सॉफ्टवेयर में कमी, हिंदी में अभ्यर्थी का पूरा नाम नहीं आ रहा

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आरएएस 2018

अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा इन दिनों आरएएस 2018 के ऑन लाइन आवेदन भराए जा रहे हैं। ऑन लाइन आवेदन में अभ्यर्थियों के हिंदी में कुछ विशेष नाम नहीं भरे जा रहे हैं। सॉफ्टवेयर की इस गड़बड़ी को देखते हुए अब अभ्यर्थियों को यह डर सताने लगा है कि कहीं उनके फार्म रिजेक्ट नहीं हो जाएं।

जयपुर समेत कई जिलों में मिली शिकायत

– जयपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से इस संबंध में शिकायत मिली हैं। आरएएस 2018 में ऑन लाइन आवेदन में आयोग द्वारा अभ्यर्थी का नाम अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी भरना अनिवार्य किया गया है।

– अभ्यर्थियों का कहना है कि हिंदी में कुछ नाम ऑन लाइन आवेदन में भरे ही नहीं जा रहे हैं। अभ्यर्थी अजय आदि का कहना है कि जब धर्मेंद्र का नाम भरते हैं, तो वह नहीं भरा जा रहा। इसी प्रकार से आने वाले नाम भी सॉफ्टवेयर की कमी के चलते नहीं भरे जा रहे हैं।

– श्रीवास्तव, श्रेया, श्रेयांश समेत विभिन्न नाम या ज्ञ से शुरू होने वाले नाम, आदि नहीं भरे जा रहे हैं।

– अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने कोई घटिया सॉफ्टवेयर ऑन लाइन आवेदन में उपयोग में लिया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों काे ही परेशानी हो रही है।

फार्म रिजेक्ट नहीं हो जाए

– अभ्यर्थियों का कहना है कि ऑन लाइन आवेदन जैसे तैसे भर रहे हैं, लेकिन हिंदी में नाम पूरा नहीं होने से उन्हें डर सता रहा है कि आयोग कहीं उनके फार्म रिजेक्ट नहीं कर दे। अभ्यर्थियों ने आयोग से इस मामले में मार्गदर्शन की मांग की है।

980 पदों पर भर्ती के लिए भरे जा रहे हैं ऑन लाइन आवेदन

आयोग द्वारा आरएएस 2018 के कुल 980 पदों के लिए इन दिनों ऑन लाइन आवेदन भराए जा रहे हैं। इसके लिए 11 मई अंतिम तिथि है।

छात्रवृत्ति न मिलने से बीपीएल विद्यार्थी परीक्षा से रहा वंचित

सरकार गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा में आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाओं से लाभांवित करती है। वहीं सरकारी नुमाईंदों की लापरवाही व मनमर्जी से एक बीपीएल परिवार में चयनित विद्यार्थी का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। समाज कल्याण विभाग के रिकार्ड में छात्र की छात्रवृति स्वीकृत होने के बाद भी चेक को रोककर पिछले दो वर्ष से चक्कर लगवा रहे हैं। विभाग की मनमर्जी से पढ़ाई से वंचित होना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर समस्या बताई और कार्रवाई होने का जवाब भी मिला, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

जोबनेर में बबेरवालों की ढाणी निवासी निर्मल कुमावत पुत्र मदनलाल बीपीएल में चयनित है। निर्मल कक्षा 12वीं पास करने के बाद सत्र 2013-14 में बी फार्मसी कोर्स करने के लिए जयपुर की महर्षि अरविंद काॅलेज में प्रवेश लिया। इस सत्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा 12 हजार रुपए की राशि स्वीकृत होने पर फीस जमा कर परीक्षा दे दी। सत्र 2014-15 में छात्रवृति के लिए आवेदन किया और 37 हजार 20 रुपए की छात्रवृति स्वीकृत हुई, लेकिन समाज कल्याण विभाग के अधिकारी बिना कारण बताए चेक को रोके हुए हैं। इससे स्कूल की फीस जमा नहीं हो पा रही। विभाग के बार-बार चक्कर लगाने पर भी स्वीकृत छात्रवृति का चेक नहीं देना समाज कल्याण विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े करने वाला है। वहीं विभाग की मनमर्जी के चलते कॉलेज की फीस जमा नहीं होने से कॉलेज प्रशासन बिना फीस जमा कराए परीक्षा में नहीं बैठने दिया। इस सत्र को शुरू होने पर छात्रवृति को लेने की कोशिश की, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की मनमर्जी के चलते एक गरीब विद्यार्थी का पिछले दो वर्ष से परीक्षा नहीं दे पाने से भविष्य दांव पर लगा हुआ है। विद्यार्थी आगे पढ़कर अपने पैरों पर खड़ा होने का सपना पाले हुए था, वो धूमिल होता नजर आ रहा है। पीडित विद्यार्थी निर्मल कुमावत ने बताया कि राशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन उसे चेक नहीं दिया जा रहा और न ही कोई कारण बताया जा रहा है।