येे सरकारी स्कूल पैमाने से चार गुना ज्यादा योग्य

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फिर भी नहीं हुआ प्रमोट

उत्कृष्ट विद्यालय की श्रेणी का है करेल उप्रा विद्यालय, विधायक ने लगाया राजनीतिक भेदभाव का आरोप

फलासिया। प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ उत्कृष्ठ विद्यालय फलासिया का करेल उच्च प्राथमिक विद्यालय। शहरी प्राइवेट स्कूलों से कई ज्यादा योग्यताएं और व्यवस्थाएं रखता है यह स्कूल। सीसीटीवी कैमरों की जद में प्रोजेक्टर से पढ़ाई होती है यहां। यहां पढऩे वाले बच्चों की संख्या भी छह सौ से अधिक है। यहां के बच्चे पढ़ाई और खेल में भी राज्यस्तर पर पहचान बनाए हुए हैं। इसके बावजूद विद्यालय का नाम क्रमोन्नत स्कूलों की लिस्ट में नहीं था। वजह किसी के पास नहीं। हाल ही में सरकार ने प्रदेशभर के 225 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक में क्रमोन्नत किया। क्रमोन्नत 225 विद्यालयों में 25 उदयपुर जिले के हैं। जिले का एक स्कूल ऐसा है, जो सही मायने में क्रमोन्नत होने की योग्यता रखता है, लेकिन उसे क्रमोन्नत नहीं किया गया। क्रमोन्नयन के लिए तय मापदण्डों से चार गुना अधिक योग्यता रखने वाले विद्यालय को भी क्रमोन्नत नहीं करना समझ से परे है। कारण कुछ भी रहा हो, लेकिन मसले को लेकर क्षेत्रीय विधायक ने सरकार पर राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगाया है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी भेदभाव को नकारते हुए फिर से प्रस्ताव मांग रहे हैं।

साठ साल पुराना विद्यालय

सन् 1959 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में प्रारंभ हुए इस विद्यालय का क्रमोन्नयन सन् 1979 में उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुआ। वर्ष 2012 से इस विद्यालय में प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई शुरू हुई। इसके बाद 2014 में विद्यालय प्रबंधन ने पूरे स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगवाए, जिससे शिक्षक और विद्यार्थियों की गतिविधियों में बेहतर सुधार हुआ।

परिणाम भी बेहतर

विद्यालय में वर्ष 2001 से 2010 के बीच आठवीं बोर्ड परीक्षा में पांच बार शत प्रतिशत तो चार बार 95 प्रतिशत से ज्यादा परिणाम रहा। इसी कारण विद्यालय से बीस किलोमीटर दूर के गांवों से भी बच्चे पढऩे आते हैं। भामाशाहों के सहयोग से यहां सुविधाएं भी काफी जुटाई गई। पेयजल के लिए नलकूप, लगातार बिजली के लिए इन्वर्टर-जनरेटर की भी व्यवस्था है।

खेल में भी आगे

ये स्कूल एथलेटिक्स में 11 बार, अन्य खेल में 6 बार जिला स्तर पर चैम्पियन बन चुका है। इसके अलावा 12 बार ब्लॉक स्तर पर चैम्पियन रह चुका है। अब तक 125 से भी ज्यादा विद्यार्थी विभिन्न खेलों में राज्य स्तर पर जा चुके हैं। गत वर्ष भी 16 विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तर के लिए हुआ था।

अफसरों का बेतुका तर्क

विभागीय अधिकारी पंचायत मुख्यालय के विद्यालय को ही क्रमोन्नत करने की बात कर रहे हैं, जबकि झाड़ोल की ही नेनबारा पंचायत के सेरा विद्यालय को 225 स्कूलों की सूची में शामिल किया गया, जबकि नेनबारा में पहले से ही माध्यमिक विद्यालय संचालित है।

शिक्षा से भी सौतेला व्यवहार

प्रदेश का श्रेष्ठ स्कूल क्रमोन्नत होने से वंचित रहने में विभागीय लापरवाही मूल कारण नहीं है। अधिकारी भाजपानीत सरकार के दबाव में क्षेत्र के साथ राजनीतिक सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। विभाग की ओर से तय मापदण्डों के बावजूद करेल स्कूल को क्रमोन्नत नहीं करना शर्मनाक है।

-हीरालाल दरांगी, विधायक, झाड़ोल

मैंने भी करेल स्कूल देख रखा है, जो श्रेष्ठ विद्यालय है। राजनीतिक सौतेलेपन जैसी कोई बात नहीं। एक बार फिर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि प्रस्ताव भेज दें तो ऊपरी स्तर पर भिजवा कर विद्यालय को क्रमोन्नत करवाने का प्रयास करेंगे।

-गिरीजा वैष्णव, डीईओ (प्रारंभिक) उदयपुर

विद्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद तय मापदण्डों पर विद्यालय खरा उतरता है तो क्रमोन्नत करवाने का प्रयास करेंगे। वैसे ये सरकार का पॉलिसी मेटर है, हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।

-सुशीला नागौरी, डीईओ (माध्यमिक) द्वितीय, उदयपुर