राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अकादमिक क्रेडिट बैंक से छात्रों को मिलेगी स्‍वतंत्रता

MHRD now Shiksha Mantralay

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक बहुत ही आवश्यक, आगे ले जाने वाली एवं अभिनव, छात्र केंद्रित नीति है जहां अकादमिक क्रेडिट बैंक (एबीसी) के माध्यम से छात्रों को कई प्रकार की सुविधाएं जैसे कई बार प्रवेश और बाहर जाने का विकल्प, विषयों की पसंद, समयावधि का चुनाव, विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से क्रेडिट अर्जित करने का विकल्प और गति की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। 

यह जानकारी भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने “क्रेडिट मेकेनिज्म, मोबिलिटी एंड एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट” पर एक राष्ट्रीय वेबिनार में दी।

इस वेबिनार में प्रो. भूषण पटवर्धन, उपाध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), प्रो. आर. पी. तिवारी, सदस्य यूजीसी और कुलपति, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रो. संदीप संचेती, कुलपति, एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, प्रो. (डॉ.) एस. पी. त्यागराजन, मद्रास विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आदि को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल, महासचिव, भारतीय विश्वविद्यालय संघ, नई दिल्ली को वेबिनार में वक्ता और मॉडरेटर के रूप में आमंत्रित किया गया था। डॉ. सुरेंद्र सिंह, जेएस, यूजीसी ने वेबिनार का समन्वय किया।

प्रो. संदीप संचेती ने उल्लेख किया कि एबीसी लचीलेपन, कई बार आने और कई बार बाहर जाने, जीवन भर सीखने और छात्रों को विषयों का चयन करने की स्वतंत्रता को बढ़ावा देगा और उन्हें अपनी डिग्री का प्रारूप तैयार करने में सक्षम करेगा क्योंकि इसके माध्यम से वे पाठ्यक्रमों को चुनने में सक्षम होंगे। उन्होंने मांग आधारित परीक्षा की अवधारणा की सराहना की और एबीसी के कई पहलूओं के बारे में विस्तार से बताया।

प्रो. आर. पी. तिवारी ने ने जीवन भर सीखने वाले समाज के निर्माण में एबीसी की अहम भूमिका के बारे में बताया तथा छात्रों को इससे मिलने वाले विभिन्न लाभों के बारे में भी बताया। उन्होंने जोर दिया कि एबीसी का मुख्य उद्देश्य छात्र केंद्रित उच्च शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना और छात्रों को पाठ्यक्रम एवं संस्थानों का चयन करने में सक्षम बनाना है; उन्हें अपनी पसंद के अनुसार डिग्री पूरी करने के लिए अपनी पढ़ाई की गतिशीलता को चुनने की अनुमति दें। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एबीसी भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में प्रतिस्पर्धा और दक्षता में सुधार के साथ पहुंच, समान भागीदारी, गुणवत्ता, लचीलापन, सहयोग और पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

प्रो. भूषण पटवर्धन ने यूजीसी द्वारा भारतीय उच्च शिक्षा को नियमों और नियामकों के एक समूह से मुक्त करने के लिए किए गए सिफारिशों के अनुरूप कार्य करने के प्रयासों की सराहना की। अकादमिक क्रेडिट बैंक (एबीसी) इंटर और इंट्रा विश्वविद्यालय प्रणाली के तहत छात्रों की गतिशीलता के लिए वातावरण बनाकर परिसरों के एकीकरण और वितरित शिक्षण प्रणाली की सुविधा प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी जोर दिया कि एबीसी क्रेडिट पहचान प्रणाली प्रदान करके कौशल एवं अनुभवों को क्रेडिट आधारित औपचारिक प्रणाली में समेकित रूप से एकीकृत करने में मदद कर सकता है।

प्रो. त्यागराजन ने अपने पाठ्यक्रम के दौरान भारत की परंपरागत विद्या प्रणाली का उल्लेख किया और महसूस किया कि एबीसी में प्राचीन काल की 64 कलाओं और 14 विद्याओं को फिर से समाहित किया जा रहा है। । एबीसी सीखने को बढ़ावा देने और कई बार फिर से सीखना शुरू करने की ओर बारबार ले जाएगा। उन्होंने महसूस किया कि इस अवधारणा के माध्यम से उच्च शिक्षा कठोरता से लचीलेपन की ओर बढ़ेगा, यह छात्रों को विद्या के उपयोगकर्ता के बजाय विद्या का निर्माता बना देगा और उनके समग्र विकास हेतु उन्हें नौकरी खोजने वाले के बजाय नौकरी उत्पन्न करने वाला बना देगा। शैक्षणिक स्रोत के साथ कौशल शिक्षा के समाकलन से रोजगार में सुधार होगा और वैश्विक स्थानिक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।