स्काउट गाइड संगठन नहीं है : आदर्श विचार है

vasudev devnani

स्काउट गाइड संगठन नहीं है : आदर्श विचार है

शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा है कि स्काउट गाइड संगठन नहीं वह आदर्श विचार है, जिसके जरिए नई पीढ़ी में छिपी ऊर्जा को राष्ट्रहित के कार्यों में लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि स्काउट-गाईड के विचार को जन-जन तक पहुंचाने की आज जरूरत है। प्रो. देवनानी सोमवार को कर्नाटक के मैसूर में आयोजित स्काउट-गाईड की जमूरी में मनाए गए राजस्थान दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि स्काउट-गाइड बच्चों के चारित्रिक विकास से जुड़ा एक शैक्षिक आंदोलन है। इसके क्रिया कलापों और विभिन्न सोपानों के प्रशिक्षणों से विद्यार्थियों का सवार्ंगीण विकास होता है। उन्होंने जमूरी के अंतर्गत देश के भिन्न भिन्न भागों से आए स्काउट-गाईड की चर्चा करते हुए कहा कि भिन्न भाषा, भौगोलिकता, परिवेश, भिन्न परम्पराओ के बावजूद भारत एकता के सूत्र में बंधा है।

आत्मीयता और अपनापे की यह संस्कृति और कहीं नहीं मिलेगी। उन्होनें कहा कि स्काउट विद्यार्थियों को अनुशासित बनाता है। जीवन में आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कैसे किया जा सकता है, यह स्काउट-गाईड संगठन से ही बेहतर तरीके से समझाता है।

स्काउट-गाईड के तहत प्राथमिक चिकित्सा, सहायता, ध्वज शिष्टाचार, झंडा गीत तथा जीवन कौशल, लक्ष्य निर्धारण, व्यक्तिगत स्वच्छता, निर्णय लेने की क्षमता आदि सभी ऎसे कार्य हैं जो जीवन को संवारते हैं। कैसे हम दूसरों के काम आए, इसकी सीख यह संगठन देता है। राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र में हुए विकास की सराहना स्काउट-गाईड जमूरी में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की सभी ने सराहना की।

शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने जब राजस्थान में मुख्यमंत्री श्री राजे के निर्देशन में अपनाए गए शैक्षिक नवाचारों के साथ विद्यार्थियों को चारित्रिक शिक्षा को सर्वोपरी रखने के बारे में समारोह में जानकारी दी तो सभी ने एक स्वर में राजस्थान मे हुए कार्यों को मुक्तकंठ से सराहा।

प्रो. देवनानी ने बताया कि राजस्थान में विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के साथ ही इस बात पर ध्यान दिया गया है कि कैसे उनका सर्वांगीण विकास हो। इसीलिए महापुरूषों की जीवनियों को पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित किया है। विद्यार्थियाें को प्रार्थना और योग के संस्कारों से जोड़ा है ताकि वे जीवन में स्वस्थ चित्त होकर निरंतर आगे बढ़ने को प्रेरित हो सके।

उन्होंने बताया कि राजस्थान में प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक विद्यालय कक्षा एक से 12 तक स्थापित करने के अंतर्गत राज्य में कुल 9 हजार 895 राजकीय विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। इन विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक, आधारभूत सुविधा (कक्षा कक्ष बालक-बालिकाओं के लिये शौचालय पृथक-पृथक, चारदीवारी, प्रयोगशाला), कम्प्यूटर सुविधा एवं इन्टरनेट कनेक्शन, गुणवत्ता परक शिक्षा आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

ये आदर्श विद्यालय आस-पास के अन्य विद्यालयों के लिये संदर्भ केन्द्र एवं मेन्टर विद्यालय के रूप में कार्य करने लगे हैं। प्रो. देवनानी ने बताया कि इसी प्रकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में कक्षा एक से 8 या एक से 5 के विद्यालयों को उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ये उत्कृष्ट विद्यालय आदर्श विद्यालय के संस्था प्रधानों के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विकसित होने लगे हैं। उत्कृष्ट विद्यालयों में भी समस्त मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ बाल केन्दि्रत, सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन आधारित शिक्षण पद्धति लागू करने की पहल की गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य के शैक्षिक दृष्टि से पिछडे 132 ब्लॉक्स में केन्द्रीय विद्यालयों के पैटर्न के अनुरूप अंग्रेजी माध्यम के स्वामी विवेकानन्द राजकीय मॉडल स्कूलों का संचालन हमने प्रारम्भ किया है। राज-ई ज्ञान पोर्टल विशेष रूप से प्रारंभ किया गया है। इसके जरिए कक्षा एक से 12 तक के विद्यार्थियों को हिन्दी एवं अंग्रेजी में डिजीटल पाठ्य सामग्री के साथ ही विभिन्न विषयों की संदर्भ सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है।