शिक्षा में खो गई डूंगरपुर की सिद्धियां

shala shidhi yojna

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजना ‘शाला सिद्धि योजना’ स्कूलों में पर्याप्त स्टॉफ नहीं होने से पहले ही वर्ष में दम तोड़ रही है।

डूंगरपुर। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजना ‘शाला सिद्धि योजना’ स्कूलों में पर्याप्त स्टॉफ नहीं होने से पहले ही वर्ष में दम तोड़ रही है। गैर शैक्षिक कार्यों के बोझ तले दबी राजकीय शिक्षण संस्थाएं शाला दर्पण और शाला दर्शन बेव पोर्टल की ऑनलाइन फीडिंग से ही उभर नहीं पाई है और शाला सिद्धि नई योजना ने विद्यालयों में शिक्षण कार्य बस्तों में बंद करवा दिया है। विभागीय नोटिसों एवं कार्रवाई के डर के चलते संस्थाप्रधान मजबूरी में परीक्षा के दिनों में शिक्षकों को शिक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य नहीं करवा कर शाला की सिद्धियां प्राप्त करने में खपा रहे हैं। हालात यह है कि तमाम प्रयासों के बावजूद ऑनलाइन फीडिंग में वागड़ का डूंगरपुर जिला शैक्षिक सत्र के उतर्राद्र्ध में लाल घेरे में आ गया है।

सिद्धि का यह है उद्देश्य

केन्द्र सरकार का शाला सिद्धि योजना के पीछे ध्येय है कि अब तक शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में किए गए विभिन्न प्रयासों को एकीकृत कर इन्हें सुनियोजित रुप से क्रियान्वयन किया जाए। इससे विद्यालय की अकादमिक एवं सह-अकादमिक क्रियाओं से विद्यार्थियों को भयमुक्त एवं आनन्ददायी वातावरण में सीखने के सुअवसर मिल सके। प्रत्येक विद्यार्थी अपनी आयु के अनुरुप निर्धारित दक्षताएं एवं कौशल अर्जित कर सके।

पढ़ाए या फीडिंग करें..

शाला सिद्धि योजना में न्यून ऑनलाइन फीडिंग पर केन्द्र से निदेशालय एवं निदेशालय से जिला शिक्षा अधिकारियों पर दबाव है। ऐसे में संस्थाप्रधानों को हर हाल में अप्रेल माह में शाला सिद्धि पोर्टल पर समस्त सात चरणों की फीडिंग करने के निर्देश दिए हैं। पर, अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। वहीं, कई स्कूलों में नेट, कम्प्यूटर आदि की सुविधाएं नहीं हंै। ऐसे में यह कार्य अधरझूल में लटका हुआ है। साथ ही कई संस्थाप्रधानों ने सात चरणों से जुड़े फीडिंग कार्य में दो से तीन चरण ही पूर्ण किए हैं।

शाला सिद्धि : स्कूल की जन्म-कुण्डली

शाला सिद्धि ऑनलाइन फीडिंग में सात सात चरण है। प्रत्येक आयाम के लिए लिए अलग-अलग मापदण्ड तय किए हैं। शाला में उपलब्ध संसाधन, उनकी उपलब्धता, पर्याप्तता, उपयोगिता, सीखना-सिखाना और आंकलन, विद्यार्थियों की प्रगति, उपलब्धि और विकास, शिक्षकों का कार्य-प्रदर्शन और उनका व्यावसायिक उन्नयन, शाला नेतृत्व और शाला प्रबंधन, स्वास्थ्य और सुरक्षा सहित समुदाय की सहभागिता आदि बिन्दुओं को शामिल किया है।

खास बातें

जिले के 73 मावि एवं 250 उमावि को भी करनी है प्रविष्टियां
उत्कृष्ट विद्यालय भी है घेरे में
प्रदेश में कुल 30 हजार 739 स्कूलों को करनी है ऑनलाइन फीडिंग
अब तक 9 हजार 124 स्कूलों ने ही किया है कार्य

अधिकारी ने कहा…

फीडिंग कार्य बहुत कम हुआ है। संस्थाप्रधानों को निर्देशित करेंगे कि वह जल्द से जल्द कार्य पूर्ण करें।

-अनोपसिंह सिसोदिया, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक