केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने ‘प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया

‘प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया
‘प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया

‘प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज एनआईटीटीटीआर, कोलकाता द्वारा प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम मौलाना आजाद की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया जो राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उपाध्यक्ष श्री भूषण पटवर्धन, एनआईटीटीटीआर, कोलकाता के निदेशक प्रो. देबी प्रसाद मिश्रा, एनआईटीटीटीआर, कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) के अध्यक्ष के अध्यक्ष श्री हर्षवर्धन नेवतिया भी इस संगोष्ठी में शामिल हुए।

image001OLJC

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री पोखरियाल ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमारी परम्परागत भारतीय ज्ञान प्रणाली ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला, वास्तु, संस्कृति, गणित, औषधि आदि के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता प्रदर्शित की है। उन्होंने कहा कि यह समय की जरूरत है कि हम भारतीय शिक्षा क्षेत्र की व्यापकता को स्वीकार करें और इसे आधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ते हुए वर्तमान समय की समस्याओं के समाधान में इस ज्ञान का उपयोग करें।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने महान शिक्षाविद् और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम का उनकी जयंती पर स्मरण किया। श्री पोखरियाल ने इस तरह की संगोष्ठी की उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमारी प्राचीन संस्कृति और धरोहर को वर्तमान पीढ़ी को हस्तांतरित करने के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रतिभागियों को प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली के महत्व के संबंध में जागरूक करेगी। श्री पोखरियाल ने कहा कि यह संगोष्ठी हमारी प्राचीन शिक्षा के मूलभूत तत्वों के गौरव को और प्रोत्साहित करेगी जिसका अर्थ कभी भी अतीत से चिपके रहना नहीं बल्कि हमारे नागरिकों के संपूर्ण विकास के लिए भिन्न दृष्टि से विचार करना है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अपेक्षा के अनुरूप इस संगोष्ठी के आयोजन के लिए एनआईटीटीटीआर, कोलकाता के प्रयासों की सराहना की।

श्री पटवर्धन ने संगोष्ठी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह समय की जरूरत है। उन्होंने देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का भी उल्लेख किया।

उद्घाटन समारोह के बाद एनआईटीटीटीआर, कोलकाता के निदेशक ने अपने सम्बोधन में प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था के संबंध में चर्चा करते हुए नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों जैसे शिक्षा के महान केन्द्रों का उल्लेख किया। अगले वक्ता कांगड़ी गुरुकुल विश्वविद्यालय हरिद्वार के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने वैदिक काल में शिक्षा व्यवस्था के संबंध में विचार व्यक्त किए।