उच्च शिक्षा विभाग का फैसला, द्वितीय व तृतीय वर्ष में प्रवेश के लिए छात्राओं को भी देना होगा पोर्टल शुल्क

उच्च शिक्षा विभाग का फैसला, द्वितीय व तृतीय वर्ष में प्रवेश के लिए छात्राओं को भी देना होगा पोर्टल शुल्क
उच्च शिक्षा विभाग का फैसला, द्वितीय व तृतीय वर्ष में प्रवेश के लिए छात्राओं को भी देना होगा पोर्टल शुल्क

 

उच्च शिक्षा विभाग का फैसला, द्वितीय व तृतीय वर्ष में प्रवेश के लिए छात्राओं को भी देना होगा पोर्टल शुल्क

उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों की यूजी कक्षाओं में द्वितीय और तृतीय वर्ष में प्रवेश के लिए छात्राओं को भी अब पोर्टल शुल्क के तौर पर पचास रुपये देने होंगे। प्रथम वर्ष में प्रवेश के दौरान छात्राओं को पोर्टल शुल्क देने से छूट दी गई है। इसके अलावा फीस सिर्फ अब ऑनलाइन माध्यम से ही जमा की जाएगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने कोविड-19 के नाम पर ऑफलाइन फीस जमा करने का विकल्प खत्म कर दिया है। इसके साथ ही पिछले साल तक ऑनलाइन फीस जमा करने के जितने भी विकल्प थे उन्हें बदल दिया है। विद्यार्थियों को एमपी ऑनलाइन के माध्यम से फीस जमा करनी होगी। विद्यार्थी कियोस्क के माध्यम से फीस जमा करें या फिर घर बैठे जमा करें, लेकिन माध्यम एमपी ऑनलाइन ही होगा।

पिछले सत्र तक विद्यार्थी कॉलेजों में सीधे फीस जमा करते थे। कॉलेजों में भी डिजिटल भुगतान की व्यवस्था के लिए उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर ही संबंधित बैंकों से स्वेप मशीन ली गईं। एटीएम कार्ड से भुगतान कर देते थे या बैंक जाकर फीस जमा कर देते थे। सरकारी कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस कोर्सेस को छोड़कर अन्य सामान्य कोर्स की फीस न्यूनतम होने के कारण अतिरिक्त चार्ज नहीं लगता था।

पोर्टल शुल्क को लेकर हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग की वीडियो कांफ्रेंसिंग में एक प्राचार्य ने छात्राओं को छूट देने का सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि प्रथम वर्ष में प्रवेश देते समय पोर्टल फीस शासन द्वारा माफ की जाती है। द्वितीय और तृतीय वर्ष में इसका लाभ मिलेगा या नहीं? इस पर विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रथम वर्ष के अलावा सभी कक्षाओं में प्रवेश के लिए फीस के साथ पोर्टल शुल्क अलग से देना होगा।