अब सुविवि पढ़ाएगा देश भर के शिक्षकों को बायोटेक्नोलॉजी

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कॉलेज शिक्षकों के लिए उदयपुर में अब ऑनलाइन शिक्षण-प्रशिक्षण सामग्री तैयार होगी।

उदयपुर। देशभर के कॉलेज शिक्षक अब बायो टेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी व बायो साइंस की नवीनतम तकनीक, विश्व स्तरीय बदलाव और शोध उदयपुर के मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से ऑनलाइन पढ़ेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बायो टेक्नोलॉजी में सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय का चयन देश के एकमात्र नेशनल रिसोर्स सेंटर के रूप में किया है। कॉलेज शिक्षकों के लिए उदयपुर में अब ऑनलाइन शिक्षण-प्रशिक्षण सामग्री तैयार होगी। मंत्रालय ने इसके लिए देशभर के विवि से आवेदन आमंत्रित किए थे, जिसमें प्राप्त आवेदनों के अध्ययन के बाद 2 मई को सूची जारी की गई। इसमें विभिन्न आइआइटी संस्थाओं व दिल्ली विवि सहित देश के 75 विश्वविद्यालयों में से केवल सुखाडिय़ा विवि का चयन ही किया गया है। इसका एक आधार यह भी है कि दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर, राजसमंद, बासंवाड़ा व डूंगरपुर में अधिक संख्या में जैव वनस्पतियों की कई प्रजातियां हैं जिनके संरक्षण को लेकर भी कार्य होगा।

होंगे ऑनलाइन ओरिएंटेशन प्रोग्राम

इन विषयों में कॉलेज शिक्षकों को और दक्ष करने के साथ ही लुप्त होती वनस्पतियों के संवद्र्धन का कार्य होगा। इसके लिए विवि की ओर से एक एकेडमिक काउंसिल का गठन किया जाएगा, जिसमें सम्पूर्ण भारत के प्रख्यात बायो टेक्नोलोजी विशेषज्ञ शामिल होंगे। सदस्यों की ओर से ऑनलाइन ओरिएंटेशन कार्यक्रमों के मॉड्यूल्स डिजाइन किए जाएंगे। समय-समय पर ऑनलाइन रिकॉर्डिंग प्रसारित की जाएगी।

बजट मिलेगा

सुखाडिय़ा विवि का चयन बायोटेक्नोलॉजी के नेशनल रिसोर्स सेन्टर के रूप में हुआ है। प्रतिवर्ष करीब चार करोड़ रुपए का बजट मिलेगा। हम यहां से ऐसे ऑनलाइन विषय तैयार कर देश भर के शिक्षकों को पढ़ाएंगे।

-जेपी शर्मा, कुलपति एमएलएसयू उदयपुर

बड़ी कठिन डगर है पढाई की

पढ़ने के लिए इस तपती गर्मी में दो से दस किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर उदयपुर के मासूम, उदयपुर जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 21 हजार 270 है।

उदयपुर। सरकार के सब पढें-सब बढ़े नारे की कड़वी सच्चाई यह है कि सरकारी स्कूल में पढऩे वाले राज्य के करीब पौने तीन लाख विद्यार्थी अपने घर से करीब दो से दस किलोमीटर की दूरी तय कर प्रतिदिन स्कूल पहुंचते हैं। इनमें से एक लाख 84 हजार तो पांचवीं कक्षा तक के मासूम हैं। स्थिति स्पष्ट है कि राज्य में आज भी ऐसे कई गांव व ढाणियां हैं, जहां सरकारी स्तर पर पढ़ाई का कोई साधन नहीं है। उदयपुर जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 21 हजार 270 है।

ऐसे बच्चों पर खर्च होंगे अब एक अरब

राज्य के ऐसे बच्चों को अब ट्रांसपोर्ट वाउचर स्कीम के तहत राशि दी जाएगी। इस तरह प्रारंभिक शिक्षा पर 18 लाख 42 हजार रुपए और उच्च प्राथमिक में 13 लाख रुपए प्रतिदिन खर्च होंगे। प्रति माह 3 करोड़ 90 लाख 53 हजार 700 रुपए और सालाना आंकड़ा एक अरब से अधिक जाएगा।

चार जिलों में अधिक समस्या

प्रदेश में चार ऐसे जिले हैं, जिनमें पहली से पांचवीं में पढऩे वाले सर्वाधिक बच्चे दो किलोमीटर से अधिक दूर स्थित दूसरे गांव की स्कूल में पढऩे जाते हैं। इनमें बाड़मेर के 19806, बांसवाड़ा के 10789, जोधपुर के 14929 और उदयपुर जिले के 14909 विद्यार्थी हैं।

अब ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना का लाभ..

पहली से पांचवीं तक के एक किलोमीटर से अधिक दूरी से पढऩे आने वाले बच्चों को दैनिक 10 रुपए और छठीं से आठवीं तक के बच्चों के लिए जो दो या इससे अधिक किलोमीटर दूरी से पढऩे जाते है, उन्हें दैनिक 15 रुपए दिए जाएंगे।

-गिरिजा वैष्णव, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारभिक उदयपुर