प्राइमरी शिक्षक क्या है – व्‍यंग्‍य

primary teachers
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प्राइमरी शिक्षक क्या है – व्‍यंग्‍य

प्राइमरी शिक्षक एक ऐसा जीव है जो सफेद और हरी / लाल पट्टी वाली एक सरकारी इमारत में पाया जाता,वह एक कर्मचारी है जो मल्टीटास्क परफॉर्मर है जिससे सरकार उससे उसके मूल कर्तव्य यानि शिक्षण कार्य छोड़ अन्य सारे विभागों के वो कार्य लेती है जो सरकार को राजस्व उपलब्ध नही कराते हैं।

ये वो शिक्षक कर्मचारी है जिसके अपने विभाग के अलावा ,चपरासी सफाईकर्मी से लेकर जनप्रतिनिधि, ग्रामीण ,मतदाता,यानि सारे लोग अधिकारी होते हैं।

ये वो जीव है जो लोग से ज्यादा प्रभावी है अर्थात तनाव दूर करने वाला यानि जिसे कभी भी तनाव महसूस हो , उसपर अपनी भड़ास दूर कर सकता है ।

ये ईन्जीनीयर भी है जो बिना प्रशिक्षण के भवन निर्माण कराता है और आजीवन उस निर्माण के लिये जीवनपर्यन्त जबाबदेह होता है।

ये वो मसाला है जिसे मिडिया कोई खबर न मिलने पर मनोरंजक समाचार की तरह प्रस्तुत कर सकती है ।

ये वो कर्मचारी है जिसके वेतन पर सबकी निगाह रहती है क्योंकि अन्य सारे कर्मचारी बिना वेतन के कार्य करते हैं।

ये टेलरमास्टर है जो बच्चों को 200 रूपये में ग्वालियर सूटिंग के वातानूकुलित कपड़े सिलवा सकता है ,और कमीशन भी खा जाता है।

ये हलवाई है जो 3.87 / 5.80 रूपये फाईवस्टार होटल से भी बढ़िया भोजन उचित गुणवत्ता से भरपूर बच्चों को खिला सकता है और इसमें चोरी करके अपने घर के लिये धन एश्वर्य मे वृध्दि भी करता है।

ये वो शिक्षक है जो बच्चों के सामने बिनती करता है और अभिभावक से प्रार्थना करता है कि हे प्रभो बच्चों को विद्यालय आएं/भेजे चाहे बिना कॉपी पेन्सिल के । अगर स्नान न करे तो भी वहाँ नहाने,नाखून काटने आदि की व्यवस्था के साथ मैं उसे मनोरंजक शिक्षा प्रदान करूँगा।

ये विद्यालय नामक राजनितिक संस्था का प्रभारी है जहाँ सारी राजनितिक योंजनायें, वादविवाद , स्वास्थय सेंवायें आदि मुफ्त प्रदान की जाती हैं।

वो डाक्टर भी है जो सरकारी आयरन की गोली पूरे प्रिस्क्रिप्सन के साथ ,पोलियो टिका,जापानी इंसेफेलाइटिस आदि वितरित करता है और यदि उसका कोई साईडइफेक्ट हो जाय या रियेक्शन हो जाय तो भले ही उसका उसमें कोई प्रत्यक्ष भूमिका न हो तो भी सहर्ष जिम्मेदारी लेकर सहर्ष जेल जाने हेतु सदैव प्रस्तुत रहता है।

ये वो जादूगर है जो 5000/- रू वार्षिक मे विद्यालय के सारे खर्चे चला लेता है और उसके पश्चात भी अत्यधिक धन बचत कर लेने के कारण अधिकारियों द्वारा चोर की उपाधि धारण करता है ।

₹ 8000/- वार्षिक में विद्यालय के आकार आदि को ध्यान मे रखते हुये व्हाईट सिमेन्ट व बर्जर पेण्ट से बारिश के मौसम को झेलते हुये भवन चमकाता है और न चमका पाया तो अयोग्यता की उपाधि धारण करते हुये चोरी नामक विशेष योग्यता स्वीकार करता है।

वो डे नाईट , जाड़ागर्मी ,बर्षा कभी भी ड्यूटी हेतु बिना ओवरटाइम नि:स्वार्थ भाव से ड्यूटी हेतु प्रतिबद्ध होता है।

शिक्षक की एक और विशेषता है कि यदि जंगल मे बाघ घूम रहा हो तो वनविभाग के लोग रात में भले ना निकले लेकिन शाम को भी बीएलओ , पल्स पोलियो, जन गणना, पशु गणना, मतदाता जागरूकता, स्वच्छता अभियान, कुष्ठ हटाओ अभियान, प्रसव गणना, सभी प्रकार का चुनाव कराना, अनाज वितरण कराना, आदि न जाने कितनी अतिरिक्त अद्भुत ड्यूटीज प्राइमरी का अध्यापक निभा सकता है,उसकी इस बहादुरी पर बाघ भी शर्म से पानी पानी हो जाता है ।

बिना प्रमोशन बिना शहरी भत्ता ,बिना अतिरिक्त वेतन , बिना डी एल, बिना इ एल बिना किसी अतिरिक्त लाभ के उपरोक्त सारी भूमिका का निर्वहन करता है। वह मुस्कराता है क्योंकि वो प्राइमरी का अध्यापक है।

कुल मिलकर इतनी विशेषता है कि बताते लिखते थक गया।

एक शब्द में “सहस्त्रबाहु” है।