अब इन अध्यापकों को नहीं लेना पड़ेगा प्रशिक्षण

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शिक्षा विभाग ने दी छूट

बीकानेर। उन वरिष्ठ शिक्षकों को अब प्रशिक्षण नहीं लेना पड़ेगा जो पहले प्रशिक्षण ले चुके है। वर्ष 2015 के बाद प्रशिक्षित इन शिक्षकों के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों को छूट देने के आदेश दे दिए है। परिषद के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र ने आदेश में कहा कि प्रशिक्षणार्थियों की सूची में शामिल ऐसे शिक्षकों को पिछले 2 सालों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। जिसके आधार पर जिला परियोजना समन्वयक छूट देंगे। गलती करने वालों को नोटिस परिषद ने ऐसे शिक्षकों के स्थान पर अब तक प्रशिक्षण नहीं लेने वालो शिक्षकों को शामिल करने के निर्देश भी दिए है। साथ ही उन संस्था प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए कहा है जिन्होंने प्रशिक्षार्थियों की सूची में पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षकों के नाम दर्ज कर दिए थे।

सेवानिवृत्ति वालों को भी छूट

प्रशिक्षण ने उन वरिष्ठ शिक्षकों को भी छूट दी है जिनके सेवानिवृत्त होने में केवल एक साल का समय शेष है। साथ ही गंभीर बीमारी से पीडि़त, गर्भवती शिक्षिका, जिस शिक्षिका के छह माह तक के बच्चे है, उन्हें भी प्रशिक्षण से छूट मिल सकती है। साथ ही 3 साल तक के बच्चों वाली शिक्षिकाओं को आवास में रहने की बाध्यता से अलग रखा गया है।

महिला वर्ग में प्रथम स्थान, मंडल आवंटित नहीं करने पर कोर्ट ने मांगा जवाब

शाहपुरा। सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2016 के विज्ञान विषय से महिला वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बावजूद मेरिट के अनुसार मंडल आवंटित नहीं करने के मामले से जुड़ी याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई कर माध्यमिक शिक्षा विभाग के शासन सचिव एवं निदेशक को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। जिला निवासी संगीता कुमारी की ओर से दायर याचिका में एडवोकेट ने बताया कि प्रार्थिनी ने आरपीएससी की ओर से निकाली गई सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2016 में विज्ञान में ओबीसी महिला वर्ग में आवेदन किया था। भर्ती परीक्षा के परिणाम में प्रार्थिनी ने महिला वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर सामान्य वर्ग में चयन हो गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने चयनित अभ्यर्थियों से मंडल आवंटित करने के लिए विकल्प पत्र मांगे गए। इसमें प्रार्थिनी ने चुरू, जयपुर एवं बीकानेर मंडल की सर्वोच्च प्राथमिकता भरी थी लेकिन विभाग ने प्रार्थिनी की मेरिट एवं विकल्प पत्र में दी गई प्राथमिकता को नजर अंदाज कर उसे नियुक्ति के लिए उदयपुर मंडल आवंटित कर दिया। इससे कम मेरिट वाली महिला अभ्यर्थियों को जयपुर मंडल दे दिया। याचिका में बताया कि विभाग को मेरिट एवं विकल्प पत्र में दी गई वरीयता के अनुसार मंडल आवंटित करना चाहिए था लेकिन विभाग ने मनमाने तरीके से मंडल आवंटित किए। न्यायाधीश वीएस सिराधना ने शिक्षा विभाग को इस मामले में दो सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए।