प्रभारी ने परीक्षा फीस जमा नहीं की, बच्चों को जाना पड़ा हाईकोर्ट

court case and Education

बोर्ड द्वारा इन दो बच्चों के आवेदन निरस्त कर दिए, अब परीक्षा नहीं दे पाएंगे

दरियाटी/डूंगरपुर। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर 12वीं की परीक्षा गुरुवार को शुरू हो रही है। ऐसे में राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल मालाखोलड़ा के परीक्षा प्रभारी (incharge) शिक्षक ने दो बच्चों की फीस जमा नहीं कराने के कारण उन्हें परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया है। जैसे ही वंचित करने संबंधित आदेश स्कूल में पहुंचे तो हड़कंप मच गया।

आनन-फानन माता-पिता को बुलाया और कोर्ट में जाने की नसीहत दी। इधर, ये बच्चे अपने पिता के साथ परीक्षा की तैयारी छोड़कर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। वहां से स्टे मिल जाता है तब तो परीक्षा दे पाएंगे, अन्यथा एक बोर्ड परीक्षा प्रभारी शिक्षक की लापरवाही से बिगड़ेगा।

चिखली पंचायत समिति में आदर्श राउमािव मालाखोलड़ा में परीक्षा प्रभारी और पूर्व कार्यवाहक प्रधानाचार्य महेश भगोरा की लापरवाही के कारण दो बच्चों की बोर्ड परीक्षा फीस जमा नहीं कराई। स्कूल में कक्षा बारहवीं कला वर्ग के छात्र मगनलाल पारगी और कक्षा दसवीं के मणिलाल गरासिया को इस वर्ष परीक्षा देने में परेशानी हो रही है। स्कूल के होनहार और नियमित आने वाले दोनो विद्यार्थी ने सालभर परीक्षा की तैयारी कर सुनहरे भविष्य के सपने सजाए थे। एक माह से दोनों छात्र परीक्षा के रोल नंबर प्राप्त करने के लिए स्कूल के चक्कर काट रहे हैं। जहां पर उन्हें रोल नंबर प्राप्त होने का झूठा आश्वासन दिया जा रहा था। बोर्ड परीक्षा प्रभारी महेश भगोरा ने होली के बाद से स्कूल में उपस्थिति नहीं दी है। मोबाइल नंबर भी बंद है। जिसके बाद से दोनों छात्र के अभिभावक बच्चों के लिए स्कूल में संपर्क साधा।

पांच दिन पहले पूरे मामले की जानकारी मिली थी। इसके बाद लापरवाह प्रभारी शिक्षक महेश भगोरा को एपीओ कर जिला मुख्यालय किया गया है। निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रकरण निदेशालय भेज चुके हैं। -अनोपसिंह सिसोदिया, डीईओ माध्यमिक शिक्षा

राउमावि मालाखोलड़ा के बोर्ड परीक्षा प्रभारी की लापरवाही से बोर्ड ने दो बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोका

20 हजार खर्चा कर अभिभावक रवाना हुए जोधपुर- होली से पहले शिक्षा विभाग को पूरे मामले की जानकारी अभिभावक और ग्रामीणों ने दी थी। विभाग की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के बाद अभिभावक जोधपुर हाईकोर्ट पहुंचे। वहां से वकील से पूरे मामले में याचिका दायर कर विशेष ऑर्डर प्राप्त किया जाएगा। जहां से जो पेपर हो चुके हैं, उन्हें छोड़कर शेष पेपर देने की विशेष परमिशन मिल सकती है। ऐसे में पूरे मामले में करीब 20 हजार का खर्चा अभिभावकों को होगा।

अजमेर बोर्ड पिछले पंद्रह दिनों से महेश भगोरा को भेज रहे हैं सूचना

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भी प्रभारी शिक्षक महेश भगोरा से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। शुरू के सात दिनों तक फीस भरने की टालमटोल चलती रही, बाद में प्रभारी महेश भगोरा ने फोन उठाना बंद कर स्विच ऑफ कर दिया, जिससे अजमेर बोर्ड ने फोन करना बंद कर दिया।

स्थानीय जिला शिक्षा अधिकारी और पूरी टीम की गलती है। हमने 15 जनवरी को 19 लाख बच्चों के रोल नंबर सहित समस्त जानकारी ऑनलाइन दे दी थी। उस समय जिले के अधिकारियों को स्कूलवार रोलनंबर और अन्य डिटेल क्रॉस चेक कर लेना था। वंचित बच्चों की जानकारी 31 जनवरी तक भेज देते तो उन बच्चों का कुछ हो सकता था।

– राजेंद्र गुप्ता, पीआरओ, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड