पांचवीं बोर्ड परीक्षा बनी मजाक!

कहीं पेपर कम तो कहीं दूसरे विषय के निकल रहे पेपर

शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं

जयपुर। पांचवीं बोर्ड (Fifth board) की परीक्षा विभाग करा तो रहा है, लेकिन यह परीक्षा विभाग के संभालने में नहीं आ रही है। इस परीक्षा में प्रदेश में करीब 13 लाख बच्चे पंजीकृत हुए हैं। जिला स्तरीय प्राथमिक अधिगम स्तर मूल्यांकन—2018 (पांचवीं बोर्ड) में आए दिन गड़बड़ी सामने आ रही है, लेकिन प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईआरटी), उदयपुर इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

ऐसे हो रही गड़बड़

प्रश्नपत्र के लिफाफों में पेपर ही दूसरे विषय के निकल रहे हैं। रिजर्व पेपर के माध्यम से परीक्षा कराई जा रही है। इस परीक्षा को देने वाले अधिकांश बच्चे छोटे हैं, जो इसकी शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। कई स्थानों पर पेपर दूसरे विषय के निकल रहे हैं तो कई जगह पर पेपर कम निकल रहे हैं। इसकी जानकारी एसआईईआरटी डायरेक्टर और निदेशक प्रारंभिक शिक्षा सहित विभाग के बड़े आला अधिकारियों को भी है।

ऐसे निकल रहे पेपर

— 9 अप्रेल को गणित की परीक्षा हुई। अलवर जिले के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय पिनान में परीक्षा केन्द्र पर गणित विषय के लिफाफे में हिंदी के पेपर निकले। जबकि हिंदी का पेपर तो 5 अप्रेल को ही हो चुका था। यहां कुछेक पेपर नोडल केन्द्र से मंगवाए और कुछ फोटो कॉपी कराकर काम चलाया।

— जोधपुर के सांगरिया सीनियर सैकण्डरी स्कूल में 9 अप्रेल को गणित की परीक्षा में पर्यावरण अध्ययन का प्रश्नपत्र खुल गया। जबकि पर्यावरण अध्ययन का पेपर तो आज 11 अप्रेल को हुआ है।

— बारां जिले के हरनावदाशाहजी में 7 अप्रेल को हुई अंग्रेजी की परीक्षा में पेपर संस्कृत के निकले। लिफाफे पर अंग्रेजी लिखा था और निकले दूसरे विषय के। संस्कृत का पेपर 13 अप्रेल को होना है।

— राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय खाटूश्याम जी में 9 अप्रेल को गणित विषय की परीक्षा थी, पेपर के लिफाफे खोले तो उसमें तीन अलग विषयों के पेपर निकले। बाद में दातारामगढ़ से पेपर मंगाकर परीक्षा कराई, इसमें करीब पौन घंटे देरी से परीक्षा शुरू हुई।

रिपोर्ट बनाकर निदेशक प्रारंभिक को देंगे

मेरे पास एक दो जगह से शिकायत आई हैं पेपर कम निकले हैं, दूसरे विषय के निकले हैं। जयपुर और उदयपुर से भी शिकायत आई है। हम इसकी रिपोर्ट बनाकर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को भेजेंगे।

-दिनेश कोठारी, निदेशक, एसआईईआरटी, उदयपुर