दोबारा लाटरी निकालने में अफसरों की रुचि नहीं, भटक रहे अभिभावक:Right To Education Act

दोबारा लाटरी निकालने में अफसरों की रुचि नहीं, भटक रहे अभिभावक:Right To Education Act
दोबारा लाटरी निकालने में अफसरों की रुचि नहीं, भटक रहे अभिभावक:Right To Education Act

दोबारा लाटरी निकालने में अफसरों की रुचि नहीं, भटक रहे अभिभावक:Right To Education Act


शिक्षा के अधिकार अधिनियम यानी आरटीई के तहत प्रदेश के 3000 से अधिक अभिभावकों से आवेदन मंगाए गए पर अभी तक लॉटरी नहीं निकाली गई। के चलते अभिभावक मिटाने के लिए मजबूर हो गए हैं। वहीं मामले में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत स्कूलों में दाखिला के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के लिए सभी संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग और जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2020-21 से अंत्योदय कार्डधारक एवं सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना वर्ष 2011 की सूची में शामिल परिवारों के बच्चों को पात्रता की श्रेणी में रखा जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि आर.टी.आई. के तहत दाखिले की समीक्षा करते हुए कार्यवाही समयावधि में सुनिश्चित करें

शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आर.टी.ई.) पोर्टल के माध्यम से प्रवेश के संबंध में पूर्व वर्ष के अनुभव के आधार पर नवीन शिक्षा सत्र में प्रवेश के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। प्रथम चरण की लॉटरी की प्रक्रिया सम्पन्न हो चुकी है और शेष बेच सीटों के लिए द्वितीय चरण की लॉटरी की प्रक्रिया की जानी है।

जिला शिक्षा अधिकारियों को कहा गया है कि दूरी की वजह से विद्यार्थियों का नाम रिजेक्ट नहीं किया जाए। यदि किसी विद्यालय को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा हैबीटेशन मैप किया गया है तो संबंधित छात्र को उस स्कूल से रिजेक्ट नहीं किया जाए। जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं और स्कूल छोड़ चुके हैं उनके आवेदन को बदलने से पहले स्कूल को नोडल अधिकारी को अवगत कराना होगा। इसके साथ ही पालक एवं छात्रों से भी सम्पर्क स्थापित किया जाए। नोडल अधिकारी अपने स्तर पर दास्तावेजों की जांच करने के संबंध में अपात्रता संबंधी निर्णय लें।

वर्तमान सत्र में कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए ‘इज ऑफ डूईंग बिजनेस’ के तहत शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि दस्तावेजों की जांच विद्यालयों में ही की जाए। किसी छात्र के आवेदन में विवाद की स्थिति में ही नोडल अधिकारी जांच करें। इस संबंध में अपात्र किए गए आवेदनों की जांच नोडल अधिकारी स्वयं करें। ऐसे छात्र जिनके पालक विद्यालय नहीं पहुंच पाए उन प्रकरणों की समीक्षा भी नोडल अधिकारी द्वारा की जाए। इसके पश्चात पात्र पाए जाने पर दाखिले की कार्यवाही की जाए।

वर्ष 2020-21 से अंत्योदय कार्ड धारक एवं सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना वर्ष 2011 की सूची में नामों को पात्रता की श्रेणी में रखा जाए। पोर्टल में त्रुटि सुधार का विकल्प है, इसकी समीक्षा नोडल अधिकारी करें और पात्रता रखने वाले को दाखिला दिलाया जाए। आदेश में कहा गया है कि कुछ विद्यालय जो अब बंद हो चुके हैं, वहां भी सीटों का आवंटन किया गया था। ऐसी स्थिति में नोडल अधिकारी स्वयं उन पालकों से सम्पर्क स्थापित कर उनका आवेदन स्वीकार करते हुए उन्हें निकट के अन्य विद्यालय में दाखिला के लिए कार्यवाही करें।