महाराजा सूरजमल के इतिहास को CBSE पाठ्यक्रम में शामिल करें

CBSE : Central Board of Secondary Education

महाराजा सूरजमल के इतिहास को CBSE पाठ्यक्रम में शामिल करें

महाराजा सूरजमल के इतिहास को केंद्रीय पाठ्यक्रम में शामिल करने हेतु केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर से राजस्थान सरकार के संसदीय सचिव भेराराम सियोल, भाजयुमो उपाध्यक्ष पीएस कलवानियां, मानवाधिकार परिषद् के अध्यक्ष डी पी जाखड़ के नेतृत्व मे प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर अजेय महायोद्धा की शौर्य गाथा को केंद्रीय पाठ्यक्रम मे शामिल करने की मांग की। जिससे देश की युवा पीढ़ी अपने इतिहास को पढ़कर अपना गौरव बनाए रखे।

आपको बता दे समकालीन शासकों में महाराजा सूरजमल उत्तर भारत के एक मात्र ऐसे शासक थे, जिन्हें सर्वधर्म सद्भाव का प्रतीक माना जाता था। उनके शासन काल में हिन्दुओं के साथ-साथ सभी धर्मों का समान आदर था। महाराजा सूरजमल ने मुगल एवं अफगान आक्रांताओं से भारतीय संस्कृति एवं धरोहरों की रक्षा लिए भी युद्घ लड़े थे।

मराठाओं, राजपूतों में सामंजस्य के अनेक प्रसंग इतिहास में दर्ज है जो महाराजा सूरजमल को कुशल कूटनीतिज्ञ, प्रशासक, सेनापति, कला एवं संस्कृति के पारखी के रूप में स्थापित करते हैं। उनके द्वारा मैदानी नदियों का कुशलता पूर्वक उपयोग कर खेती एवं पीने के लिए की गई जल प्रबंधन योजना आज भी विश्व में अनोखी एवं विख्यात है।