माध्यमिक शिक्षा के 348 स्कूल, विभाग की परीक्षा में 34 ही पास

rajasthan board of secondary education

डूंगरपुर। ऐसा पहली बार हुआ कि स्कूलों के प्रधानाचार्य खुद ने अपनी ही स्कूल का आकलन किया और स्वयं को ही फेल घोषित कर दिया। शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा की स्कूलों की हालात जांचने के लिए एक गतिविधि शुरू की थी, जिसमें जिले के 348 स्कूलों (348 schools) में से 34 स्कूल ही पास हो पाए। बाकी 314 स्कूल फेल साबित हुए। हालांकि बड़ी बात तो यह है कि यह आकलन प्रिंसिपलों ने ही किया है।

दरअसल शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार ने जुलाई माह में एक सिस्टम लागू किया था। जिसमें स्कूल की स्वच्छता, बोर्ड का परीक्षा परिणाम, शाला दर्पण की फीडिंग अपडेट को लेकर रैंकिंग तय की थी। जिसमें सबसे अच्छी स्कूल के लिए 5 स्टार और सबसे खराब के लिए 1 स्टार तय किया था। इसकी फाइनल रिपोर्ट हाल ही में विभाग ने जारी कर दी, जिसमें 34 स्कूलों ने 5 स्टार हासिल कर अपने आप को जिले में बेस्ट साबित किया, लेकिन 314 स्कूलों की रैंकिंग 1 से 3 के बीच है।

स्कूलों की हालत जांची, स्वच्छता, शाला दर्पण और परीक्षा परिणाम के आधार पर तय हुई 5 स्टार रैंकिंग

5 स्टार की रैंकिंग हासिल करने वाले स्कूलों राउमावि रायकी, आसपुर, मोड़तिया, नवलश्याम, चुंडावाड़ा, कनबा, आसियावाव, माला खोलड़ा, ढूंंढी, पियोला पंचकुंडी, धावड़ी, सवगढ़, पुनाली, नई बस्ती डूंगरपुर, बटका फला, भेमई, जोगपुर, चितरी, ददरोडा, लिखतिया, आड़ीवाट, भाणा सिमल, गोरादा, बोड़ीगामा छोटा, कराड़ा, वणोरी, करियाणा, फलातेड़, लिंबोड़ बड़ी, मांडली, गड़ा वाटेश्वर। इन स्कूलों में 5 स्टार रैंकिंग हासिल की है।

इन स्कूलों ने प्रदेश में बढ़ाया डूंगरपुर का मान

यह अच्छी पहल- शिक्षा उपनिदेशक रहे गणेशलाल पटेल ने बताया कि यह एक अच्छी पहल है, जो भी कमियां रही है, उसे दूर करने के लिए प्रधानाचार्यों के पास एक मौका है। आगामी समय में होने वाले मूल्यांकन में अपने आप को बेहतर बना सकते हैं। अभी 34 स्कूलों को ही 5 स्टार हासिल होना अच्छा नहीं कहा जा सकता है। इसके लिए विभाग के अधिकारियों को भी सोचना चाहिए।

ऐसे समझिए : रैंकिंग की गणित

स्वच्छता – स्कूल में प्रधानाचार्य कार्यालय से लेकर कक्षा कक्ष और पूरे परिसर की साफ – सफाई को इस में जोड़ा था। इसके लिए अलग – अलग मापदंड तय किए गए थे। जैसे शत प्रतिशत सफाई होने पर 10 अंक देने थे।

शाला दर्पण – इसको लेकर पहले ही विभाग ने सभी शिक्षकों से कंप्यूटर कोर्स कराया था, ताकि शाला दर्पण पर अपडेट स्वयं ही कर सके। लेकिन, प्रधानाचार्यों की लचर मॉनिटरिंग के कारण यह व्यवस्था भी फेल हो गई। जिसमें अपनी अपनी कक्षा की डिटेल अपडेट करनी थी। साथ ही बच्चों को लेकर जानकारी भी देनी थी।

बोर्ड परिणाम – पिछले वर्ष की 8वीं, 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम भी देखा गया। जिस स्कूल का परिणाम 60 प्रतिशत से अधिक है, वह अच्छे माने गए है, लेकिन इससे कम और 40 से ऊपर वाले औसत ही माने जाते है।

यह स्व मूल्यांकन था और प्रधानाचार्यों को गाइडलाइन पहले से ही दी गई थी। स्वयं के ही मूल्यांकन में यह आंकड़ा आया है। जो कमियां रह गई हैं, उन्हें दूर करने के लिए कहा गया है।

– हेमंत पंड्या, एडीपीसी रमसा