यौन उत्‍पीड़न मामलों का 90 दिन में होगा निपटारा

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यौन उत्‍पीड़न मामलों का 90 दिन में होगा निपटारा

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के बारे में एक समीक्षा बैठक में कहा कि महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न संबंधी मामलों का निस्‍तारण 90 दिन के भीतर होना चाहिए, इसके साथ ही बैठक में कई महत्‍वपूर्ण बिंदुओं पर ठोस निर्णय लिए गए हैं।

बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों में यौन उत्पीड़न के लंबित मामलों की भी जांच की गई। विचार-विमर्श के आधार पर यह निर्णय लिया गया था कि डीओपीटी नए निर्देश जारी करेगा ताकि कुछ मुद्दों को उचित रूप से हल किया जा सके।

बैठक में किए गए निर्णयों के आधार पर डीओपीटी ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के संबंध में नए दिशा-निर्देश अपने कार्यालय ज्ञापन दिनांक 22.12.2016 के द्वारा जारी किए हैं।

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के बारे में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस अधिनियम से संबंधित मुद्दों पर नियमित आधार पर विचार-विमर्श करेगा।

कार्यालय ज्ञापन के अनुसार मंत्रालयों/ विभागों और आंतरिक शिकायत समितियों को निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का अनुपालन करना है :

(1) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के अधिनियम के कार्यान्वयन के बारे में संक्षिप्त विवरण में प्राप्त होने वाले और निपटाए जाने वाले मामलों की संख्या भी शामिल होगी। यह कॉलम सभी मंत्रालयों/ विभागों और प्राधिकारियों की वार्षिक रिपोर्ट का हिस्सा होगा।

(2) मामले की जांच 30 दिनों में और विशेष परिस्थितियों में शिकायत मिलने की तारीख के 90 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।

(3) मंत्रालयों/ विभागों को शिकायतकर्ता के बारे में यह नजर रखनी चाहिए कि उसे शिकायत करने के कारण किसी भी तरह से प्रताड़ित न किया जा सके। अगर पीड़ित महिला को यह लगे कि उसकी शिकायत के कारण उसे प्रताड़ित किया जा रहा है तो उसे अपना अपना प्रतिवेदन सचिव या संगठन के प्रमुख को भेजने का विकल्प भी दिया गया है। संबंधित अधिकारी को उसकी शिकायत का 15 दिनों के भीतर निपटान करना आवश्यक हो जाएगा।

(4) सभी मंत्रालयों/ विभागों को मासिक प्रगति रिपोर्ट महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास भेजना आवश्यक होगा ताकि इस बारे में हुई प्रगति पर नजर रखी जा सके।

श्रीमती मेनका संजय गांधी ने बहुत जल्द जारी किए गए दिशा-निर्देशों के लिए डीओपीटी की सराहना करते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों पर लगातार काम करेगा और अगर उसे किसी अन्य क्षेत्रों में भी जरूरत पड़ती है तो इस बारे में आगे विचार-विमर्श करेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने केन्द्र सरकार के मंत्रालयों/ विभागों के तहत आंतरिक शिकायत समिति के प्रमुखों को प्रशिक्षित करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करेगी।