बच्चों के गलत निर्णय पर सहमति न दें, न अच्छे निर्णय पर इच्छाएं थोपें माता-पिता

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उदयपुर। कलेक्टर बिष्णुचरण मलिक ने कहा कि बच्चों के मूल गुरु माता-पिता होते हैं। मां-बाप ही उन्हें अच्छे से जानते हैं और उनकी बेहतर ढंग से मदद कर सकते हैं। मां-बाप कभी भी बच्चों के गलत निर्णय पर सहमति नहीं देनी चाहिए, न ही बच्चों के अच्छे निर्णय पर स्वयं की इच्छाएं थोपना चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने कहा कि 10वीं के बाद बच्चों को अति महत्वाकांक्षी नहीं बनना चाहिए। धैर्य के साथ कॅरिअर की राह को आगे बढ़ाना चाहिए। कलेक्टर मल्लिक और एसपी गोयल रविवार को चित्तौड़ा जैन विकास संस्थान की कॅरिअर मार्गदर्शन मोटिवेशनल सेमिनार ‘कॅरियर कन्वेंशन’ में आईएएस, आरएएस, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एमबीए, बैंकिंग, क्लेट, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों को टाउनहॉल स्थित सुखाडिय़ा रंगमंच पर संबोधित कर रहे थे। सेमिनार में फिर सामने आया कि अभिभावक खुद की इच्छाएं बच्चों पर न थोपें। बच्चे की रूचि किसमें है उसी पर फोकस करें। क्योंकि, थोपी गई इच्छाएं बच्चों के कॅरिअर में बाधक बनती हैं। बच्चे जीवन में हारना, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और हारने से सीख लेते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें। ताकि भविष्य की बेहतर नींव रख सकें।

इन्होंने भी बताए सफलता के नुस्खे

टीएडी कमिश्नर ऑफिस डायरेक्टर सुधीर दवे ने कहा कि लोग सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। प्रो. दीपक शर्मा ने कहा कि छात्रों को लक्ष्य प्राप्ति, रूचि और कौशल विकास के गुणों पर फोकस करना चाहिए। प्रो. एसएल जैन और प्रदीप सेलावत ने भी विचार व्यक्त किए। एसेंट क्लासेज डायरेक्टर मनोज बिसारती ने कहा विद्यार्थियों को जुनून हमेशा कायम रखना चाहिए। सारथी क्लासेज डायरेक्टर एमएस भाटी ने कहा कि जैन दर्शन हमेशा आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। अरावली हॉस्पिटल डायरेक्टर डॉ. आनंद गुप्ता ने कहा कि इंजीनियर, साइंटिस्ट, डॉक्टर आदि बनना चाहते हैं, लेकिन कुछ प्रतिभाएं डांसर, सिंग, हीरो भी बनने का दम रखती हैं। उन्हें रोके नहीं। एमडीएस ग्रुप ऑफ स्कूल्स डायरेक्टर डॉ. शैलेन्द्र सोमानी, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद शर्मा, डायरेक्टर प्रो. टेलेंट विनीत बया आदि ने भी विचार व्यक्त किए। मुख्य संयोजक सोहन जावरिया ने बताया कि संस्था की वेबसाइट का विमोचन किया गया।