इस सरकारी स्कूल के हाल देखेंगे तो कहेंगे क्या होगा बच्चों के भविष्य का… क्योंकि ऐसा करने को बच्चे हैं मजबूर

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स्कूल भवन के अभाव में हालात टुस डांगियान पंचायत का रावतपुरा गांव

गुड़ली। ग्राम पंचायत टुस डांगियान के रावतपुरा गांव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय खुले करीब 16 वर्ष हो गए है, लेकिन अभी तक इस विद्यालय में पढऩे वाले बच्चों को सरकार (government school) ने छत मुहैया नहीं कराई है। यहां तक की ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को भी इसके बारे में जानकारी नहीं है। मामला जिले की वल्लभनगर तहसील की टुस डांगियान पंचायत के रावतपुरा गांव में संचालित प्राथमिक विद्यालय का है। शिक्षा को लेकर सरकार के दावे रावतपुरा विद्यालय के हालात देखकर खोखले साबित हो रहे हैं। यह विद्यालय वर्ष 2002 में खुला है, तब से लेकर अब तक 16 वर्षों से गांव में मकानों व सार्वजनिक चबूतरों पर संचालित हो रहा है। वर्तमान में धर्मराज मीणा के मकान के अंदर बरामदे में चल रहा है। जहां मकान मालिक की बकरियों व गाय के बछड़ों के पास बैठा कर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। यहां मिड-डे-मिल के तहत बच्चों के लिए बनने वाल पोषाहार भी इसी मकान के एक कोने में बनता है।

शिक्षिकाओं ने बताया कि कई बार इन नौनिहालों की रोटियां बकरियां खा जाती है। वर्तमान में यहां पर 33 बच्चों का नामांकन है और दो शिक्षिकाएं यहां कार्यरत है। संस्था प्रधान रिटा कुमारी ने भवन के लिए कई बार ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला कलक्टर तक पत्र लिखे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। भवन नहीं होने से यहां की दो अलमारी भी गांव के अन्य मकान में रखी हुई है। साथ ही मिड-डे-मिल बनाने में भी बहुत परेशानी आ रही है। बरसात के दिनों में ओर भी अधिक परेशानी रहती है। इन 16 वर्षों में यहां के सरपंच व ग्रामीणों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है, न ही विद्यालय के लिए जमीन आवंटित करवाई है। जिससे यहां पर विद्यालय का भवन नहीं बन पाया है। वर्तमान में जहां जिस मकान में विद्यालय चल रहा है, उसके मकान मालिक ने भी मकान खाली कराने के लिए बोल दिया है, उसके घर में बच्चों की शादी है। इससे अब दोनों शिक्षिकाएं को चिन्ता हो रही है कि अब विद्यालय कहां संचालित किया जाए और गांव में ऐसा कोई स्थान भी नहीं है।