NCERT सर्वे: देश में अंग्रेजी की ‘हैसियत’ का खुलासा

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NCERT सर्वे: देश में अंग्रेजी की ‘हैसियत’ का खुलासा

नैशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (NCERT) के एक सर्वे में देश के अलग-अलग राज्यों के स्कूलों में इंग्लिश की स्थिति सामने आई है। यह सर्वे नैशनल करिक्युलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के तहत किया गया, जिसने प्राइमरी स्तर पर अंग्रेजी को दूसरी भाषा के तौर पर पढ़ाने का सुझाव दिया है। स्टडी में उल्लेख किया गया है कि विषयों का चुनाव पैरंट्स पर निर्भर करता है और न कि स्कूलों की स्थिति पर। किस राज्य में अंग्रेजी को किस प्राथमिकता पर रखा गया है, यह भी इस स्टडी में खुलासा हुआ।

अपर प्राइमरी लेवल पर अंग्रेजी की सबसे ज्यादा क्लास देने के मामले में जम्मू-कश्मीर सबसे टॉप पर है, जहां एक हफ्ते में अंग्रेजी की नौ पीरियड लगता है। वहीं कर्नाटक में सभी स्तर यानी प्राइमरी, अपर प्राइमरी और सेकंड्री स्तर पर हफ्ते में अंग्रेजी का पांच पीरियड होता है। सिक्किम में सेकंड्री लेवल पर एक हफ्ते में अंग्रेजी पढ़ाने पर 10 घंटे दिए जाते हैं।

पंजाब, मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के साथ कर्नाटक में अभी एनसीएफ को लागू करना बाकी है। सिक्किम के अलावा असम और अरुणाचल प्रदेश में प्राइमरी लेवल पर अंग्रेजी के लिए आठ पीरियड्स आवंटित किए गए हैं। वहीं, मिजोरम, नगालैंड और मेघालय ने अंग्रेजी को ज्यादा महत्व नहीं दिया है।

मातृभाषा को प्राथमिकता देने के मामले में पश्चिम बंगाल टॉप पर है। वहां अपर प्राइमरी के छात्रों के लिए 200 मार्क्स का बंगाली भाषा का पेपर होता है। कर्नाटक में संस्कृत और इंग्लिश के साथ कन्नड़ पहली भाषा के तौर पर ऑफर की जाती है, जो 125 मार्क्स की होती है। ज्यादातर राज्यों में मातृभाषा के लिए अधिकतम अंक 100 हैं।

कर्नाटक में कन्नड़ के लिए एक हफ्ते में छह पीरियड्स समर्पित है, जबकि महाराष्ट्र में मराठी के लिए हफ्ते में 13 घंटे समर्पित हैं। आंध्र प्रदेश में प्राइमरी लेवल पर तेलुगु के लिए 12 पीरियड्स समर्पित है।

रिपोर्ट से सामने आया है कि देश के 15 राज्यों ने एनसीईआरटी द्वारा सुझाए गए पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तिकाओं को अपनाया है। दूसरी ओर, 14 राज्य अपने खुद के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी द्वारा सुझाए गए पाठ्यक्रम को एकीकृत किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से उन राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जहां एनसीएफ को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।