प्रमुख शासन सचिव ने लिया डीईओ से फीडबैक

अन्नपूर्णा दूध योजना

सीकर। नए सत्र में दो जुलाई से शुरू होने वाली अन्नपूर्णा दूध योजना को लेकर शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव नरेश पाल गंगवार ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मंगलवार को राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से फीडबैक लिया तो कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आईं।

मसलन बजट में बर्तन खरीदने, दूध खरीदने, गिलास व अन्य मदों के लिए तो बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन चीनी कैसे खरीदेंगे, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं दी गई है। योजना के क्रियान्वयन में इस तरह की क्या-क्या समस्या आ सकती हैं और उसका समाधान कैसे किया जाए, इस पर विस्तृत चर्चा की गई। योजना का उद्घाटन जयपुर में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करेंगी।

क्या है योजना

योजना के तहत राज्य के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों, मदरसों, स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर्स के कक्षा एक से आठ तक पढऩे वाले बच्चों को सप्ताह में तीन दिन उच्च गुणवत्तायुक्त गर्म व ताजा दूध पिलाया जाएगा।यह दूध प्रार्थना सभा के तुरंत बाद उपलब्ध करवाया जाएगा। योजना में अकेले सीकर जिले में करीब एक लाख 63 हजार बच्चों को दूध पिलाया जाएगा।

कब मिलेगा

शहरी क्षेत्र: सोमवार, बुधवार व शुक्रवार
ग्रामीण क्षेत्र: सोमवार, बुधवार व शुक्रवार

अथवा मंगलवार, गुरुवार व शनिवार
कितना मिलेगा
कक्षा एक से पांच तक 150 एमएल/प्रतिदिन
कक्षा छह से आठ तक 200 एमएल/प्रतिदिन

यह समस्या बताई

– बजट में बर्तन खरीदने, दूध खरीदने, गिलास व अन्य मदों के लिए तो बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन चीनी कैसे खरीदेंगे, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है।

-धौलपुर वालों ने बताया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में दूध भेजने में समस्या आएगी।

-गांव व शहर में दूध खरीदने में अंतर है। इससे समस्या आएगाी।

-दूध सप्ताह में प्रतिदिन नहीं मिलेगा। एक दिन छोडकऱ एक दिन दिया जाएगा, ऐसे में दूध विक्रेता दूध देने में आनाकानी कर सकते हैं।

– बच्चों की संख्या हर दिन की अलग होती है, ऐसे में दूध विक्रेता से कम या ज्यादा दूध लेने में परेशानी आएगी।

– दूध गर्म करने व वितरण के लिए अलग से कर्मचारी रखना पड़ेगा, उसके मिलने में परेशानी होगी।
– ग्रामीण क्षेत्रों में दूध की जांच की सही सुविधाएं/ मशीन उपलब्ध नहीं है।