‘निजी शिक्षण संस्थानों पर नहीं हो सरकार की पाबन्दी’

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नागौर। राजस्थान इंडिपेंडेन्ट स्कूल एलायंश की ओर से शहर के जोधपुर रोड स्थित एक होटल में प्रदेश स्तरीय संगोष्ठी में सरकार के निजी शिक्षण संस्थानों के नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार न तो उनके शुल्क लिए जाने की व्यवस्था में हस्तक्षेप करे, और न ही अन्य मामलों में, इससे शैक्षिक व्यवस्था का विकास होगा। एसोसिएशन की ओर से प्रमुख एजेंडों में पांचवीं एवं आठवीं की बोर्ड परीक्षा बाध्यता समाप्त करने, मान्यता संबंधी नियम व उपनियमों का सरलीकरण किए जाने के साथ ही निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्ता के लिए जागरुकता किए जाने के साथ ही संघर्ष किए जाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी। संगोष्ठी में प्रदेश के जोधपुर, अजमेर , पाली एवं राजसमंद सहित विभिन्न जिलों के संचालकों ने सरकार को जमकर कोसा। संचालकों का कहना था कि सरकार उनके निजी शिक्षण संस्थानों में अनावश्यक हस्तक्षेप करती है। इससे शैक्षिक व्यवस्था एवं शैक्षिक प्रगति में बाधा आती है। आखिरकार स्कूल चलाने वाले संचालक अपने ही स्कूल में प्रति बच्चे शुल्क का निर्धारण क्यों नहीं कर सकते हैं। मुख्य वक्ता के तौर पर संगठन के संरक्षक महेन्द्र कर्नावट ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों से बच्चों एवं उनके अभिभावकों का मोह भंग हुआ है। प्राइवेट संस्थान ही शैक्षिक प्रगति में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं, अन्यथा हालात खराब हो जाते। सरकार को भी अब यह हस्तक्षेप करना बंद कर देना चाहिए, नहीं तो फिर विरोध किया जाएगा। सचिव विनेश शर्मा ने कहा कि सरकार का हस्तक्षेप न्यूनतम होना चाहिए। यहां पर अधिकतम होने लगा है। अन्य वक्ताओं में जालोर से आए के. एन. भाटी, जोधपुर से आए नरपतसिंह शेखावत, ब्यावर से कृष्णगोपाल पाराशर एवं मौलासर से आए सीताराम ने कहा कि सरकार निजी शिक्षण संस्थानों की कार्यशैली पर हस्तक्षेप करना बंद कर दे। निजी संस्थानों को उनकी मर्जी पर छोड़ दिया जाना चाहिए। वह अपने विद्यालयों सरकारी हस्तक्षेप बिलकुल नहीं चाहते हैं।

इन प्रस्तावों पर बनी सहमति

शिक्षा एवं शिक्षण संस्थाओं की स्वायत्ता के लिए जागरुकता के साथ ही संघर्ष करने, गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रति सरकार की शंकालु दृष्टि का विरोध करना, प्रदेश में चिकित्सा की नि:शुल्क व्यवस्था होने की वजह से ईएसआई को आवश्यकताविहीन मानते हुए इसके तहत कटौती का विरोध करना, मान्यता संबंधी नियम व उपनियमों के सरलीकरण के साथ ही मियादी जमा राशि, भवन बाध्यता, अन्य प्रमाण पत्र बाध्यता, जुर्माना, कागजी कार्रवाई एवं बाबूगिरी का विरोध करना, पांचवीं एवं आठवीं बोर्ड परीक्षा की बाध्यता समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना एवं शांतिनिकेतन की तर्ज पर गुरुकुल शिक्षण व्यवस्था के प्रयास करने आदि प्रस्तावों पर सहमति बनी।

इस पर भी हुई चर्चा

संगोष्ठी के दौरान सचिव शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों के साथ ही परस्पर चार व पांच के ग्रुप में एजेंडे के विषयों पर अलग से चर्चा कराई। समूह वार्तालाप में निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायतता एवं सरकार का विरोध करने का विषय ही उभरकर सामने आया। इसमें कहा गया कि निजी शिक्षण संस्थान खुद के संस्थानों का परस्पर विरोध करने एवं नीचा दिखाने के स्थान पर सरकार एवं सरकारी स्तर पर उठने वाले कदमों का विरोध करें।

यह हुए शामिल

संगोष्ठी में प्रहलादराम जाजड़ा, महेन्द्रसिंह शेखावत, संजय गहलोत, हरदेवाराम, धर्माराम प्रजापति, कन्हैयालाल आचार्य, अनुराग कुड़ी, शैतानराम जांगल, राजेश पूनिया, मनीष, ललित, महेन्द्र शर्मा, मांगीलाल गहलोत एवं रंजना शर्मा आदि उपस्थित थीं।