शत-प्रतिशत स्वरोजगार होंगे उपलब्ध

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शत-प्रतिशत स्वरोजगार होंगे उपलब्ध

पशुधन बाहुल्य वाले राजस्थान प्रदेश में पशु पालन में डिप्लोमा करने में युवाओं को स्वरोजगार के अवसर निहित है। यह बात कुलपति डॉ. ए.के.गहलोत ने शनिवार को राज्य के पशुपालन डिप्लोमा संस्थानों के प्राचार्यों और प्रबंधकों की एक दिवसीय कार्यशाला में कही।

वेटरनरी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में 20 जिलों के 68 संस्थान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कुलपति ने कहा कि पशुपालन में डिप्लोमा एक महत्ती पाठ्यक्रम है।

कौशल विकास के इस पाठ्यक्रम को करने वाले युवाओं को शत-प्रतिशत स्वरोजगार उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि देश में पहल करके वेटरनरी वि.वि. ने राज्य के स्वस्थ पशुधन और पशुपालकों के व्यापक हित में इस पाठ्यक्रम को शुरू कर ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए हैं।

संस्थान प्रबंधक इस पाठ्यक्रम के महत्व और उपयोगिता से युवाओं को अवगत करवाएं। पशुपालन डिप्लोमा धारक कम पूंजी लागत में अपना कारोबार शुरू कर सकता है जिसकी मांग भी बहुत ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि संस्थानों को विद्यार्थियों से सम्बद्ध उद्यमिता विकास और अन्य प्रकार की गतिविधियों के संचालन की पहल करनी चाहिए। इसके लिए संस्थान की वेबसाइट, छात्रों को इंटरनेट से सम्बद्धता, वेटरनरी क्लिनिक, डेयरी, पोल्ट्री-फार्म की स्थापना सहित राज्य की पशुधन कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में सहभागिता बढ़ानी चाहिए। वेटरनरी कॉलेज के अधिष्ठाता प्रो. जी.एस. मनोहर ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी।

वित्त नियंत्रक अरविन्द बिश्नोई, परीक्षा नियंत्रक प्रो. एस.एस. सोनी ने अपने विचार व्यक्त किए। डिप्लोमा पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. एल.एन. सांखला ने प्रवेश प्रक्रिया के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया। डॉ. एस.के. झीरवाल ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यशाला के अंत में हुए खुले सत्र में विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने संभागियों की शंकाओं का समाधान किया।