केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 39वीं बैठक

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केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 39वीं बैठक आज राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नई दिल्ली में आयोजित की गयी।
बैठक में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सचिव सुश्री लीना नंदन; श्री चंद्र प्रकाश गोयल, महानिदेशक वन एवं विशेष सचिव; डॉ. एस.पी. यादव, निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान; श्री बिभाष रंजन, अपर महानिदेशक (वन्यजीव); श्री प्रवीर पांडे, अपर सचिव और वित्तीय सलाहकार तथा अन्य अधिकारी; भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के प्रतिनिधि एवं अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक की मुख्य विशेषताओं में दो प्रकाशनों का विमोचन शामिल था – स्नो लेपर्ड के लिए राष्ट्रीय वंशावली पुस्तक (स्टडबुक) और सीजेडए का त्रैमासिक न्यूजलेटर, एक्स-सीटू अपडेट।

वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान सीजेडए की निम्नलिखित गतिविधियों से सदस्यों को अवगत कराया गया:

क ) 18 चिड़ियाघरों का मूल्यांकन किया गया, चिड़ियाघरों के लिए 10 मास्टरप्लान को मंजूरी दी गई।

ख ) भारतीय चिड़ियाघरों में संरक्षण प्रजनन और संरक्षण शिक्षा के प्रयोजनों के लिए 69 राष्ट्रीय और 10 अंतर्राष्ट्रीय जानवरों का अधिग्रहण/स्थानांतरण किया गया।

ग ) चिड़ियाघरों (दुनिया में पहली बार) का प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन (एमईई-चिड़ियाघर) 39 मान्यता प्राप्त चिड़ियाघरों (बड़े और मध्यम चिड़ियाघर) में किया गया है।

घ ) 12 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए आज़ादी का अमृत महोत्सव के उत्सव में देश भर के चिड़ियाघर सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम में अब तक 72 चिड़ियाघरों को कवर किया गया है, जिसमें 72 सप्ताह में 72 प्रजातियों को प्रमुखता दी गयी है। इस प्रकार ‘संरक्षण से सह-अस्तित्व: लोगों से जुड़ाव’ की अवधारणा के माध्यम से हमारे देश की समृद्ध जैव विविधता को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियाँ, दैनिक आधार पर आयोजित की जा रहीं हैं।

च ) लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय रेफरल केंद्र-वन्यजीव जैव-बैंकिंग’ पहल सहित सीजेडए और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग, प्रस्तावित गतिविधियों में से एक है।

छ ) चिड़ियाघर प्रबंधन सूचना प्रणाली (चिड़ियाघर-एमआईएस), सांविधिक रिपोर्टिंग को सरल बनाने और सीजेडए को प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए विकसित एक वेब एप्लिकेशन है।

ज ) चिड़ियाघरों द्वारा शुरू की गई गतिविधियों को विज़न प्लान 2021-31 के साथ तालमेल बिठाने के लिए कई पहलों की शुरुआत की गयी है, ताकि अत्याधुनिक अनुसंधान के साथ संरक्षण के लिए भारतीय चिड़ियाघरों एक बड़ी ताकत बनाया जा सके, बदलाव सुनिश्चित किये जा सकें, आगंतुकों का अनुभव तल्लीन करने वाला हो तथा सभी उम्र लोगों के साथ सार्थक तालमेल बिठा सके।

झ ) जारी संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में लाल पांडा, गौर, हिम तेंदुआ जैसी प्रजातियों का सफल प्रजनन एवं बंदी वन्य जीवों जैसे इंडियन शेवरोटेन, रेड पांडा, वेस्टर्न ट्रैगोपन को जंगल में छोड़ने के प्रयास शामिल हैं।

बैठक के दौरान तकनीकी समिति और प्रशासनिक समिति की सिफारिशों की समीक्षा की गई और उन्हें मंजूरी दी गई। अन्य विचार-विमर्श में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट (2021-22) और भारतीय चिड़ियाघर के बीच जानवरों के अधिग्रहण/स्थानांतरण के प्रस्ताव शामिल थे।

प्रख्यात हस्तियों को भारतीय चिड़ियाघरों के लिए राजदूतों की पहचान करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। इसे, चिड़ियाघरों द्वारा शुरू की गई संरक्षण पहलों के लिए समर्थन जुटाने और इस क्षेत्र में बहु-क्षेत्रीय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

डॉ. संजय कुमार शुक्ला, सदस्य सचिव, सीजेडए ने अध्यक्ष सीजेडए को सीजेडए द्वारा नियोजित गतिविधियों से अवगत कराया।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक वैधानिक निकाय है http://cza.nic.in/। इसकी स्थापना 1992 में भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में एक संशोधन के माध्यम से की गयी थी, जिसका उद्देश्य भारतीय चिड़ियाघरों के कामकाज की निगरानी करना और पृथक उपायों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण रणनीतियों को सहायता प्रदान करना है। सीजेडए का मार्गदर्शक उद्देश्य भारतीय चिड़ियाघरों में बंदी जानवरों के आवास, रखरखाव और स्वास्थ्य देखभाल के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को सुनिश्चित करना है। वर्त्तमान में, सीजेडए 147 चिड़ियाघरों को मान्यता देता है। चिड़ियाघर; संरक्षण जागरूकता, दुर्लभ जीवों का प्रदर्शन, बचाव और पुनर्वास तथा संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों से लेकर कई अन्य कार्य पूरे करते हैं।करीब 80 मिलियन वार्षिक आगंतुकों के साथ, चिड़ियाघर; वन्यजीव संरक्षण और जागरूकता के लिए शिक्षण केंद्र के रूप में भी कार्य करते हैं।