90% से ज्यादा अंक प्राप्त किए तो 11-12वीं में निशुल्क पढ़ेगा विद्यार्थी

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बांसवाड़ा। बड़ोदिया स्थित आदर्श सरकारी सीनियर सैकंडरी स्कूल ने मेधावी विद्यार्थियों के लिए फीस मुक्ति की अभिनव पहल की है। दसवीं में 90 फीसदी या इससे ज्यादा नंबर लाने वाले विद्यार्थी को फीस नहीं देनी पड़ेगी। स्कूल प्रशासन ने नए शैक्षिक सत्र में यह अभिनव पहल की है, जिससे ऐसे बच्चों के लिए दानदाता फीस का खर्चा उठाएंगे। इसमें किसी तरह का जाति-वर्ग का बंधन नहीं है। दरअसल, स्कूल प्रशासन ने पिछले दिनों इस साल के प्रवेशोत्सव में कुछ अलग करने की मंशा भामाशाहों और दानदाताओं के समक्ष व्यक्त की। इस पर अच्छा समर्थन मिला, तो प्रस्ताव बनाया गया कि बड़ोदिया स्कूल में 11वीं में दाखिला लेने आने वाले दसवीं के 90 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त बच्चे को आगे दो साल तक स्कूल को अदा होने वाले सरकारी शुल्क के साथ विकास शुल्क की राशि भी माफ रहेगी। इसका भुगतान दानदाता करेंगे।

सभी पांच संकाय सभी में विशेषज्ञ करेंगे बच्चों की मदद

स्कूल में अभी 11वीं और 12वीं स्तर पर विज्ञान, गणित, कृषि, विज्ञान, कला तथा वाणिज्य संकाय में पढ़ने-पढ़ाने के लिए पूरे बंदोबस्त हैं। सत्र 2017-18 में यहां 1140 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां लोक सेवा आयोग से सीधी भर्ती परीक्षा में चयनित अधिकतम प्राध्यापकों के साथ विषय विशेषज्ञ शत प्रतिशत उपलब्ध हैं ही, जहां कहीं बच्चों को कमी लगती है, आईसीटी लैब के स्मार्ट क्लास और कोटा से विज्ञान और गणित के विशेषज्ञों की कक्षाओं के सीधे प्रसारण से वह भी दूर होने से यह स्कूल निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं से मुकाबला कर रहा है।

दानदाता भी नहीं चाहते अपना नाम

नई पहल का मकसद एक ही है कि फीस के चक्कर में प्रतिभावान बच्चे या उनके अभिभावक परेशान नहीं हो। हमारी पेशकश पर ऐसे दानदाता भी सामने आए हैं, जिन्होंने अग्रिम राशि देने की बात कर शर्त रखी है कि उनका नाम गुप्त रखा जाए। इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। अब सोमवार को होने वाली विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति,अभिभावक अध्यापक परिषद तथा पूर्व विद्यार्थी मंच की साझा बैठक में प्रस्ताव का अनुमोदन होगा। इसके बाद जरूरतमंद मेधावी बच्चों को दो साल निशुल्क पढ़ने-पढ़ाने की सुविधा दिलाने की शुरुआत करेंगे।

-प्रकाश पंड्या, प्राचार्य आदर्श सीनियर सैकंडरी स्कूल, बड़ोदिया

नया पदस्थापन अब तक नहीं, पहले ही पोर्टल पर जोड़ दिए दूसरे स्कूलों के साथ शिक्षकों के नाम

बांसवाड़ा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग में काउंसलिंग के बाद 20 दिन भी जिले में 45 प्रबोधकों समेत 64 अधिशेष शिक्षकों का पदस्थापन नहीं हो पाया है। अभी शिक्षक अपने पुराने स्कूलों में ही ड्यूटी दे रहे हैं, लेकिन इन्हें पोर्टल पर आवंटित स्कूलों से जोड़ दिया गया है। इससे विभाग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, विभाग में लेवल सेकंड गणित-विज्ञान विषय के 20 अभ्यर्थी, प्रबोधक लेवल 2 विषय अंग्रेजी, प्रबोधक शारीरिक शिक्षक के 7 पदों और लेवल प्रथम-द्वितीय के 12 पदों के लिए 10 अप्रैल को काउंसलिंग की गई। इसके बाद फाइल डीईसी से अनुमाेदन के लिए जिला परिषद भेजी गई। चूंकि डीईसी की बैठक हुई ही नहीं, लिहाजा इस पर मुहर नहीं लगने से नए पदस्थापन आदेश जारी ही नहीं हो पाए। दूसरी ओर, तबादलों का दौर चलने से शाला दर्शन पोर्टल पर रिक्तियां दिखलाई दे रही थीं। ऐसे में जिन स्कूलों का इन 64 शिक्षकों को आवंटन किया गया है, वहां का खाली पद दिखलाई नहीं दे, इसलिए विभाग ने पहले ही नाम जोड़ दिए गए हैं। इससे मौजूदा स्कूल से रिलीव बगैर ही शिक्षक ऑनलाइन नए पदस्थापन स्थल पर पहुंच गए हैं। इस बारे में चर्चा पर डीईओ प्रारंभिक प्रेमजी पाटीदार का कहना है कि खाली पद दिखने पर तबादलों से नया पदस्थापन संभव हो जाता। इससे ओवरलेपिंग की समस्या बन सकती थी। चूंकि इन शिक्षकों के स्कूल आवंटन हो चुके हैं और केवल अनुमाेदन ही बाकी है, लिहाजा पोर्टल पर नाम डाले गए हैं। आने वाले दिनों में जिला परिषद से अनुमाेदन पर सब संतुलित हो जाएगा। हालांकि जिला परिषद में अभी डीईसी की बैठक की तारीख तय नहीं हुई है।