भारत सरकार ने स्कूलों से मांगी रिपोर्ट, कैसे करते हैं पीने के पानी को साफ

कहां से आता है पीने का पानी, दूर—दराज के इलाकों में हाल खराब

जयपुर। सरकार की मंशा है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को साफ पानी पिलाया जाए, इसी के चलते भारत सरकार (Government of India) ने देशभर के प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े स्कूलों से पीने के पानी को साफ करने के तरीके के बारे में जानकारी मांगी है। प्रदेश में यह जानकारी आयुक्त मिड—डे—मील के माध्यम से स्कूलों द्वारा भारत सरकार को भेजी जाएगी। लेकिन हकीकत ये है कि प्रदेश के बहुत से दूर—दराज के इलाकों में तो स्कूलों में पीने के पानी की कोई व्यवस्था ही नहीं है। सिर्फ जुगाड़ से ही काम चलाया जा रहा है। कहीं हैंडपम्प में पानी नहीं है तो कहीं किसी भी तरह की पीने के पानी कोई व्यवस्था ही नहीं है। सिर्फ एक घड़ा पानी मांगकर स्कूल काम चला रहे हैं। हालांकि राजधानी जयपुर में एक संस्था द्वारा अधिकांश स्कूलों को पानी के कैम्पर सप्लाई किए जाते हैं। फिर भी जयपुर जिले में डाईस 2017 के आंकड़ों के अनुसार 43 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। हालात ये हैं कि बहुत से स्कूलों में तो पानी की टंकियां ही लंबे समय से साफ नहीं हुई हैं। कई जगह पानी को साफ करने की मशीनें खराब पड़ी हैं। सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए मशीनें लगी हुई हैं।

बिजली ही नहीं

प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के करीब 28 हजार स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बिजली की सुविधा नहीं हैं, ऐसे में पीने के पानी को साफ करने की भी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं स्कूलों में पानी के लिए बोरिंग, नल, हैण्डपम्प आदि की भी व्यवस्था नहीं है। कई जगह तो बच्चे आसपास से पानी लाकर मटका भरते हैं।

बिजली ही नहीं

प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के करीब 28 हजार स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बिजली की सुविधा नहीं हैं, ऐसे में पीने के पानी को साफ करने की भी यहां कोई व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं स्कूलों में पानी के लिए बोरिंग, नल, हैण्डपम्प आदि की भी व्यवस्था नहीं है। कई जगह तो बच्चे आसपास से पानी लाकर मटका भरते हैं।

पीने के पानी को साफ करने की ये मांगी जानकारी

— जिलेवार कुल स्कूल
— स्कूल में पीने के पानी की सुविधा क्या है
— पानी को साफ करने का तरीका क्या है
— आरओ प्यूरीफिकेशन, अल्ट्रा फिल्ट्रेशन, अल्ट्रा वाईलेट, कैडल वाटर प्यूरीफायर, कार्बन फिल्टर प्यूरीफायर।

ये है स्थिति

— प्रदेश में 49 हजार 575 प्रारंभिक शिक्षा के सरकारी स्कूल हैं
— इनमें 34 लाख 30 हजार 343 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।