पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे शिक्षण संस्थान

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पृथ्वी दिवस पर विशेष: सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के विज्ञान महाविद्यालय में प्राणीशास्त्र विभाग ने दो हिस्सों में बंटा एक बगीचा विकसित किया है

उदयपुर। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के विज्ञान महाविद्यालय (Educational) में प्राणीशास्त्र विभाग ने दो हिस्सों में बंटा एक बगीचा विकसित किया है। हरियाली से आच्छादित इस बगीचे में एक हजार से ज्यादा पौधे लगे हुए हैं। इसके एक हिस्से में औषधीय तो दूसरे में सुंदर फूलों के पौधे शोभा बढ़ा रहे हैं। बगीचे को प्राणीशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. आरती प्रसाद ने निजी खर्च व विभाग के विद्यार्थियों की मदद से विकसित किया है। प्रो. आरती प्रसाद के अनुसार गार्डन की जगह पर पहले कचरा पड़ा रहता था जिसकी सफाई के बाद इसे एक बगीचे के रूप में तब्दील किया गया। हर महीने करीब दो हजार रुपए बगीचे पर खर्च किए जाते हैं।

विभाग में लगे हैं ढाई सौ से ज्यादा गमले

प्राणीशास्त्र विभाग ने करीब ढाई सौ से ज्यादा गमले लगवा रखे हैं। विभाग के विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति रुचि जगाने के लिए असाइनमेंट में एक पौधे को बड़ा करने का काम भी दिया जाता है। विद्यार्थी जब तक विभाग में रहता है, तब तक वह पौधे की देखभाल करता है। इसके आधार पर विद्यार्थियों को नम्बर दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि विवि में 10 हजार पौधे लगवाने के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा के संकल्प में योगदान के लिए जल्द ही और पौधे लगाए जाएंगे।

हर दो महीने में एक क्विंटल कम्पोस्ट

बगीचे में वर्मी कम्पोस्ट के दो प्लांट लगे हुए हैं, जहां पर उत्पादित होने वाले जैविक खाद को महाविद्यालय के विभिन्न विभागों में पौधरोपण के लिए दिया जाता है। यह कम्पोस्ट प्राणीशास्त्र विभाग बगीचे के कचरे से तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्राणीशास्त्र विभाग सुविवि का एकमात्र ऐसा विभाग है, जो अपने कचरे का निस्तारण कर खाद बनाता करता है। प्लांट से हर दो महीने में करीब एक क्विंटल खाद तैयार होता है। साथ ही विभाग की डॉ. प्रीति सिंह विद्यार्थियों को मशरूम की खेती भी सिखाती है।

एक पहल यह भी

प्राणी शास्त्र विभाग के अलावा सुविवि ने अपने कैम्पस में करीब पांच हजार से ज्यादा पौधे लगाए हैं। विवि के पूर्व चीफ प्रोक्टर डॉ. इशाक मोहम्मद कायमखानी ने भी स्वयं खर्च से विवि का पार्क विकसित करवाया है। एमपीयूएटी ने भी इस वर्ष बड़ी संख्या में पौधरोपण किया।