7 हजार निजी स्कूलों को मान्यता समाप्ति का नोटिस

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जयपुर। शिक्षा विभाग की ओर से निजी स्कूलों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। करीब 7 हजार (7 thousand) निजी स्कूलों को फीस एक्ट का पालन नहीं करने के कारण मान्यता समाप्ति का नोटिस थमाया गया है। उन्हें एक मौका देते हुए कहा गया है कि या तो वे 7 दिन में स्कूल स्तरीय फीस कमेटी बनाकर कानून का पालन कर लें वरना उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।

-नोटिस के दायरे में सभी निजी स्कूल हैं चाहे वे राजस्थान बोर्ड से संबद्ध हो या सीबीएसई से। जयपुर में करीब साढ़े पांच सौ निजी स्कूलों को नोटिस भिजवाया जा रहा है। -विभाग के ध्यान में आया था कि प्रदेश के सात हजार से अधिक निजी स्कूलों में अब तक भी फीस कमेटी नहीं बनी है। यह कमेटी 6 महीने पहले ही बन जानी चाहिए थी, लेकिन जयपुर के विद्याश्रम स्कूल के अड़ियल रवैये के कारण मामले ने तूल पकड़ लिया।

-स्कूल प्रबंधन ने फीस एक्ट का पालन नहीं करके डीईओ को ही फीस एक्ट का पाठ पढ़ा दिया था। इससे गुस्साए शिक्षा निदेशक ने पहले तो विद्याश्रम स्कूल को नियमों का पाठ पढ़ाते हुए 26 अप्रैल को बीकानेर तलब कर लिया। साथ ही निर्देश दिया कि ऐसे सभी स्कूलों को नोटिस दिया जाए जिसने अब तक स्कूल स्तरीय फीस कमेटी नहीं बनाई है।

-नोटिस में स्कूलों को 7 दिन में कानून का पालना करने का अवसर दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि विभाग की एनओसी के बाद ही उन्हें सीबीएसई या अन्य बोर्ड की संबद्धता प्राप्त होती है। इसलिए वे राज्य सरकार के नियम और अधिनियम का पालन करने के लिए बाध्य है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो विभाग राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989 और नियम 1993 के नियम 07 के तहत मान्यता समाप्त और एनओसी को निरस्त करने की कार्रवाई कर सकता है।

जनप्रतिनिधियों को लिखा पत्र, स्कूलों में नामांकन बढ़वाने की अपील

जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। शिक्षामंत्री ने जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर उनसे विभागीय अभियान में भागीदार बनने की अपील की है। विभाग चाहता है कि खुले में शौच मुक्त यानि ओडीएफ की तर्ज पर पंचायतों को ड्रॉप आउट फ्री यानि डीओएफ बनाया जाए। नामांकन बढ़ाने के लिए विभागीय प्रवेशोत्सव अभियान का पहला चरण गुरूवार से राज्यभर में शुरू होगा। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिशः पत्र लिखा है। शिक्षामंत्री से आह्वान किया है कि वे अपने अपने क्षेत्र के अभिभावकों को बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए प्रेरित करें। ताकि विद्यार्थियों को आयु के हिसाब से कक्षा में दाखिला मिल सके। शिक्षामंत्री ने पंचायत समिति प्रधान, सरपंचों से शत प्रतिशत नामांकन और ठहराव में सक्रिय सहयोग की अपील की है।

डीओएफ घोषित होगी पंचायत

विभाग का मानना है कि नामांकन बढ़ाने और ड्रॉप आउट को रोकने के सामुहिक प्रयासों की जरूरत है। ताकि समाज में एक भी बच्चा स्कूल में दाखिले से वंचित नहीं रहे। उन्होंने कहा कि जिन पंचायतों में शत प्रतिशत बच्चों का नामाँकन होगा, उन्हें उजियारी पंचायत के रूप में सम्मानित किया जाएगा। ओडीएफ की तर्ज पर उन्हें ड्रॉपआउट फ्री घोषित किया जाएगा।

पत्र में शिक्षामंत्री की अपील

शिक्षा राज्य मंत्री ने जनप्रतिनिधियों को लिखे पत्र में कहा है कि प्रवेशोत्सव के दौरान नामांकन के लिए घर-घर सर्वे कर रहे शिक्षकों को सहयोग दें। कोशिश करें कि उनके क्षेत्र का एक भी बच्चा विद्यालय शिक्षा से वंचित नहीं रहे। शिक्षा अधिकार कानून के तहत 6 से 14 आयुवर्ग के हर बच्चे को स्कूल में दाखिला दिलवाना जरूरी है। 6 साल से कम आयु के बच्चों को नजदीकी आंगनबाड़ी में भेजा जाना चाहिए। आपकाे बता दें कि राइट टू एजुकेशन में इस आयुवर्ग के बच्चाें के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है।