भरतपुर : 40 फीसदी स्कूलों में नहीं बाउंड्रीवाल

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भरतपुर : 40 फीसदी स्कूलों में नहीं बाउंड्रीवाल

भरतपुर : नौनिहालों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के लिए राज्य स्तर पर समय-समय पर तमाम योजनाएं और बैठकें चलती रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नौनिहाल पग-पग पर तमाम अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। कहीं, पीने के पानी के लिए तो कहीं, बिजली के कनेक्शन के लिए। इसी तरह की अन्य अव्यवस्थाएं भी हैं, जिनसे इन्हें हर दिन दो-चार होना पड़ता है।

प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूल इन नौनिहालों की शुरुआती स्तर की वह नींव है, जहां से वे आखर ज्ञान की सीढ़ी चढऩा शुरू करते हैं। जिले में वर्तमान में 1196 राजकीय स्कूल संचालित हैं। इनमें राजकीय प्राथमिक स्कूलों की संख्या 670 हैं, जबकि राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूलों की संख्या 526 बनी हुई है।

इन स्कूलों में सालों से नौनिहाल जूझ रहे हैं। अव्यवस्थाओं के बीच वे पूरा सत्र पढ़ते हैं, फिर अगले सत्र नए बच्चे उसी कक्षा में आकर बैठते हैं और पढ़ते हैं। लेकिन अव्यवस्थाएं खत्म नहीं हो सकी। इसके लिए कई बार योजनाएं बनी, थोड़ा बहुत काम भी हुआ, लेकिन स्थितियां बदल नहीं सकी।

पहले आता था बजट, अब वह नगण्य

विभागीय अधिकारियों की मानें तो सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए करीब चार साल पहले तक स्कूलों को नियमित बजट के अलावा भी राशि मिल जाती थी, लेकिन अब यह केवल बातें ही रह गई है। सीमित बजट के चलते स्कूलों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं, जिसके कारण सरकारी स्कूलों को लेकर मन में धारणा भी बदलती गई।

अव्यवस्था का यह है आलम

जिले में संचालित कुल सरकारी स्कूलों में से करीब 40 फीसदी से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जहां सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्रीवाल तक नहीं है। वहीं, 20 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी नहीं हैं। इसी प्रकार बिजली के कनेक्शन से लेकर खेल मैदान तक की स्थिति भी हर कदम पर बदहाल है।

आश्वासनों के दम पर बीत रहा सत्र

सूत्रों की मानें तो मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के नाम पर अधिकांश सत्र केवल आश्वासनों के दम पर ही बीत रहा है। हर सत्र के दौरान राज्य स्तर से मंत्री से लेकर अधिकारी तक कई तरह के सपने दिखाते हैं, लेकिन उनमें से जमीनी स्तर पर बहुत कम ही साकार हो पाते हैं।


इन मूलभूत समस्‍याओं से जूझ रहे स्कूल

238 स्कूलों में नहीं है पेयजल सुविधा
435 स्कूलों में नहीं है बाउंड्रीवाल
521 स्कूलों में नहीं है बिजली
882 स्कूल में नहीं है खेल मैदान
सालाना इस बजट में कैसे चले काम
कक्षा 1 से 5 तक के स्कूलों में 5 हजार रुपए
मरम्मत के लिए 1 से 3 कमरों के लिए 5 हजार रुपए
3 से अधिक कमरों के लिए मिलता है 10 हजार रुपए


कुसुम वर्मा डीईओ प्रारम्भिक भरतपुर ने बताया कि सरकारी स्कूलों में जो भी कमियां हैं, उन्हें हम दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रयास में यदि समाज के हर वर्ग का साथ मिलेगा तो निश्चित तौर पर सरकारी स्कूलों की सूरत बदलेगी और बच्चों को हर सुविधाएं मिल सकेंगी।