दो विभागों की लापरवाही से भटक रही राज्य वरीयता में आई छात्रा

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बांसवाड़ा। जिले के गनोड़ा स्थित सरकारी वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल से 12वीं के इम्तिहान में राज्य वरीयता सूची में दूसरे नंबर पर आई छात्रा निशी पंड्या कई दिनों से स्कूटी के लिए भटक रही है। पद्‌माक्षी अवार्ड प्राप्त इस छात्रा के लिए स्कूटी आवंटित तो हुई है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा वितरण के लिए से कोई फीडबैक नहीं मिलना बताकर सुस्ताया हुआ है। दूसरी ओर, संस्कृत शिक्षा विभाग यह कहकर अनभिज्ञता जता रहा है कि जिलों में अवार्ड हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को नोडल डीईओ माध्यमिक ही सम्मानित और लाभान्वित करते हैं, लिहाजा उनकी जिम्मेदारी है। कुल मिलाकर दोनों विभागों के सामंजस्य के अभाव में निशी के लिए आई स्कूटी शहर के एक शो-रूम पर पड़ी है और परिजन इसके लिए शिक्षा विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।

माध्यमिक शिक्षा अधिकारी वाकिफ लेकिन कार्रवाई से परे, संस्कृत शिक्षा विभाग ने जताई अनभिज्ञता

पद्‌माक्षी पुरस्कार के लिए बुलाया था जयपुर, घाटोल में दिया था लैपटॉप

अभी उदयपुर में निम्बार्क शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान से एसटीसी कर रही अखेपानजी का गढ़ा निवासी निशी ने वर्ष 2017 में बोर्ड की वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा में 90 फीसदी अंक प्राप्त किए। निशी के पिता अजीत पंड्या ने बताया कि राज्यस्तरीय वरीयता सूची में दूसरे नंबर पर आने पर निशी को जयपुर में आयोजित समारोह में आमंत्रित कर पद‌माक्षी अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही एक लाख रुपए, संस्कृत शिक्षा विभाग की पत्रिका श्रावणी की प्रति और प्रमाण पत्र दिया गया। श्रावणी में प्रकाशित राज्य वरीयता सूची में अव्वल आए छात्र ललित पाटीदार के बाद निशी का नाम है। दाेनों सहपाठी रहे। यह दस्तावेज उसने बांसवाड़ा के डीईओ माध्यमिक कार्यालय में दिखाई, तो शैक्षिक प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि निशी के लिए स्कूटी आई है, लेकिन लिखित आदेश नहीं होने से वह शो-रूम से उठवाई नहीं जा सकी। जिला स्तर पर सात छात्राअों को स्कूटी वितरण 31 मार्च को मंत्री धनसिंह रावत के हाथों इंजीनियरिंग कॉलेज में हो चुका है।

संस्कृत शिक्षा विभाग ने भी खड़े किए हाथ, छात्रा से मंगवाया प्रमाण पत्र

संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी, उदयपुर डाॅ. महेश शर्मा के अनुसार निशी को पद्‌माक्षी अवार्ड जयपुर में मिला। लेपटॉप भी घाटोल में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ही दिलवाया। अवार्ड संबंधित नोडल हर जिले में डीईओ माध्यमिक ही हैं, तो इस बेटी के लिए आई स्कूटी उन्हें दिलवानी चाहिए। हमारे पास अधिकृत जानकारी ही नहीं है। अब बच्ची से प्रमाण पत्र मंगवाकर निदेशालय को पत्र लिखेंगे और कार्रवाई करवाएंगे।

हमारे पास निशी पंड्या को स्कूटी देने के लिए कोई लिखित आदेश नहीं आया। जिला स्तर पर अवार्ड के लिए जिन छात्राओं की सूची आई, उन्हें बांट दिए गए हैं। निशी का उसमें नाम नहीं था। एक स्कूटी पड़ी है। वह निशी के लिए होने की पुष्टि पर दिलवाएंगे।

-आरपी द्विवेदी, डीईओ माध्यमिक बांसवाड़ा