घरेलू काम करने वाली महिलाओं की बेटियों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया

Village school

8 हजार को बनाया साक्षर

प्रतापगढ़। आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने के लिए दो महिलाएं अपने स्तर पर पिछले कई सालों से प्रयास कर रही हैं। इनमें एक बालिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए उन्हें पिछले 35 सालों से नि:शुल्क कोचिंग (Tasks to teach) दे रही है तो एक कच्ची बस्ती के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में लगी हुई है।

बालिकाओं में शिक्षा के पिछड़े स्तर को देखते हुए शहर के सदर बाजार इलाके में रहने वाली नूतन भट्ट ने बेटियों को पढ़ाई के क्षेत्र में आने लाने का जिम्मा उठाया और निशुल्क शिक्षा देकर बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ सरकारी सेवाओं में जाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। पिछले 35 बरस से बेटियों को नि:शुल्क कोचिंग दे रही नूतन की पढ़ाई हुई बेटियां आज विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। नूतन ने शुरुआत आसपास व अपने यहां घरेलू काम करने वाली महिला की बेटी को पढ़ाने से की। अब तक भट्ट लगभग 7 से 8 हजार बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा दे चुकी हैं। उस समय से शुरू हुआ यह क्रम 60 वर्ष की उम्र में आज भी जारी है।

नूतन भट्ट ने बताया कि करीब 40 साल पहले वह गुजरात से पति के साथ प्रतापगढ़ रहने आई थी। उस समय यहां का परिवेश अलग था और बालिका शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं देता था। घर पर खाली बैठने के बजाय बालिकाओं को शिक्षा देकर उन्हें आगे लाने के लिए शहर के एक स्कूल में 5वीं तक के बच्चों को पढ़ाने के साथ ही घर पर ही बालिकाओं को नि:शुल्क कोचिंग देना शुरू किया। नूतन भट्ट को शिक्षा, योग, कुकिंग, सिलाई-कढ़ाई और काउंसलिंग में अच्छा अनुभव है। उन्होंने करीब 300 महिलाओं को उद्यमी बनाया है। उसके बाद हेल्प संस्थान से जुड़कर प्रतापगढ़ में महिला उत्पीड़न, नागरिक संरक्षण जैसे कई सामाजिक कार्यों में सहयोग किया। वे कक्षा पहली से लेकर 9 वीं तक की बालिकाओं को प्रतिदिन दो घंटे सभी विषयों की नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ा रही हैं। बोर्ड परीक्षा के समय 10वीं की बालिकाओं को गणित की ट्यूशन देती हैं।