मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश नहीं देने के मामले की सुनवाई जोधपुर में

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जयपुर। हाईकोर्ट ने सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों को प्रवेश नहीं देने और संविधान के प्रावधान व आरटीई कानून का उल्लंघन मामले में दायर एडवोकेट माही यादव की पीआईएल को सुनवाई के लिए जोधपुर मुख्यपीठ को भेजने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश जीके व्यास व जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश दिया।

– अदालत ने कहा कि इसी तरह का एक अन्य मामला जोधपुर मुख्यपीठ में चल रहा है इसलिए इस याचिका की सुनवाई भी उस मामले के साथ हो जाएगी। हालांकि प्रार्थिया की ओर से मामले को सुनवाई के लिए जोधपुर भेजने का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला पीआईएल का है और इसकी सुनवाई किसी अन्य निजी केस के साथ नहीं हो सकती, लेकिन अदालत ने प्रार्थिया की दलीलों से सहमत नहीं होते हुए मामले को सुनवाई के लिए जोधपुर भिजवाने का निर्देश दिया।

– इस मामले में अदालत ने 26 अक्टूबर 2016 को केन्द्र सरकार को कहा था कि वह सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश के लिए किए आवेदनों को जमा कर उन पर नीतिगत निर्णय करें।

– गौरतलब है कि पीआईएल में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 व आरटीई कानून के तहत शिक्षा मूलभूत अधिकार है, लेकिन सैनिक व मिलिट्री स्कूलों में लिंग के आधार पर भेदभाव हो रहा है और लड़कियों को प्रवेश नहीं दिया जाता जबकि लड़कियों को स्कूल में प्रवेश नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 15 और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

चिमनपुरा बीएड कॉलेज में तीन साल से स्वीकृत 8 में से एक व्याख्याता

रेगुलर पीरियड भी नहीं

जयपुर। शहर के बीबीडी कॉलेज चिमनपुरा कॉलेज के अधीनस्थ संचालित राजकीय व्याख्याता प्रशिक्षण महाविद्यालय (बीएड कॉलेज) पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे है। कॉलेज की संबंद्धता को लेकर गुरुवार को राजस्थान विश्वविद्यालय की टीम ने निरीक्षण किया। तीन साल पहले शुरू हुए इस बीएड कॉलेज वर्तमान में सरकार की बेरूखी के चलते महज एक व्याख्याता के भरोसे संचालित हो रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक व्याख्याता किस प्रकार से अध्यापन करवाता होगा।बीबीडी कॉलेज चिमनपुरा में सरकार ने वर्ष 2015 में राजकीय व्याख्याता प्रशिक्षण महाविद्यालय चालू किया था। इसमें 100 सीट निर्धारित की गई थी। शुरुआत में यहां पर 6 व्याख्याताओं का स्टाफ लगाया गया था, तब क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने स्वर्णिम भविष्य की उम्मीद जगी थी, थोड़े दिनों बाद ही दो व्याख्याता रिटायर्ड हो गए। हाल ही दो व्याख्याता सितम्बर 2017 एवं जनवरी 2018 में सेवानिवृत हो गए। एक कर्मचारी का अन्यत्र तबादला हो गया। इसके बाद से यहां पर केवल एक ही व्याख्याता कार्यरत है। अगर सरकार की बेरूखी की मार ऐसे ही चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब यह कॉलेज बीएड की संबंद्धता खो देगा। गुरुवार को राजस्थान विश्वविद्यालय से रिटायर्ड प्रो.एसडी गुप्ता के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम ने चिमनपुरा पहुंचकर बीएड कॉलेज की संबद्धता लेकर निरीक्षण किया। टीम ने कॉलेज में स्टाफ सहित अन्य भौतिक संसाधन व सुविधाओं का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार की। प्रो. गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट गोपनीय है। कॉलेज की संबंद्धता को लेकर निरीक्षण किया गया है। पूरी रिपोर्ट तैयार कर राजस्थान विश्विवद्यालय को सौंपी जाएगी।

बीएड कॉलेज में एक विभागाध्यक्ष सहित 8 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत है, लेकिन पूरे पद तो कॉलेज खुलने से लेकर आज तक नहीं भरे गए। जबकि एनसीईटी के नियमों के अनुसार बीएड कॉलेज में विभागाध्यक्ष सहित 16 व्याख्याता होने चाहिए। वर्तमान में तो हालात और भी ज्यादा खराब है। केवल एक व्याख्याता स्थायी रूप से काम कर रहा है। जो प्रशिक्षणार्थियों की क्लास लेने से लेकर विभागीय डाक पत्रावलियों सहित अन्य कार्य भी अकेला ही निपटा रहा है। हालांकि अन्यत्र कॉलेज से तीन शिक्षकों को 15 दिन के लिए यहां पर कार्य व्यवस्था के लिए लगा रखा है, जो भी समय अवधि पूरी होने पर चले जाएंगे। ऐसे में शिक्षक बनने की आस में यहां पर बीएड का प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षणार्थियों का भविष्य भी अंधकारमय बना हुआ है।