ये है अनोखा नर्सरी स्कूल

प्रोफेसर और रिसर्च स्कॉलर्स पढ़ाती हैं बच्चों को, खाना भी खिलाती हैं खुद बनाकर

उदयपुर। नन्हे-मुन्ने बच्चों का स्कूल तो आपने देखा होगा, लेकिन यह बच्चों का कॉलेज है। इस कॉलेज में छात्र- छात्राओं के साथ 4 साल तक के बच्चे मनोरंजन के साथ एबीसीडी की पढ़ाई तो करते ही है, ये बचपन से ही गृहविज्ञान भी सीखते हैं। सामान्य स्कूलों की तरह ही यह स्कूल भी सुबह 10 बजे से 1 बजे तक चलता है। लेकिन खास बात यह है कि यहां बच्चों को स्कूल टीचर्स नहीं, रिसर्च करने वाली छात्राएं और कॉलेज की महिला प्रोफेसर पढ़ाती हैं। लंच में बच्चे घर से खाना नहीं लाते हैं बल्कि यहां की स्कॉलर छात्राएं खुद बच्चों के लिए न्यूट्रिशन फूड बनाकर उन्हें अपने हाथों से खिलाती हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए 3 नर्सरी टीचर भी रखे गए हैं। एमपीयूएटी के होम साइंस कॉलेज के मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग में पिछले 50 साल से एक स्कूल भी चल रहा है जहां बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ जीवन के व्यवहारिक पहलुओं को भी समझाया और पढ़ाया जाता है। यहां बच्चों की पढ़ाई तो होती ही है, पीएचडी और एमएससी करने वाली छात्राएं इन्हीं बच्चों के विकास पर भी रिसर्च करती हैं। इसे बच्चों की कक्षा के साथ अर्ली चाइल्ड डेवलपमेंट लैब भी कहा जाता है।

40 बच्चों का है ये स्कूल, उम्र के हिसाब से तीन वर्गों में होती है एक्टिविटीज संग पढ़ाई

यहां बच्चों का प्रवेश उनकी उम्र के हिसाब से होता है और बच्चों के लिए कुल 40 सीटें हैं। क्लासरूम भी उम्र के हिसाब से ही तीन भागों में बांटा गया है। प्री नर्सरी में डेढ़ साल से 2 साल तक के 6 बच्चे, 2 से 3 साल तक उम्र के 14 बच्चे और नर्सरी में 3 से ज्यादा और 4 से कम उम्र के 20 बच्चों की सीटें हैं। प्री नर्सरी में 20 सीटों के लिए प्रवेश लॉटरी के माध्यम से होता है। प्री नर्सरी के जो बच्चे नर्सरी में जाना चाहते हैं उनको भेज देते हैं लेकिन कोई प्री नर्सरी से ही स्कूल छोड़ना चाहता है ताे उसकी खाली सीट पर लॉटरी होती है।

बाल नीतियां बनाने के लिए स्कॉलर की रिपोर्ट

बाल विकास विभाग भी मंगाता है कॉलेज की डीन डॉ. शशी जैन ने बताया कि स्कूल में पेरेंट्स और ग्रांड पेरेंट्स की हर माह बैठक होती हैजिसमें बच्चों में हो रहे विकास और कमियों के बारे में चर्चा होती है। इसके साथ ही जाे बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं उनकी माताओं की स्कूल में ट्रेनिंग भी होती है। ट्रेनिंग में छात्राओं द्वारा रिसर्चकर रिपोर्ट बनाई जाती हैजिसके आधार पर उनके विकास के लिए नीतियां विभाग को भी भेजी जाती है।

रिसर्च के बाद तैयार की सीडी

बच्चों के विकास में है सहायक कॉलेज की पीएचडी स्कॉलर डॉ. अनिता लोढा और डॉ. सोफिया गिर ने बच्चों को पढ़ाने के बाद अनुभव और सुझाव को लेकर सीडी भी तैयार की हैजिसे देखकर पेरेंट्स और नर्सरी टीचर पढ़ाई की प्रणाली को सुधार सकते हैं। इस रिसर्च में 50 से अधिक एक्टिविटी बताई गई हैं जो बच्चों के विकास में काफी योगदान देती है।