की लिखी गई पुस्तक ‘द एलिफेंट बर्ड’  का अन्तरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर चयन हुआ। पुस्तक देशभर में तीन हजार से भी अधिक जगहों पर पढ़ी जा रही है। राष्ट्रपति भवन के पुस्तकालय में भी 15 सितम्बर को इसका पठन होगा।

स्वयंसेवी संस्था ‘प्रथम बुक्स’  ने साक्षरता दिवस अभियान ‘एक दिन, एक कहानी’  के तहत वर्ष 2016 के लिए उदयपुर की बेटी आरेफा तहसीन की पुस्तक को चुना। पुस्तक में चित्रांकन सोनल गोयल व सुमित सखूजा ने किया। कथानक अढ़ाणिया गांव में रचा गया। पुस्तक उन विशालकाय पक्षियों पर आधारित है, जो विलुप्त हो गए। ऐसे पक्षियों के बारे में लेखिका ने अपने पिता पर्यावरणविद् डॉ. रजा एच. तहसीन से जानकारी ली। पुस्तक 7 भाषाओं में अनुदित है। देशभर में तीन हजार से अधिक स्वयंसेवक 25 भाषाओं में 3200 से अधिक सत्रों में बच्चों के लिए पढ़ेंगे। बच्चे इस कहानी पर लघु नाट्य भी खेलेंगे।

इसको लेकर 10 सितम्बर को ‘द एलिफेण्ट बर्ड’  की कहानी का स्कूल, आंगनवाड़ी और रंगमंच पर मंचन किया गया। प्रदेश में जयपुर, जैसलमेर और अजमेर के गांवों में इसे पढ़ा जा रहा है। लेखिका आरेफा ने बताया कि उनकी दादी ख़ुर्शीद बानू महिला शिक्षा के आन्दोलन में अग्रणी थीं। पुस्तक की प्रमुख पात्र ‘मुनियाÓ की सोच भी दादी से प्रेरित है। आरेफा उदयपुर जिले की पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक हैं। ‘आयोरा एण्ड द क्वेस्ट ऑफ   फाइव’ , ‘डू टाइगर्स ड्रिंक ब्लड एंड 13 अदर मिस्ट्रीज ऑफ नेचर’ , ‘द लैण्ड ऑफ   द सैटिंग सन एण्ड अदर नेचर टेल्स’ , ‘टेल्स फ्रॉम द वाइल्ड’ , ‘वाइल्ड इन द बैकयार्ड’  आदि पुस्तकें भी लिख चुकी हैं।