बीकानेर। राजस्थान के एक राजकीय शिक्षक भीमाराम भील के आत्महत्या करने के बाद सोशल मीडिया पर आउटरेज हो गया है। एक ओर जहां प्रशासन इसे पुत्र और पुत्री के विवाह के लिए अवकाश नहीं मिलने के कारण बता रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर शिक्षकों को गैर शिक्षण कार्यों में लगाए के कारण उपजे तनाव को कारण बताकर सरकार की भर्त्सना की जा रही है।
शिक्षकों ने इसे प्रशासन के तुगलकी आदेशों का परिणाम बताया है, कुछ शिक्षक इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं। यही नहीं कुछ शिक्षकों ने तो शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों तक को निशाने पर लिया है। शिक्षकों के अनुसार राजकीय कर्मचारी होने के कारण उन्हें तय शिक्षण कार्य के अतिरिक्त भेड़ बकरी की तरह किसी भी तरह के सार्वजनिक कार्य में झोंक दिया जाता है, चाहे वह कार्य शिक्षण कार्य से संबंधित हो या न हो।
करीब सवा लाख शिक्षक सदस्यों वाले प्राइवेट फेसबुक समूह Education News Group में तो शिक्षकों का गुस्सा चरम पर दिखाई दे रहा है।
गैरशिक्षण कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का पिछले कुछ अर्से से लगातार विरोध होता रहा है, कोविड संकट के दौरान भी शिक्षकों की ऐसे कार्यों में ड्यूटी लगाई जा रही है, जहां गैरजरूरी है, इसी दौरान 2018 से अपने शिक्षण कार्य के अतिरिक्त बीएलओ की ड्यूटी कर रहे शिक्षक की कोविड-19 के तहत भी लगातार ड्यूटी लग रही थी।
गौरतलब है कि 15 जून को ही शिक्षक के पुत्र और पुत्री दोनों के विवाह की तारीख तय थी, इससे मात्र दस दिन पहले शिक्षक द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने से शिक्षकों में आक्रोश तेजी से पनपा है।
पिछले दिनों शिक्षकों और शिक्षक संगठनों के विरोध के चलते राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर शिक्षकों को गैरशिक्षण कार्यों में नहीं लगाए जाने के निर्देश दिए थे और इन आदेशों का सख्ती से पालने करने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद शिक्षकों को गैर शिक्षण कार्यों में लगाए जाने के आदेश स्थानीय विभिन्न जिलों में स्थानीय प्रशासन एवं खुद शिक्षा विभागीय अधिकारियों द्वारा जारी किए जा रहे हैं।
खुद शिक्षामंत्री ने ऐसे एक आदेश को निरस्त करवाकर दो शिक्षकों को गैरशिक्षण कार्य से मुक्त कराया था, इसके बावजूद भी शिक्षकों को लगातार गैरशिक्षण कार्यों में झोंका जा रहा है, जबकि नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत धारा 27 में वर्णित कार्यों से इतर गैर शिक्षण कार्यों में शिक्षकों को नहीं लगाए जाने का प्रावधान है।