सरकारी कवायद से 3800 विद्यालयों पर संकट

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सरकारी कवायद से 3800 विद्यालयों पर संकट, समायोजन की भी चर्चा

राजस्थान में एक बार फिर स्कूल बंदी की तैयारी चल रही है। पहले जीरो नामांकन वाले विद्यालयों को बंद किया जा रहा था। अब प्राथमिक स्तर पर 15 से कम और उच्च प्राथमिक स्तर पर 30 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद किया जाएगा।

हालांकि, बंद करने की बजाय इसे समायोजन का नाम दिया जा रहा है। इसके तहत स्कू ल का प्रशासनिक मर्ज निकट के किसी विद्यालय में किया जाएगा। अब प्रारम्भिक शिक्षा के 3800 स्कूलों को बंद करने की तैयारी है। प्रारम्भिक स्तर पर काम पूरा कर दिया गया है। इसके तहत विभाग ने कम नामांकन संख्या का सहारा लेकर एेसे स्कूलों की जिलेवार सूचियां तैयार की हैं।

राज्य में 3 साल में करीब 15 हजार से अधिक स्कूल पहले ही बंद कर अन्यत्र मर्ज किए जा7 चुके हैं। इससे शहरी क्षेत्रों में तो समस्या नहीं आई है, लेकिन ग्रामीण, जनजातीय और दूरदराज के दुर्गम क्षेत्रों में संकट की स्थिति होना तय है। स्कूल को पास ही एक या दो किलोमीटर दूर के किसी स्कूल में समायोजित किया जाएगा। इससे कई बालिकाओं और छोटे बच्चों के अभिभावकों की परेशानी बढऩा तय है।

अकेले जयपुर जिले में ही 250 से अधिक स्कूल इस श्रेणी में आ रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध सूची के आधार पर शुक्रवार तक प्रस्ताव तैयार कर भिजवाने हैं।

ये हैं निर्देश

  • 15 कम नामांकन वाले सभी प्राथमिक विद्यालय के प्रस्ताव भेजे जाए।
  • 30 से कम नामांकन वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रस्ताव भेजे जाए।
  • एेसे बालिका विद्यालय जिनकी कक्षा 6, 7 और 8 में 15 से कम नामांकन हैं।
  • प्राथमिक विद्यालयों को एक किलोमीटर और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दो किलोमीटर दूर के विद्यालयों में मर्ज किया जाए।
  • शून्य नामांकन वाले विद्यालयों को कहीं भी मर्ज किया जा सकता है।
  • मर्ज किए जा रहे विद्यालय के राजस्व ग्राम में कोई दूसरा विद्यालय नहीं है तो उसे दूसरे राजस्व ग्राम में भी मर्ज किया जा सकता है।