Package for Digital and cashless economy

Package for Digital and cashless economy

Package for Digital and cashless economy डिजिटल और कैशलेस इकोनॉमी को प्रोत्साहन के लिए पैकेज

Package for Digital and cashless economy : कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने बड़ी घोषणा की है। इसके तहत अब 2,000 रुपये तक के कार्ड पेमेंट पर सर्विस टैक्स खत्म किए जाने का ऐलान किया गया है। यानी, अब डेबिट या क्रेडिट कार्ड से 2,000 रुपये तक के पेमेंट पर आपको सर्विस टैक्स नहीं देना होगा।

डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 14% सर्विस टैक्स वसूला जाता है। इस लिहाज से 2,000 रुपये के हर पेमेंट पर आपको 280 रुपये बचेंगे। इस बड़ी राहत मानी जा सकती है।

दरअसल, काले धन के खिलाफ लड़ाई में सरकार नगदी लेन-देन की जगह डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के तरीकों पर जोरशोर से काम कर रही है। इसके लिए सरकार ऑनलाइन और कार्ड पेमेंट जैसे विभिन्न विकल्पों को सुविधाजनक और आकर्षक बनाने में जुटी है। 2,000 रुपये तक के कार्ड पेमेंट को सर्विस टैक्स से मुक्त करने की आज की घोषणा भी दिशा में उठाया गया एक कदम है।


डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर ग्राहकों को 0.75 प्रतिशत की रियायत देंगी।

ऐसे पेट्रोल पंपों पर हर रोज 4.5 करोड़ लोग पेट्रोल या डीजल भरवाते हैं, जिन्हें इस स्कीम का फायदा मिल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 1800 करोड़ का पेट्रोल/डीजल लोगों को बेचा जाता है। इसमें से 20 प्रतिशत का पेमेंट डिजिटल तरीके से किया जाता था। नवंबर के महीने में ये बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 360 करोड़ रुपए प्रतिदिन का कैशट्रांजेक्शन अब डिजिटल माध्यमों से होने लगा है।

इस स्कीम के बाद 30 प्रतिशत और ग्राहकों के डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ने की संभावना है। इससे पेट्रोलपंपों पर सालाना 2 लाख करोड़ रुपए के कैश की आवश्यकता भी कम होगी।


ग्रामीण इलाकों में डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने के लिए सरकार नाबार्ड की मदद से बैंकों को आर्थिक मदद देगी। प्रयास है कि 10 हजार से कम आबादी वाले 1 लाख गावों में 2 POS मशीनें अवश्य हों।

ये POS मशीनें प्राइमरी कॉपरेटिव सोसायटी/दुग्ध सोसायटी/ कृषि से जुड़ा सामान बेचने वाले डीलरों के पास लगाई जाएंगी ताकि खेती से जुड़ी चीजों के लिए लेन-देन डिजिटल तरीके से हो सके।

इस स्कीम का फायदा एक लाख गांवों में रहने वाले किसानों को होगा। इससे 75 करोड़ की कुल आबादी कवर होगी जो गांवों में खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए डिजिटल तरीके से लेन-देन करेगी।


नाबार्ड की मदद से सरकार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और कॉपरेटिव बैंकों को RUPAY किसान कार्ड जारी करने में सहायता करेगी। 4 करोड़ 32 लाख किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले धारकों को RUPAY किसान कार्ड वितरित किए जाएंगे ताकि वोPOS मशीनों/माइक्रोATM या ATM के जरिए डिजिटल पेमेंट कर सकें।


रेलवे के सब-अर्बन रेलवे नेटवर्क में मासिक और सीजनल टिकट के लिए डिजिटल तरीके से पेमेंट करने वालों को 0.5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ये छूट 1 जनवरी 2017 से खरीदे जाने वाले टिकटों पर मिलेगी।

उपनगरीय रेलवे में लगभग 80 लाख यात्री मासिक या सीजनल टिकट ज्यादातर कैश देकर ही खरीदते हैं। ऐसे टिकट के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। जब ज्यादा से ज्यादा यात्री डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ेंगे तो भविष्य में टिकट खरीदने के लिए नकद राशि की मांग 1000 करोड़ रुपए तक कम हो सकती है।


रेलवे में ऑनलाइन टिकट बुक कराने वालों को 10 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा मुफ्त दिया जाएगा।

प्रतिदिन 14 लाख रेलवे यात्री टिकट खरीदते हैं जिनसे में 58 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन खरीदे जाते हैं। उम्मीद है कि इस कदम के बाद 20 प्रतिशत और यात्री टिकट बुक कराने के लिए डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ेंगे। ऐसा होने पर प्रतिदिन लगभग 11 लाख रेल यात्री प्रतिदिन दुर्घटना बीमा स्कीम के तहत कवर होंगे।


रेल अपनी मान्यता प्राप्त इकाइयों और कोरपोरेशंस द्वारा सशुल्क सेवाएं भी उपलब्ध कराती है जैसे केटरिंग, ठहरने की सुविधा, विश्रामगृह इत्यादि। इन सुविधाओं के लिए डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
रेलवे से सफर करने वाले हर यात्री को इसका फायदा मिलेगा।


सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां कस्टमर पोर्टल के जरिए डिजिटल पेमेंट किए जाने पर जनरल इंश्योरेंसपॉलिसी के समय प्रीमियम में 10 प्रतिशत तक का डिस्काउंट या क्रेडिट देंगी। इसके अलावा लाइफइंश्योरेंसकॉरपोरेशन में नई जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम में 8 प्रतिशत का डिस्काउंट या क्रेडिट दिया जाएगा।


केंद्र सरकार के विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान ये सुनिश्चित करेंगे कि डिजिटल पेमेंट करने पर ट्रांजेक्शन फीस या MDR चार्ज ग्राहकों से ना वसूला जाए। ये चार्ज इन विभागों या संस्थानों को खुद वहन करना होगा।

राज्य सरकारो को भी सलाह दी गई है कि राज्य सरकार के विभाग और संस्थाएं डिजिटल पेमेंट किए जाने पर ग्राहकों से ट्रांजेक्शन फीस या MDR चार्ज ना वसूलें।


सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सलाह दी गई है कि वोPOS टर्मिनल के लिए/ मोबाइल POS के लिए या फिर माइक्रोATM के लिए 100 रुपए प्रतिमाह से ज्यादा मासिक किराया ना वसूलें। इससे छोटे कारोबारियों को भी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ने में मदद मिलेगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा लगभग 6.5 लाख मशीनें व्यापारियों को दी गई हैं जिन्हें कम किराए का लाभ मिलेगा। किराया कम होने की वजह से और ज्यादा व्यापारी ऐसी मशीनों को लगाने और डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित होंगे।


डिजिटल तरीके से 2000 रुपए तक के ट्रांजेक्शन पर अब कोई सर्विस चार्ज नहीं