देश में शिक्षा प्रणाली पूर्ण रूप से स्वायत्त होनी चाहिए : नारायणमूर्ति

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देश में शिक्षा प्रणाली पूर्ण रूप से स्वायत्त होनी चाहिए : नारायणमूर्ति

इन्फोसिस के सह संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में कहा है कि देश के स्कूल कॉलेजों को स्वायत्त बनाया जाना चाहिए जिससे विद्यार्थी ‘स्वतंत्र’ तरीके से सोच सकें और देश की समस्याओं का वैज्ञानिक हल ढूंढ सकें।

नारायणमूर्ति ने यहां कल शाम पहले प्रोफेसर एमजीके मेनन व्याख्यान में कहा, ‘‘बच्चों को हमारे सामने रोजाना आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। वे इन समस्यों को निपटान में बड़ा योगदान कर सकते हैं।’’ नारायणमूर्ति ने कहा कि देश की बड़ी आबादी की वजह से बच्चों की मूल शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और ठिकाने लेकर भारी बोझ की स्थिति बन जाती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले पांच साल में भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य के मामले में ज्यादातर दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देशों से पीछे है और साथ ही मानव विकास सूचकांक सूची में भारत 193 देशों में 130 वें स्थान पर है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम अपनी समस्याओं का उस स्थिति में उचित हल पा सकते हैं जबकि हम अपने बच्चों और युवाओं को स्वतंत्र तरीके से सोचने के लिए शिक्षित करें जिससे वे हमारी समस्याओं का वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी समाधान ढूंढ सकें।

हाल ही में इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी वी बालाकृष्णन ने कहा है कि समुचित उत्तराधिकारी योजना की रूपरेखा तैयार करने तथा कंपनी का पेशेवर तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिये चेयरमैन नंदन निलेकणि को 2-3 साल पद पर रहना चाहिए। बालाकृष्णन इन्फोसिस टेक्नोलाजीज लि में कंपनी संचालन मानकों में गिरावट का आरोप लगाने वालों में मुख्य रहे हैं। उन्होंने अपनी मांग फिर से दोहरायी कि सह-अध्यक्ष से स्वतंत्र निदेशक बने रवि वेंकटेशन को निदेशक मंडल से हटना चाहिए।

उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘….वर्ष 2014 में जो हुआ, वह बड़ा प्रयोग था। इसमें संस्थापकों की जगह दूसरे सीईओ आये और पेशेवर निदेशक मंडलों ने कंपनी का प्रबंधन करना शुरू किया। लेकिन बोर्ड का कामकाज सही नहीं रहा, अत: प्रयोग विफल रहा। इसीलिए अब प्रयोग विफल नहीं होना चाहिए।’’ बालाकृष्णन ने कहा कि निलेकणि को बेहतर चेयरमैन प्राप्त करने पर जोर देना चाहिए ताकि जब कभी वह भविष्य में कंपनी छोड़े तो यह सुनिश्चित हो कि बोर्ड सुरक्षित हाथ में हो।

साभार : बीजीआर