सरकार भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध

सरकार भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध
सरकार भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध

सरकार भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, सरकार भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध

केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को कहा कि ‘भारत में रहकर, भारत में ही पढ़ो’ विजन के माध्यम से सरकार भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

निशंक ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे द्वारा नई शिक्षा नीति-2020 पर आयोजित एक कार्यशाला का उदघाटन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 34 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हमारी नई शिक्षा नीति को ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक, शिक्षक से लेकर शिक्षाविद तक, छात्र से लेकर अभिभावक तक एक ‘अद्भुत स्वीकार्यता’ मिली है। जो इसे 21वीं सदी के नए भारत के ‘विजन डॉक्यूमेंट’ के रूप में स्थापित करती है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे सभी संस्थान इस नीति की आत्मा को समझते हुए इसे पूर्ण निष्ठा एवं ईमानदारी से लागू करेंगे।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में ‘स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया एंड इंटरनेशनलाइजेशन ऑफ एजुकेशन’ के माध्यम से विदेशी छात्रों और विदेशों में पढ़ाई के इच्छुक भारतीय छात्रों को भारत में अध्ययन के लिए आकर्षित करेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह भी आवश्यक है कि हम विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग, समन्वय और समझौते के साथ आगे बढ़ें।

निशंक ने कहा कि एनईपी-2020 के तहत भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए शीर्ष 100 विश्व रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों के प्रवेश करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को संस्थागत रूप से सहयोग और छात्र और संकाय की गतिशीलता दोनों के माध्यम से सुगम बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमारी नई शिक्षा नीति ‘कैरेक्टर बिल्डिंग’ से लेकर ‘नेशन बिल्डिंग’ तक भारतीय मूल्यों पर आधारित है, जिसमें इंडियन, इंटरनेशनल, इंपैक्टफुल, इंटरएक्टिव और इन्क्लूसिविटी जैसे तत्वों शामिल हैं। इस नीति में हर भारतीय की आकांक्षाएं, स्वप्न और एक दूरगामी सोच है जो भारत को विश्व पटल पर ‘ज्ञान की महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे,  नई शिक्षा नीति के प्रमुख वास्तुकार डॉ. के कस्तूरीरंगन, आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शुभाशीष चौधुरी, प्रो. मिलिंद अत्रे, विभिन्न संकायों के सदस्य एवं छात्र भी जुड़े थे।

निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति में ‘जय अनुसंधान’ की सोच के साथ ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए दृढ़ संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। यह संस्थान भी इसी सोच के साथ रिसर्च तथा इनोवेशन के क्षेत्र में पूरे समर्पण के साथ कार्यरत है। इसी का उदाहरण है कि आज यहां उत्कृष्ट अनुसंधानकर्ताओं को रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड भी प्रदान किया जा रहा है।

निशंक ने रिसर्च पब्लिकेशन अवार्ड, रिसर्च डिसेमिनेशन अवार्ड, अर्ली रिसर्च अचीवर अवार्ड तथा सृजनात्मक अनुसंधान के लिए प्रो. कृति रमामृथम अवार्ड से सम्मानित सभी लोगों को बधाई दी और आईआईटी बॉम्बे सहित सभी संस्थानों से आहवाहन किया कि वे नई शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए अपने नेशनल तथा इंटरनेशनल ब्रांड एलुमनाई का एक नेटवर्क तथा टास्क फोर्स बनाएं और अपने अनुभव, अपने एक्सपर्टीज, अपने ज्ञान, अपनी विद्या के दान द्वारा इसके कार्यान्वयन को सफल बनाएं।