पात्र विद्यार्थियों के ‘हक’ पर निजी स्कूलों का ‘डाका’

right to education
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जिम्मेदारों की अनदेखी का दोहरा लाभ

आरटीई के तहत पढऩे वाले विद्यार्थियों को देनी होती हैं निशुल्क किताबें

राजसमंद। निजी स्कूल जिम्मेदारों की अनदेखी का दोहरा लाभ उठाते हुए पात्र बच्चों का हक भी मार रहे हैं। आरटीई के नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए वह नामांकित विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें नहीं दे रहे। इधर बच्चे के भविष्य को संवारने में लगे अभिभावक कर्ज तक लेकर बच्चों की महंगी किताबों का इंतजाम करते हैं। अभिभावकों द्वारा किताबें देने का दबाव बनाने पर वह बच्चे को स्कूल से निकाल देने तक की धमकी देते हैं।

दोहरी कमाई के लिए दबाया आदेश

निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत बने इस आदेश को दोहरी कमाई के चलते दबा रखा है। वह सरकार से किताबों की राशि उठाकर अभिभावकों से महंगी किताबें मंगवाते हैं। जिससे उन्हें निजी प्रकाशकों द्वारा दिए जाने वाला कमीशन भी मिलता है।

यह हैं आदेश

आरटीई के नियमों के लिए बने पोर्टल पर दिए नियमों में स्पष्ट लिखा है कि ‘राज्य सरकार द्वारा प्रति बालक निर्धारित व्यय (यूनिट कॉस्ट) में पाठ्यपुस्कों की कीमत सम्मिलित की गई है। अत: संबंधित पक्षों को निर्देशित किया जाता है कि निजी विद्यालयों में निशुल्क सीट्स पर प्रवेश लेने वाले बालकों को पाठ्यपुस्तकें विद्यालय द्वारा निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी।’

जिला स्तरीय कमेटी का गठन होना चाहिए…

जिले में संचालित ५ फीसदी निजी शिक्षण संस्थान ही ऐसे हैं जिन्होंने शिक्षा को बाजार बना रखा है, ऐसे स्कूलों को फीस एक्ट के दायरे में लाना चाहिए। ५ फीसदी की वजह से ९५वे फीसदी स्कूलों को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। तीन दशक में निजी शिक्षण संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ा है, जिस कारण शिक्षण संस्थाओं के सुचारू संचालन में बाधाएं आई हैं। महंगी होती शिक्षा का मूल कारण राजकीय हस्तक्षेप एवं नीतियां हैं। निजी शिक्षण संस्थाओं को कम्पनी की श्रेणी में लाकर उनपर सभी शुल्क, वेतन आयोग बाध्यता, भवन कर, ईएसआई, मान्यता फीस के लिए मियादी जमा राशि आदि नियम लागू कर दिए गए हैं, इससे सेवा भावना आहत हुई है और बाजार बाद ने प्रवेश किया है, इसी से प्रेरित होकर शिक्षा जगत में पूंजी का निवेश हुआ है, जिससे शिक्षा महंगी हुई है।

शिक्षा के विकास की दृष्टि से १५ सदस्यीय जिला स्तरीय शिक्षा समिति का गठन होना चाहिए। शिक्षा को महंगी होने से बचाने के लिए आवश्यक है कि राज्य सरकार निजी विद्यालयों को पर्याप्त अनुदान एवं सुविधाएं दे।

-डॉ. महेंद्र कर्णावट, मंत्री, गांधी सेवासदन, राजसमंद

निजी स्कूलों को निशुल्क प्रवेश वाले विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें देने का प्रावधान है। अगर कोई स्कूल नहीं दे रहा है तो पता करेंगे।

-छगनलाल पूर्बिया, समन्वयक, आरटीई, राजसमंद