Education News 27 August 2017 CBSE की 10वीं और 12वीं के जल्द भराए जा सकते हैं परीक्षा फॉर्म

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CBSE की 10वीं और 12वीं के जल्द भराए जा सकते हैं परीक्षा फॉर्म

जयपुर/अजमेर। CBSE द्वारा वर्ष 2018 की मुख्य परीक्षा के लिए इस बार गत वर्ष की तुलना में जल्द परीक्षा फार्म भराए जा सकते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण इस बार परीक्षा मार्च के बजाए फरवरी में कराया जाना प्रस्तावित है बताया जा रहा है।

सीबीएसई आमतौर पर मुख्य परीक्षाओं के लिए आवेदन आमतौर पर अक्टूबर के प्रारंभ में भरवाता है। वर्ष 2017 की मुख्य परीक्षाओं के लिए सीबीएसई ने 1 से 15 अक्टूबर तक ऑन लाइन आवेदन भराए थे। लेकिन इस बार इस तिथि को नीचे खिसकाया जा सकता है। इसका कारण यह माना जा रहा है कि बोर्ड इस बार मुख्य परीक्षाएं मार्च की बजाए फरवरी में ही कराने की तैयारी कर रहा है। हालांकि सीबीएसई ने अब तक विधिवत रूप से कोई परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं किया है। लेकिन सीबीएसई चैयरमेन आर के चतुर्वेदी ने जून में संकेत दिए थे कि परीक्षाएं फरवरी में कराई जा सकती हैं। जब परीक्षाएं एक महीने पूर्व खिसक रही हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि परीक्षा आवेदन पत्र भी सीबीएसई एक माह पूर्व भरा सकता है। संभव है इस बार परीक्षा आवेदन पत्र सितंबर महीने के मध्य या अंत में भराए जा सकें।

2018 में होगी सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा की वापसी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की संचालन समिति ने साल 2018 से 10वीं कक्षा में बोर्ड परीक्षाओं को अनिवार्य कर दिया है। 10वीं के छात्र-छात्राओं को अब बोर्ड की परीक्षा देनी होगी। शैक्षणिक सत्र 2017-18 से सभी छात्र-छात्राओं के लिए बोर्ड परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है।

पहले सीबीएसई ने बनाया था वैकल्पिक

गौरतलब है कि छह साल पहले सीबीएसई ने दसवीं में बोर्ड की परीक्षा देने को वैकल्पिक कर दिया था। इसके चलते गत सत्र तक सीबीएसई की 10वीं के विद्यार्थी स्कूल बेस्ड और बोर्ड बेस्ड दिया करते थे। अब केवल बोर्ड बेस्ड ही परीक्षा होगी।


अस्थाई और स्थाई मान्यता के लिए एक मुश्त 30000 रुपए शुल्क

जयपुर/अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने संबद्धता चाहने वाले विद्यालयों के लिए संबद्धता नियमों में सरलीकरण किया है। अब विद्यालयों को अस्थाई और स्थाई संबद्धता के स्थान पर एक संबद्धता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।

 नवक्रमोन्नत विद्यालय जो राजस्थान बोर्ड की संबद्धता हेतु आवेदन करेंगे उनसे स्थाई और अस्थाई प्रमाण पत्र का अलग-अलग शुल्क नहीं लिया जाएगा। एक मुश्त राशि 30,000 रुपये संबद्धता शुल्क के आधार पर संबद्धता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष प्रो. बी.एल. चौधरी ने बताया कि बोर्ड की मान्यता समिति ने निर्णय लिया है कि जिन क्रमोन्नत विद्यालयों ने पूर्व में ऑनलाइन आवेदन किया है तथा शुल्क प्राप्त होने पर उन्हें अस्थाई संबद्धता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है तो वे विद्यालय शेष शुल्क 15,000 रुपये जमा कराकर संबद्धता प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।

बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि जिन विद्यालयों ने पूर्व में बोर्ड से अस्थाई संबद्धता प्राप्त कर रखी है और उनके संबद्धता संबंधी दस्तावेजों में किसी प्रकार की न्यूनता है अथवा शुल्क बकाया है वे ऑनलाइन उक्त दस्तावेजों को बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर तथा आवश्यक शुल्क जमा करा सकेंगे। इस हेतु बोर्ड की वेबसाइट पर 1 सितम्बर से पोर्टल उपलब्ध करवा दिया जाएगा, जिस पर विद्यालयों को 31 अक्टूबर तक आवश्यक रूप से आवेदन करना होगा। प्रोफाइल नहीं भरने वाले विद्यालयों के विरुद्ध बोर्ड कार्यवाही करेगा। भवन, नाम परिवर्तन अथवा माध्यम परिवर्तन के आदेश जो शिक्षा विभाग द्वारा जारी किये जाते है उन्हें निर्धारित अवधि में बोर्ड कार्यालय में भी आवेदन करना होगा अन्यथा एक हजार रुपये प्रतिमाह शासकीय शुल्क भी चुकाना होगा।

बोर्ड के निर्धारित अकादमिक मापदंडों का बोर्ड से सम्बद्ध विद्यालयों को पालन करना आवश्यक होगा। इसका उल्लंघन करने वाले के विरुद्ध बोर्ड संबद्धता निरस्त करने अथवा निलम्बित करने की कार्यवाही कर सकेगा। बैठक में संबद्धता समिति की बैठक में संबद्धता संबंधी नियमों के सरलीकरण के लिए बोर्ड प्रबंध मण्डल के सदस्य दीपक जौहरी की संयोजकत्व में पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है।


छात्रवृत्ति के लिए अधूरे आवेदन भरने वाले 15 तक दोबारा करें आवेदन

उदयपुर। राज्यसरकार ने छात्रवृत्ति के लिए आधे-अधूरे आवेदन पत्र भरने वाले राजकीय और निजी मान्यता प्राप्त शिक्षक संस्थाओं को दोबारा आवेदन के लिए 15 सितम्बर तक का मौका दिया है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की उत्तरमैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत विभाग ने राज्य के बाहर की राष्ट्रीय स्तर की राजकीय शिक्षा संस्थानों को भी इसमें शामिल किया है। 15 सितंबर तक विद्यार्थी संबंधित शिक्षण संस्थाओं शिक्षण संस्थाओं के जरिए प्रपोजल लॉक करेंगे। इसके बाद आक्षेपित आवेदन पत्र स्वीकृतकर्ता अधिकारी को ऑनलाइन नहीं किया गया। निर्धारित तिथि के बाद आवेदन पत्रों को स्थायी रूप से निरस्त कर पोर्टल का लिंक निष्क्रिय कर दिया जाएगा।


7000 स्कूली बच्चों ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की ली शपथ

झुंझुनूं में शनिवार को करीब सात हजार बच्चों ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का बड़ा संदेश दिया. बच्चों ने अपनी भावनाओं को कागज पर उकेरा. वहीं बेटी बचाने बेटी पढ़ाने व साफ सफाई की शपथ भी ली। चित्रकला प्रतियोगिता को लेकर बच्चों में काफी उत्साह नजर आया। यह शपथ जिला कलेक्टर व शहर के लोगों की मौजूदगी जिला परिषद की एसीईओ प्रतिष्ठ पिलानियां ने दिलवाई। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, नगर परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक निदेशक बताया कि प्रतियोगिता में सात हजार 28 बच्चों ने हिस्सा लिया है. प्रतियोगिता दो वर्गों में हुई। दोनों वर्गों के सौ-सौ बच्चों को बेस्ट अवॉर्ड दिए जाएंगे. भाग लेने वाले सभी बच्चों को प्रशासन की ओर से प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। झुंझुनूं जिला बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में एक नम्बर पर रहा है. यह मुहिम एक नम्बर पर रहने के लिए चलाई जा रही है. ताकि बच्चों और अभिवकों में जागरुकता आए।


डेढ़ माह से पोषाहार खत्म

बाड़मेर। सरकारीविद्यालयों में सामग्री के अभाव में कई दिनों से पोषाहार नहीं बन रहा है। ऐसे में बच्चों को पोषाहार से वंचित रहना पड़ रहा है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जीनगरों का बास में एक माह से पोषाहार खत्म है। उच्चाधिकारियों को अवगत करवाने के बावजूद खाद्य सामग्री नहीं पहुंचाई जा रही है। ऐसे हालात अन्य स्कूलों में भी है।

सामग्री के अभाव में जुलाई से पोषाहार मैन्यू के अनुसार नहीं बन रहा था। वहीं 19 जुलाई से पोषाहार बिल्कुल खत्म हो चुका है। इसके बाद स्कूल में खाद्यान्न की सप्लाई ही नहीं हुई। विद्यालय के पोषाहार प्रभारी ने नोडल प्रभारी द्वारकादास को जानकारी दी तो उन्होंने एक कट्टा चावल की व्यवस्था करवाई, लेकिन इसके बाद भी सप्लाई नहीं होने से 1 अगस्त से पोषाहार बनना बंद हो गया है।

पोषाहार नहीं बनने के बावजूद भी रजिस्टर में दर्ज नहीं एंट्री

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जीनगरों का बास में पोषाहार 19 जुलाई को ही खत्म हो गया था। इसके बाद वहां के शिक्षक ने पास के स्कूल से उधार एक कट्टा चावल मंगाकर बच्चों को पाेषाहार वितरित कराया। इस बीच शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पोषाहार खत्म होने की सूचना देते रहे, लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। अगस्त से पोषाहार खत्म हो गया था, लेकिन इसकी जानकारी रजिस्टर में दर्शाने की बजाय खाली छोड़ दिया। इससे जाहिर होता है कि अधिकारी विद्यालय का जायजा नहीं लेते हैं, इससे बच्चों के सामने पोषाहार नहीं मिलने की परेशानी बनी हुई है। समय पर निरीक्षण सूचना नहीं मिलने पर सामग्री नहीं मिल रही है, इसका खामियाजा छात्रों को भुगतान पड़ रहा है।

पोषाहार की व्यवस्था नहीं होने से कई स्कूलों के संस्था प्रधान को इधर-उधर हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। राउप्रावि जीनगरों का बास में सामग्री उपलब्ध करवाने को लेकर विभागीय अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया, लेकिन सुध नहीं ली गई। समय पर पोषाहार उपलब्ध नहीं होने से पच्चीस दिन तक पोषाहार बगैर रहना पड़ा। ऐसे में संस्था प्रधान को अन्य स्कूल से एक चावल का कट्टा उधार मांगकर लाना पड़ा। फिर भी पोषाहार नहीं पहुंचा।

“बीते माह ही पोषाहार खत्म हो गया था। राउप्रावि सोलंकियों की वास से चावल का एक कट्टा उधार लेकर काम चलाया, लेकिन 1 अगस्त तक ही पोषाहार खत्म हो गया। इसके बाद सामग्री की सप्लाई नहीं होने से पोषाहार नहीं बन रहा है। सप्लायर को जानकारी दे दी है।”

शैतानसिंह, पोषाहार प्रभारी, राउप्रावि जीनगरों का बास

“इस संबंध में मुझे किसी ने सूचना नहीं दी है। संस्था प्रधान या किसी और को सूचना दी है तो मेरी जानकारी में नहीं है। कल स्कूल खुलते ही पोषाहार उपलब्ध करा दिया जाएगा।”

हनुमानाराम चौधरी, बीईईओ सिवाना


सौर ऊर्जा से रोशन होंगे बाड़मेर के 100 विद्यालय

बाड़मेर। बाड़मेर जिले में विद्युत कनेक्शन से वंचित 100 विद्यालय जल्दी सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। इसके लिए केयर्न आयल एंड गैस ने 1.32 करोड़ की लागत से सौर ऊर्जा आधारित परियोजना पर कार्य शुरू किया है। बाड़मेर जिले के 100 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 2 किलोवाट क्षमता सोलर पैनल लगाया जा रहा है। इसके तहत सोलर पैनल, इनवेटर एवं बैटरी स्थापित होंगे।


स्कूली खेलकूद कंपीटिशन में क्लास की बाध्यता समाप्त

बीकानेर। माध्यमिक सेटअप की स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में विभिन्न आयुवर्गों में कक्षा की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला खिलाड़ी 17 वर्षीय आयुवर्ग की जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरीय के कंपीटिशन में शामिल हो सकेगा।

इसके लिए उसको 10वीं कक्षा की अंकतालिका और बोर्ड प्रमाण-पत्र की प्रति लगानी होगी। इसके साथ ही कोई भी स्टूडेंट्स जो 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुका है वह किसी भी आयुवर्ग की प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो सकेगा। 17 19 वर्ष की आयुवर्ग में छठी कक्षा से नीचे की कक्षा का स्टूडेंट्स शामिल नहीं हो सकेगा। माध्यमिक शिक्षा के खेलकूद उपनिदेशक जीवन शंकर शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी कि है। पूर्व में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला खिलाड़ी केवल 19 वर्षीय कंपीटिशन में शामिल हो सकता था। इसके अलावा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी छात्र दोबारा 12वीं कक्षा का फार्म भरकर स्कूली कंपीटिशन में शामिल हो जाते थे। इन आदेशों से अब ऐसा नहीं होगा। गौरतलब है कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने विभिन्न आयुवर्ग में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता के अंतर्गत शिक्षा सत्र 2017-18 से ऊपरी कक्षा बंधन को समाप्त कर दिया है। कक्षा का बंधन नहीं होने से अब आयुवर्ग के अनुसार ही खिलाड़ी संबद्ध खेल की राष्ट्रीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में शामिल हो सकेगा। इसी तर्ज पर माध्यमिक सेटअप में यह आदेश जारी हुए है। जबकि प्रारंभिक सेटअप के आदेश होने अभी शेष है।


डाइट गढ़ी की बैठक में प्रशिक्षण और लैब स्कूल निरीक्षण की रिपोर्ट दी

परतापुर। वित्त नियत्रंक रामगोपाल पारीख, सहायक निदेशक नादान सिंह गुर्जर ने गढ़ी डाइट भवन में बैठक लेकर लैब स्कूल निरीक्षण, एसआईक्यू प्रशिक्षण, डीडीएमसी के रजिस्ट्रेशन के संबंध में निर्देश दिए। विभाग के प्रभावी क्रियान्वन को लेकर भी निर्देश दिए गए। संस्था के व्याख्याता चेतन उपाध्याय, पवन शाह, नंदकिशोर भट्ट द्धारा प्रशिक्षणों एवं लैब स्कूल निरीक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। डाइट प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष के छात्राध्यापकों की सैंद्धांतिक कक्षाओं का संचालन एवं इंटनर्शिप का ऑनलाइन फीडिंग के कार्य का निरीक्षण भी किया गया।


निजी स्कूलों की कामकाजी व्यवस्था के लिए समय सारिणी तय की

डूंगरपुर। डीईओप्रारंभिक मणिलाल छगण ने निजी स्कूलों के लिए टाइम फ्रेम की घोषणा की है। डीईओ ने बताया कि पत्रावलियों के ऑनलाइन जांच एवं सत्यापन दलों का गठन 28 अगस्त तक होगा। स्कूलों में भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 5 सितंबर रहेगी। इसके बाद मान्यता के लिए अनुमोदन की प्रक्रिया 11 सितंबर तक रहेगी।

संस्थान के मान्यता के योग्य पाए जाने की स्थिति से आरक्षित कोष की राशि के डीडी फिक्स डिपोजिट का विवरण दस्तावेज प्राप्त करने की तारीख 15 सितंबर रखी हैं। मान्यता जारी कर स्कूलों का आदेश 20 सितंबर तक होगा।


स्कूल में पहुंचे विधायक, बच्चे बोले साहब लैब के लिए कमरे बनवा दो

डूंगरपुर। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खेड़ा कच्छवासा में विधायक देवेंद्र कटारा अचानक ही निरीक्षण के लिए पहुंच गए। स्कूल में पहुंचने के बाद विधायक ने सभी शिक्षकों से बच्चों की शैक्षिक प्रोग्रेस के बारे में जानकारी ली।

इस दौरान बच्चों से भी बातचीत की। जैसे ही विधायक बच्चों के पास पहुंचे तो बच्चों ने एक स्वर में विधायक के सामने अपनी समस्याएं रख दी। बच्चों ने कहा कि साहब, हमारे स्कूल में विज्ञान संकाय स्वीकृत हुई है, लेकिन लैब के लिए कमरे नहीं हंै। लैब बन जाती है तो हमारी पढ़ाई भी व्यवस्थित हो जाएगी। इस पर विधायक कटारा ने बच्चों को आश्वासन दिया। हालांकि यह अलग बात है कि विधायक के आश्वासन के बाद आगे की कार्रवाई कब तक होती है।

स्कूल के प्रथम सहायक दिनेशचंद्र चौबीसा ने बताया कि विधायक ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। इस मौके पर रमेशचंद्र जैन और शंकरलाल आदि मौजूद थे।


अल्पसंख्यक छात्रावास में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित

राजसमंद। अल्पसंख्यक छात्रावासमें प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी लियाकत अली शोरगर ने बताया कि अध्यययनरत अल्पसंख्यक विद्यार्थी सत्र 2017-18 की अवधि में छात्रावास में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिला मुख्यलाय पर 50 सीटें हंै। छात्रावास में प्रवेश के लिए 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। आवेदन कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।


प्रधानमंत्री के दौरे से पहले स्कूलों में व्यवस्था ठीक करने के दिए निर्देश

डूंगरपुर। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद जयपुर के वित्त नियंत्रक रामगोपाल पारीक ने जिले के सभी शिक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक ली। रामसा एडीपीसी हेमंत पंडया ने बताया कि प्रधानमंत्री के 29 अगस्त के दौरे से पूर्व जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति को जांचने और बकाया कार्य को शीघ्र पूरा करने के लिए डाइट डूंगरपुर में बैठक हुई। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक अनोपसिंह सिसोदिया, प्रारंभिक मणिलाल छगण, डाइट प्रधानाचार्य ललित कमाल, एडीपीसी रामसा हेमंत पंडया, एडीपीसी एसएसए गोवर्धनलाल यादव, 10 ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, 10 नोडल केंद्र प्रभारी, एडीईओ, शैक्षणिक प्रकोष्ठ एडीईओ और एबीईईओ के साथ ब्लॉकवार समीक्षा बैठक ली।

सभी स्कूलों में स्वच्छता पर विशेष फोकस करने के लिए कहा गया है। स्कूल का समय पर संचालन और शिड्यूल के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए। स्कूल में चल रहे एसआईक्यूई, सीसीई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के बकाया कार्य पूर्ण हो। मिड-डे-मील संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। शाला दर्शन और शाला दर्पण पोर्टल पर सभी अपडेट पूर्ण करने प्रतिदिन चेक करना हैं। स्कूल से लेकर शिक्षा विभाग के सभी ऑफिस में रिकॉर्ड अपडेट और हिसाब संपूर्ण हो।

डीईओ और बीईईओ को विशेष फॉरमेट में स्कूल जांचने के निर्देश

दोनों जिला शिक्षा अधिकारी और 10 ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को दो प्रकार के फॉर्मेट दिए गए हैं। इसमें स्व मूल्यांकन और मूल्यांकन प्रपत्र दिए हैं। इसमें शिक्षा अधिकारी को स्वयं स्कूल पहुंचकर फॉर्मेट के अनुसार जांच करनी है। इसके बाद उसी फॉर्मेट को पुन: निरीक्षण जिला शिक्षा अधिकारी करेंगे। इसकी रिपोर्ट सीधी ऑनलाइन बीकानेर और जयपुर भेजी जाएगी।


प्राइवेट स्कूल आरटीई वेब पोर्टल पर 10 दिन में करें अपडेशन

राजसमंद। निदेशालय से प्राप्त निर्देशानुसार सभी प्राइवेट विद्यालयों के संस्था प्रधानों को निर्देशित किया गया है कि वह अपने विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों का डाटाबेस आरटीई वेब पोर्टल पर 10 दिन के अंदर एफ 1 एफ 3 की सूचना पोर्टल पर दर्ज कराएं।


भीलमगरा विद्यालय में 200 बच्चों पर 4 शिक्षक

आमेट। भीलमगराके ग्रामीणों ने शुक्रवार को बीईईओ नरेंद्रसिंह को ज्ञापन सौंप राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी पूरी करने की मांग की। ज्ञापन में बताया कि विद्यालय कक्षा 8 तक है, इसमें 200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इतनी संख्या में 4 शिक्षक ही होने से बालकों की पढ़ाई चौपट हो रही है। इससे विद्यार्थी विद्यालय छोड़ने पर मजबूर है। छात्र तो दूर गांव जाकर भी अध्ययन कर लेते है लेकिन छात्राओं को दूर विद्यालय जाकर आगे अध्ययन नहीं कर सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है। समय पर रिक्त पदों की नियुक्ति नहीं करने पर स्कूल पर तालाबंदी करने की चेतावनी दी। इस दौरान रामचंद्र, पन्नालाल, कैलाश, गोपीलाल, किशनलाल, बंशीलाल, कालूराम, राधेश्याम, भगालाल सहित ग्रामीण थे।


संस्था प्रधान वाकपीठ संगोष्ठी में शिक्षा में नवाचार पर हुई चर्चा

राजसमंद। सांगठकलापंचायत के वंशावलियों का गुड़ा राउप्रावि में सत्रारंभ संस्था प्रधान वाकपीठ संगोष्ठी की शुरुआत शुक्रवार को हुई। समारोह की अध्यक्षता राजसमंद जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक युगल बिहारी दाधीच थे। मुख्य अतिथि सांसद हरिओम सिंह राठौड़, विशिष्ट अतिथि उप जिला प्रमुख सफलता गुर्जर, प्रधान रीना कुमावत, बीईईओ सत्यदेव शर्मा, अतिरिक्त बीईईओ लालूलाल आचार्य, वाकपीठ अध्यक्ष रमनलाल आमेटा थे। समारोह में मुख्य अतिथि सांसद ने कहा कि शिक्षक देश को दिशा देने वाली पीढ़ी तैयार करें। शिक्षक वह गुरू होता है जो अंधकार को दूर कर प्रकाश की ओर ले जाता है। आज के परिवेश में शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझ कर बालक का बेहतर निर्माण करें। कार्यक्रम में एडीपीसी रिजवान फारूक, पीईईओ सोमपाल सिंह राणा, केशव सांचिहर ने शिक्षा में नवाचार स्वच्छ भारत मिशन पर वार्ताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन भगवतीलाल पालीवाल ने किया। इस दौरान सचिव किशन खत्री, दिनेश श्रीमाली, भगवतीलाल, नितिन पालीवाल, पूर्व वाकपीठ अध्यक्ष गिरीश आचार्य, भगवतीलाल जोशी मौजूद थे।


निशुल्क पाठ्य-पुस्तकों की सप्लाई जारी

उदयपुर। राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल जयपुर ने जिले में संचालित करीब 132 मां-बाडी केन्द्रों के कक्षा 1 से 4 तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों को सप्लाई जारी कर दी है। जिले में मांग के अनुसार 30,170 पुस्तकें भेजी गई है, जिन्हें मा-बाडी केन्द्रों में सप्लाई किया जा रहा है। शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी (प्रारंभिक) महिपाल सिंह ने बताया कि पुस्तकों को मा-बाडी केन्द्रों में जिला डिपो के माध्यम से भिजवाया जा रहा है। कक्षा एक में 4200, कक्षा दो में 10,050, कक्षा तीन में 9040 और कक्षा चार में 6880 पुस्तकें मांग के अनुसार सप्लाई हुई है। मा-बाडी केन्द्रों पर 6 से 12 साल के ऐसे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जाती है जो नियमित स्कूल नहीं जा पाते या फिर ड्रॉप आउट होते हैं। ज्यादातर केन्द्र आदिवासी दूर-दराज क्षेत्रों में संचालित हैं। गौरतलब है कि इन केन्द्रों पर भी पुस्तकें नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।

600 सरकारी स्कूलों के वंचित छात्रों को अभी भी पुस्तकों को इंतजार

जिले के करीब 600 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनमें मांग के अनुसार पुस्तकें नहीं पहुंची है। इन स्कूलों की कक्षा में फिलहाल स्थिति ये है कि आधे बच्चों के हाथ में पुस्तकें हैं तो बाकी बच्चे बिना पुस्तकों के पढ़ने को मजबूर हैं।


बेटियों को नहीं जोड़ पाए उच्च शिक्षा से

चित्तौड़गढ़। बेटियों को उच्च शिक्षा से जोड़े रखने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग एवं सरकार विविध योजनाओं पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। इसके बावजूद जिले के सरकारी स्कूलों में छात्र छात्राओं के नामांकन में चार हजार से अधिक का अंतर है। यानी इतनी बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले कम है। जबकि प्रारंभिक शिक्षा विभाग में स्थिति विपरीत है। इसमें छात्रों के मुकाबले छात्राओं की संख्या साढे़ चार हजार अधिक है।

सरकार शिक्षा विभाग छात्राओं का नामांकन बढ़ाने के जतन कर रहे हैं, लेकिन उच्च शिक्षा में इन प्रयासों का परिणाम नजर नहीं रहा। जबकि प्रारंभिक शिक्षा विभाग के प्रयास रंग लाए और छात्रों के मुकाबले इस बार साढे़ चार हजार छात्राएं अधिक नामांकित हैं। कक्षा एक से आठवीं तक 47483 बालिकाएं 42749 बालक नामांकित हैं, यानी करीब साढ़े चार हजार छात्राएं अधिक हैं छात्रों के मुकाबले। लेकिन माध्यमिक शिक्षा के 377 स्कूलों में इस और कोई खास काम नहीं हुआ। माध्यमिक शिक्षा विभाग में वर्तमान में एक लाख 6210 का नामांकित है। इसमें 55154 बालक एवं 51047 बालिकाएं नामांकित है यानी चार हजार बालिकाएं कम है।

  • साइकिल योजना प्रति छात्रा को ढाई हजार रुपए की साइकिल
  • ट्रांसफर वाउचर योजना प्रति छात्रा को 25 रुपए प्रतिदिन
  • इंदिरा प्रियदर्शनी अवार्ड प्रति पात्र छात्रा 75 हजार एवं एक लाख
  • जिले में नौ शारदों छात्रावासों के निर्माण पर दो करोड़ 70 लाख

खर्च

  • शारदें छात्रावासों की 720 बालिकाओं पर प्रति महीने 10 लाख 80 हजार रुपए
  • आपकी बेटिया, गार्गी पुरस्कार सहित योजना छात्रवृति योजनाएं चल रही है, जिन पर प्रदेश में करोड़ों रुपए हजर साल खर्च हो रहे हैं

“यह बात सही है कि छात्रों के मुकाबले में चार हजार बेटियों का नामांकन कम है। इस गेप का प्रमुख कारण सामाजिक है। कुछ जातियों में अभी भी बेटियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने की आवश्यकता है। इसके लिए आगामी दिनों शिक्षा चौपालों के माध्यम से शिक्षा से वंचित बेटियों को स्कूलों से जोड़ने के लिए अभिभावकों से संपर्क किया जाएगा। इसके अलावा सभी संस्था प्रधानों को भी इसके लिए विशेष प्रयास करने के लिए निर्देश देंगे।”

हेमंतकुमार द्विवेदी, डीईओ माध्यमिक, चित्तौड़गढ़