राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड : 12वीं कला का परिणाम

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Exam Result

राजस्थान बोर्ड ने कोरोनाकाल में शेष परीक्षाओं के आयोजन के 21 दिन बाद ही मंगलवार दोपहर 12वीं कला वर्ग का परिणाम घोषित कर दिया। कुल 90.70% परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जो पिछले साल से 2.70% अधिक हैं। छात्रों का परिणाम गत वर्ष की तुलना में 3.04% सुधरकर कुल 88.45% रहा, जबकि छात्राओं का कुल परिणाम 3.19% सुधरकर 93.10% रहा। यानी 4.65% अधिक छात्राएं पास हुईं। बाड़मेर के राउमावि लोहारवा के प्रकाश ने 99.2% अंक हासिल किए। शिक्षामंत्री डोटासरा ने उन्हें बधाई दी। इस साल 2,83,503 विद्यार्थी प्रथम, 2,16,837 द्वितीय व 26,094 तृतीय श्रेणी में पास हुए।

  • 5,80,725 ने परीक्षा दी
  • 2,99,478 छात्र
  • 2,81,247 छात्राएं
  • 5,26,726 उत्तीर्ण विद्यार्थी

RESULT
Senior Secondary (Arts) Examination, 2020


कोरोना संक्रमण के चलते बोर्ड कार्यालय से 2 किमी दूर घोषित किया परिणाम

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कार्यालय में 1 दिन पहले एक संविदा कार्मिक के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद बोर्ड प्रबंधन ने मंगलवार को 12वीं कला वर्ग का परिणाम 2 किमी दूर रीट ऑफिस से जारी किया। बोर्ड कार्यालय में 2 दिन का अवकाश चल रहा है।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सिविल लाइंस स्थित रीट कार्यालय से 12वीं कला का परिणाम जारी किया, जबकि इससे पूर्व 12वीं विज्ञान, बारहवीं कॉमर्स और वरिष्ठ उपाध्याय के परिणाम बोर्ड कार्यालय से जारी किए गए थे। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में संविदा कार्मिक के पॉजिटिव आने के बाद एहतियात के तौर पर बोर्ड कार्यालय को बुधवार तक के लिए बंद कर रखा है। ऐसे में इस परिणाम को बोर्ड कार्यालय में जारी नहीं किया जा सकता था।

शॉर्ट नोटिस पर हुआ परिणाम जारी

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से परिणाम जारी करने के 1 दिन पूर्व सूचना जारी की जाती है, लेकिन 12वीं कला वर्ग के परिणाम के लिए दोपहर 12:00 बजे सूचना जारी की गई और अपराह्न 3:15 बजे परिणाम जारी किया गया।


अजमेर

5 साल में 12वीं कला वर्ग परीक्षा में प्रथम श्रेणी से कुल 11,52,625 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, इनमें 6,28,876 लड़कियां और 5,23,749 लड़के शामिल हैं

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं कला वर्ग की परीक्षा में लड़कों की तुलना में लड़कियां कम बैठ रही हैं, लेकिन फिर भी फर्स्ट डिवीजन लाने वालों में लड़कियां ही आगे हैं।

पिछले पांच साल में बोर्ड की 12वीं कला वर्ग की परीक्षा में कुल 628876 लड़कियाें ने प्रथम श्रेणी प्राप्त किया, वहीं इस अवधि में लड़कों की संख्या 523749 ही है। यानी 105127 लड़कियां फर्स्ट डिवीजन लाने वाली अधिक हैं। बोर्ड के बीते पांच साल के परिणामों के विश्लेषण में यह रोचक तथ्य उभर कर सामने आए हैं। बोर्ड की 2015 से 2019 तक की 12वीं कला वर्ग की परीक्षाआें कुल 2776399 विद्यार्थी बैठे।

इनमें से 1496947 लड़के और 1279452 लड़कियां हैं। यानी 217495 लड़कियां परीक्षा में कम बैठी हैं। परीक्षा में बैठे कुल विद्यार्थियों में से इन पांच सालों में कुल 2424561 विद्यार्थी पास हुए। इनमें से 1271593 लड़के हैं और 1152968 लड़कियां शामिल हैं। इसके बावजूद परिणाम देने व फर्स्ट डिवीजन पाने में लड़कियां दौड़ में बहुत आगे हैं।

लड़कियां पांच सालों में केवल दो बार ही 90 प्रतिशत से कम

बोर्ड की 12वीं कला वर्ग की परीक्षा में लड़कों का परिणाम अब तक 90% का आंकड़ा नहीं छू सका है। अधिकतम परिणाम 2016 में 87.04% रहा है। जबकि लड़कियां पांच सालों में केवल दो बार ही 2015 2016 में 90% से कम परिणाम दे पाई हैं, 2017 से परिणाम लगातार बढ़ रहा है और 90% के पार ही है। हालत यह है कि बोर्ड का कुल परिणाम भी इन पांच वर्षों में कभी 90% नहीं रहा, लेकिन लड़कियां 91% तक परिणाम देने में कामयाब हो सकी हैं।


उदयपुर

परिणाम विश्लेषण : 89.32% के साथ मुख्यालय वाला उदयपुर संभाग में तीसरे नंबर पर

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने मंगलवार को 12वीं आर्ट्स का रिजल्ट घोषित किया। गत वर्ष के मुकाबले उदयपुर 2.55 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ एक पायदान चढ़कर 24वें स्थान पर रहा। जबकि इस साल के रिजल्ट में 22 जिलों में 90 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थी पास हुए। संभाग में उदयपुर तीसरे स्थान पर रहा। चित्तौड़ का 94.65 और राजसमंद का 93.79 प्रतिशत के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।

6 वर्षों से 90 फीसदी से कम ही रहा है जिले का रिजल्ट : 6 साल में रिजल्ट में 10 फीसदी सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद अभी भी यह 90 फीसदी से कम ही है। 6 वर्षों के परिणाम की तुलना करें तो इस साल करीब 10.27 फीसदी रिजल्ट सुधार आया है। छात्रों के रिजल्ट में 12 फीसदी से ज्यादा तो छात्राओं का रिजल्ट 8.33 फीसदी सुधरा है।

कुराबड़ ब्लॉक में 20 से ज्यादा स्कूलों का 100 फीसदी रिजल्ट

शहर में सेक्टर 11 बालिका स्कूल, सेक्टर 4 बालिका स्कूल और कंवरपदा के अलावा कुराबड़ ब्लॉक में 26 में से 21 स्कूलों में 100 फीसदी रिजल्ट हासिल किया। राजकीय फतह उच्च माध्यमिक विद्यालय का परिणाम 95.96 फीसदी और जगदीश चौक बालिका स्कूल का रिजल्ट 98.43 प्रतिशत रहा है।


बीकानेर

बेटों से 5.75 फीसदी बेटियां आगे, साइंसकाॅमर्स रिजल्ट भी पिछले साल से ज्यादा

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर ने मंगलवार को आर्ट्स वर्ग का रिजल्ट घोषित किया। साइंसकॉमर्स के बाद आर्ट्स में भी बेटियों का दबदबा रहा है। आर्ट्स में छात्राओं का परीक्षा परिणाम 94.62% रहा, जो छात्रों के मुकाबले 5.75 % अधिक है। 9779 छात्राएं परीक्षा में शामिल हुईं, जिसमें 9253 सफल रहीं। 12005 छात्रों में से 10669 उत्तीर्ण हुए। 94.62 प्रतिशत छात्राएं और 88.87 प्रतिशत छात्र सफल रहे।

जिले का परीक्षा परिणाम इस बार 91.45 प्रतिशत रहा। ओवरऑल रिजल्ट पिछले साल के मुकाबले 3.91 प्रतिशत बढ़ा है। बीकानेर प्रदेश में 20वें से 15वें पायदान पर पहुंच गया है। जबकि संभाग में पहले नंबर पर है। संभाग के श्रीगंगानगर का परिणाम 91.16 प्रतिशत और हनुमानगढ़ का 90.91 प्रतिशत रहा।

19 हजार 922 स्टूडेंट्स सफल रहे

12005 छात्र 5065 फर्स्ट डिविजन 4814 सैकंड डिविजन 786 थर्ड डिविजन 4 पास 9779 छात्राएं 6195 फर्स्ट डिवीजन 2765 सैकंड डिवीजन 292 थर्ड डिवीजन 1 पास

और संभाग में बीकानेर अव्वल

91.45% बीकानेर 91.16% श्रीगंगानगर 90.91% हनुमानगढ़

विज्ञान व वाणिज्य के साथ ही कला वर्ग का परीक्षा परिणाम भी पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहा है। परिणाम में 3.91 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है।

भूपसिंह तिवारी, एडीईओ शैक्षणिक, माध्यमिक


भीलवाड़ा

ओवरऑल नतीजा 92.28 फीसदीबेटों का 90.62 बेटियों का 93.87% रहा, कला ऐसा संकाय जिसमें छात्रों से 358 छात्राएं ज्यादा हैं

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर ने 12वीं कला का रिजल्ट मंगलवार को जारी कर दिया। कला वर्ग में भीलवाड़ा का रिजल्ट 92.28 प्रतिशत के साथ प्रदेश में 11वां स्थान रहा है। साइंस व काॅमर्स संकाय की तरह बेटियों का रिजल्ट बेटों से बेहतर रहा है।

बेटियों का रिजल्ट 93.87% और बेटों का रिजल्ट 90.62% प्रतिशत रहा है। ओवरऑल छात्राें से अधिक छात्राएं पास हुई हैं। छात्राओं ने अधिक संख्या में प्रथम श्रेणी में पास होकर नाम रोशन किया है। छात्रों के मुकाबले छात्राएं कम संख्या में द्वितीय और तृतीय श्रेणी में पास हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले भीलवाड़ा के रिजल्ट में सिर्फ 0.34 प्रतिशत का अंतर आया है, लेकिन जिले की रैंक प्रदेश में दूसरे से गिरकर 11 वें पर आ गई है।


राजसमंद

बेटियों ने मारी बाजी : प्रदेश में टॉप फाइव में राजसमंद, दूध बेचने वाले, ऑटो चालक, होटल में कुक की बेटियां टॉपर

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कला का परीक्षा परिणाम मंगलवार को जारी किया। आठ साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस बार जिले का परीक्षा परिणाम 93.79 प्रतिशत रहा। इससे पहले वर्ष 2017-18 में सर्वाधिक 92.2 प्रतिशत परिणाम रहा था।

प्रदेश में भी हमारी रैंकिंग में सुधार होकर राजसमंद जिला आठवें से पांचवें स्थान पर पहुंच गया। प्रदेश में टॉप फाइव में राजसमंद ने जगह बनाई है। इस बार भी बेटियों ने परिणाम में बाजी मारी है। छात्रों का पासिंग प्रतिशत 91.86 रहा। छात्राओं का पासिंग प्रतिशत 95.64 रहा। जो छात्रों के मुकाबले 4.78 प्रतिशत ज्यादा है।

आमेट बालिका, धायला, बागोल ऐसे स्कूल, जहां से 2-2 लड़कियां 90 से ज्यादा अंक लाई है। परिणाम में ग्रामीण क्षेत्र का दबदबा ज्यादा रहा है। दूध बेचने वाले, ऑटो चालक, होटल में कुक की बेटियों ने टॉप किया है। इस बार जिले के राउमावि बीकावास का परीक्षा परिणाम जिले में सबसे कम 29.67 प्रतिशत रहा।

राजसमंद प्रदेश में टॉप फाइव में आया : इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में राजसमंद ने प्रदेश की टॉप फाइव में जगह बनाई है। जबकि 2017-18 में 92.2 प्रतिशत के साथ राजसमंद प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा था। साल 2018-19 में 90.26 प्रतिशत के साथ प्रदेश में आठवें स्थान पर रहा।

गत साल की तुलना में इस बार परीक्षा परिणाम में 3.53 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आठ साल के 12वीं कला वर्ग का रिकॉर्ड तोड़ दिया। वर्ष 2016-17 में कला संकाय का बोर्ड परीक्षा परिणाम 86.99 प्रतिशत रहा था। 2017-18 में 6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होकर 92.2 प्रतिशत रहा था।

इस बार कुल सात हजार 709 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से सात हजार 230 छात्रछात्राएं पास हुए हैं। प्रथम श्रेणी में तीन हजार 394, द्वितीय में तीन हजार 458, तृतीय में 378 पास हुए। कुल तीन हजार 784 छात्रों ने परीक्षा दी। इनमें से कुल एक हजार 354 प्रथम, एक हजार 861 द्वितीय, 261 तृतीय श्रेणी से पास हुए।

छात्रों का पासिंग प्रतिशत 91.86 रहा। जबकि परीक्षा में तीन हजार 925 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इनमें से कुल तीन हजार 754 पास हुईं। प्रथम श्रेणी में दो हजार 40, द्वितीय श्रेणी में एक हजार 597, तृतीय श्रेणी में 117 छात्राएं पास हुईं। छात्राओं का पासिंग प्रतिशत 95.64 रहा। जो छात्रों के मुकाबले 4.78 प्रतिशत ज्यादा है।

ऑटो चालक की बेटी ने स्कूल में दूसरा स्थान प्राप्त किया

राउमावि धांयला की छात्रा आशा कुंवर पुत्री कालूसिंह पड़ियार 12वीं कला में 91.6 प्रतिशत अंक लाकर धांयला स्कूल में दूसरे स्थान पर रहीं। आशा के पिता गुड़ला से नाथद्वारा के बीच ऑटो चलाकर परिवार का पालनपोषण करते हैं। आशा का सपना टीचर बनना है। उसकी मां फूल कुंवर गृहिणी हैं। आशा के चार भाई बहन है।

ट्रक चालक की बेटी ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए

राउमावि बागोल की छात्रा संतू पुत्री निर्भय सिंह राठौड़ 90.60 प्रतिशत अंक लाई है। वह टीचर बनना चाहती है। संतू के पिता निर्भय सिंह पेशे से ट्रक चालक हैं। मां का डेढ़ साल पूर्व निधन हो गया। मां के निधन के बाद संतू अपने ननिहाल परावल चली गई। परावल से बागोल तीन किमी रोजाना अपडाउन करके पढ़ने के लिए आती थी।

होटल में कुक की बेटी ने स्कूल टॉप किया

राउमावि बागोल की छात्रा सपना कुंवर पुत्री रूप सिंह चूंड़ावत ने 12वीं कला में 92.60 प्रतिशत अंक लाकर स्कूल टॉप किया है। सपना कुंवर टीचर बनना चाहती है। उसके पिता नाथद्वारा की एक होटल में कुकिंग करते हैं। जबकि मां धापू कुंवर गृहिणी हैं।

पेंटर के बेटे ने स्कूल टॉप किया

राउमावि लांबोड़ी के छात्र लक्ष्मण सिंह पुत्र किशन सिंह दसाणा के 12वीं कला में 90.80 अंक आए हैं। लक्ष्मण सिंह टीचर बनना चाहता है। उसके पिता पेंटर है। मां झमकू बाई गृहिणी हैं। तीन भाइयों में से लक्ष्मण सबसे छोटा है। जबकि दोनों भाई मुंबई में व्यवसाय करते हैं। लक्ष्मण का क्रिकेट में शौक है।

एलआईसी अभिकर्ता की बेटी आरएएस बनना चाहती है

राउमावि झालों की मदार की छात्रा लोचन पुत्री रमेश चंद्र तेली के 90 प्रतिशत अंक आए हैं। लोचन आरएएस बनना चाहती है। उसके पिता रमेश चंद्र पेशे से एलआईसी अभिकर्ता है। मां लता देवी तेली गृहिणी हैं। तीन भाईबहन हैं। उसने झालों की मदारा स्कूल टॉप किया है। उसने इस उपलब्धि का श्रेय स्कूल के अध्यापकों तथा परिवारवालों को दिया है।


जालोर

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से मंगलवार को जारी बारहवीं कक्षा के कला वर्ग के परिणाम में जालोर जिले ने प्रदेश में परचम लहरा दिया। जयपुर, कोटा, सीकर जैसे एजुकेशन हब कहलाने वाले शहरों को पीछे छाेड़ते हुए जालाेर ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा परिणाम में जालोर जिले का परिणाम 94.79 प्रतिशत रहा। हालांकि इससे पहले कला वर्ग में जालोर कभी भी प्रथम स्थान पर नहीं रहा हैं।

2019 के परीक्षा परिणाम में जालाेर जिला की प्रदेश में 7वीं रैंक थी, इस बार छह रैंक की छलांग लगाते हुए पहला स्थान हासिल किया है। हालांकि इससे पहले 2017 के कला वर्ग के परीक्षा परिणाम में जालोर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल कर चुका है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी जिले के सभी विद्यालयों को इस उपलब्धि पर बधाई दी।

पिछले कुछ सालों में शैक्षिक स्तर में आया सुधार

एक समय था जिसमें जालोर शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े जिलों की सूची में शामिल रहा हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से जिला शिक्षा के क्षेत्र में ऊंचाई छू रहा हैं। 2018-19 सत्र के दौरान जालोर ने 12वीं विज्ञान वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया था, वहीं इस सत्र में कला वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया।

95.71% परिणाम के साथ बेटियां रही आगे, बेटों का प्रतिशत 94.13

कला वर्ग के परिणाम में भी इस बार बेटियों ने बाजी मारी। जिले में बेटियों का परीक्षा परिणाम 95.71 प्रतिशत रहा, जबकि बेटोंं का 94.13 प्रतिशत रहा। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मोहनलाल परिहार ने बताया परीक्षा परिणाम में 3679 छात्र प्रथम श्रेणी में, 2730 द्वितीय श्रेणी एवं 369 तृतीय श्रेणी में तथा छात्रा वर्ग में 3111 प्रथम श्रेणी, 1736 द्वितीय श्रेणी एवं 174 छात्राएं तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुई हैं। जिले के सरकारी विद्यालयों ने भी वाणिज्य व विज्ञान वर्ग के मुताबिक अच्छा परीक्षा परिणाम दिया। जिले के कई सरकारी विद्यालयों का कला वर्ग का परिणाम 100 प्रतिशत रहा।

सभी के सहयोग से पहले स्थान पर रहे

जिले के सभी विद्यालयों के स्टाफ द्वारा नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग के चलते जालाेर जिले ने कला वर्ग के परिणाम में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह जिले के लिए गर्व की बात है। इसके लिए सभी विद्यालयों का स्टाफ बधाई का पात्र है। मोहनलाल परिहार, एडीईओ, जालाेर

अनिल को 97.40% तो अनुसुइया काे मिले 95.40 फीसदी अंक

क्षेत्र के मीरपुरा निवासी किसान लाडूराम विश्रोई के बेटे अनिल विश्रोई ने 97.40 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है। अनिल दोपहर को करीब चार बजे के आसपास खेत में अपनी माता के साथ बाजरी में खरपतवार का कार्य कर रहा था।

इस दौरान जहां यह अध्ययनरत है जो कोटड़ा के पातालेश्वर पब्लिक स्कूल के संचालक भजनलाल गुरु घर पर मिठाई लेकर अनिल को बधाई देने पहुंचे तो एक बार ताे उनके मातापिता को विश्वास भी नहीं हुआ। इसके बाद मां की आखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

अनिल शुरू से ही होनहार है। पिता किसान होने के चलते पढ़ाई के साथसाथ घर के काम में भी मदद करता रहता है। अनिल ने बताया कि वो स्कूल के अलावा 6 से 8 घंटे तक लगातार पढ़ाई करता था और कक्षा छह से लेकर अब तक कोटड़ा के पातालेश्वर विद्यालय में ही अध्ययनरत रहा।

इसी तरह सांचौर के निकटवर्ती कुड़ा की बेटी ने 12 वीं कला वर्ग में 95.40 अंक अर्जित हासिल किए। जानकारी के अनुसार छप्पर में रहकर अनुसूइया घर में मातापिता के कार्य में भी हाथ बंटाती है। पिता अर्जुनराम मेघवाल मजदूरी करते हैं जो कलर व खाट बनाने का काम करते हैं।


पाली

12वीं कला वर्ग के परिणाम में पाली ने इतिहास दोहराते हुए लगातार दूसरे साल शीर्ष 5 जिलों में जगह बनाई

शहर के मधुरम स्कूल में पढ़ने वाली ज्‍योति ने विपरीत परिस्थितियों के बाद भी बारहवीं कला वर्ग में 91.40 फीसदी अंक प्राप्त कर परिवार का नाम रोशन किया है। ज्‍योति के पिता फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। वहीं, ज्‍योति खुद भी मां के साथ साड़ी फॉल का काम करने में मदद करती है। स्कूल से आते ही अपने मां के साथ कार्य में जुट जाती है।

पंचम नगर में रहने वाली ज्‍योति बताती है कि आगे जाकर वह प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं। किराएं के मकान में रहने के बाद भी ज्‍योति को स्कूल से भी काफी मदद मिली। स्कूल प्रबंधन ने भी ज्‍योति की मदद की। ज्‍योति को स्कूल समय के बाद जितना भी समय मिलता था। उस समय वह घर के काम में भी आगे रहती।

बिना ट्यूशन गए खुद पढ़ाई कर पाया मुकाम

राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल इंद्रवाड़ा की दिलखुश कुमारी ने 12वीं में 92.80 फीसदी अंक प्राप्त किए। खुशबू ने खुद पढ़ाई की। वह 10वीं में भी 85 फीसदी से ज्यादा अंक लाई थी। खुशबू ने बताया कि उसके पिता मिश्रीलाल, माता पाेकरी देवी व गुरुजनों का आशीर्वाद रहा।

रोजाना साइकिल से 3 किलोमीटर का सफर कर पहुंचती थी स्कूल

निमाज कस्बे की गायत्री कुमावत पुत्री शंकर कुमावत ने कक्षा 12 के कला वर्ग में 93.6 प्रतिशत अंक लाकर निमाज कस्बे का नाम रोशन किया। गायत्री कुमावत ने बताया कि कस्बे के सरकारी विद्यालय में अध्ययन करने के लिए रोजाना 3 किलोमीटर साइकिल पर सफर कर कस्बे के भगवान महावीर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पहुंचती थी।

पिता मजदूरी के सिलसिले में कस्बे के बाहर रहते हैं, गायत्री ने पूरे वर्ष भर बिना कोचिंग किए घर पर ही स्वयं 6 घंटे पढ़ाई की साथ ही साथ घर के कामों में भी अपनी मां का हाथ बंटाती थी। एक वर्ष तक मोबाइल एवं टीवी से दूरी बनाकर पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा दादादादी एवं मां के साथ रहकर मुकाम को हासिल किया।