दबाव में अपनों को बना दिया पंचायत सहायक

Education Shiksha Vibhag

उदयपुर। सवालों से घिरी पंचायत सहायकों की भर्ती प्रक्रिया की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कलेक्टर ने 49 ग्राम पंचायतों में तीन स्तर पर जांच करवाई थी। सामने आया है कि चयन के नाम पर गांवों में रेवड़ियां बंट गईं। 22 पंचायतों में चयन प्रक्रिया निरस्त की जा चुकी है, जबकि 27 में चयन प्रक्रिया का वरीयता के आधार पर पुनर्निर्धारण करने के आदेश जारी हो चुके हैं। पंचायत स्तर पर हुई इस भर्ती को लेकर आई परिवेदनाआेंं के निस्तारण को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग से निर्देश पर कलेक्टर बिष्णु चरण मल्लिक ने तीन स्तर पर जांच करवाई तो गड़बड़ी की परतें उधड़ीं। पहले पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी से टिप्पणी ली। फिर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट की सत्यता की जांच करवाई और आखिर में जिला स्तर पर जांच अधिकारी से टिप्पणी ली गई। इसके बाद कलेक्टर ने 5 अप्रैल को दो आदेश जारी किए।

तीन लेवल पर पड़ताल कर 22 पंचायतों में पकड़ी गड़बड़ियां, कलेक्टर ने निरस्त कर दी चयन प्रक्रिया

झाड़ोल ब्लॉक की रोहीमाला पंचायत में गैर अनुभवी लाेगों का चयन हुआ। पहले स्तर की जांच में ही साफ हो गया कि सरपंच आैर नेताओं के दबाव में चयन नियमानुसार नहीं हुआ। गिर्वा की देबारी पंचायत में जिस अाधार पर नियुक्ति हुई, वह अनुभव प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी से जारी होना नहीं पाया गया। इसी क्षेत्र में खजुरी में भर्ती के लिए स्थानीय कमेटी ने कोई मापदंड नहीं बनाया। गिर्वा क चौकड़िया और अमरपुरा में गैर अनुभवी का चयन कर लिया गया। वल्लभनगर पंचायत में 40 साल से ज्यादा उम्र के आवेदक का चयन कर लिया गया। सराड़ा की जावद और सरसिया पाल में पारदर्शिता नहीं रखी गई। सेमारी के सल्लाड़ा में दो आवेदकों के अनुभव प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी से जारी नहीं थे। जांबुड़ा में गैर अनुभवी का चयन कर लिया। फलासिया की मादड़ी पंचायत, खेरवाड़ा के बड़ला, कोटड़ा की मामेर और गिर्वा की कानपुर पंचायत में भी गैर अनुभवी का चयन कर लिया गया। भींडर ब्लॉक की सवना पंचायत में साक्षात्कार पैनल में अंक देने में पक्षपात हुआ। वाणिया तलाई में शिकायककर्ता के पास विद्यार्थी मित्र प्रमाण पत्र होने के बावजूद 10 अंक दिए गए जबकि अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न नहीं थे। उन्हें 25-25 अंक दिए गए। सराड़ा ब्लॉक की ओड़ा पंचायत में पैनल सूची में अंक योग में त्रुटियां रखकर चयन कर दिया गया। सलूंबर की बेड़ावल में जाति प्रमाण पत्र संलग्न नहीं होने के बावजूद इसके अंक जोड़े गए। फलासिया की दमाणा पंचायत, गोगुंदा की वास, अंबावा और मोड़ी पंचायत में उच्च योग्यता वालों को दरकिनार कर चयन किया गया।

इन 27 पंचायतों में वापस तय करेंगे वरीयता

सराड़ा की नाल हल्कार में शिकायतकर्ता को चयनित के मुकाबले अनुभव के कम अंक दिए। ऋषभदेव की चिकला में निजी स्कूल के अनुभव प्रमाण पत्र से दो चुने, जबकि भींडर के गोटीपा व फलासिया के धरावण में अनुभव प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी ने नहीं दिए थे। गोगुंदा की चोरबावड़ी में अनुभव प्रमाणित ही नहीं था। ऋषभदेव के सोमावत, भींडर के लूणदा और खेरवाड़ा के सुवेरी, सायरा के सेमड़ और गोगुंदा में चयनितों के अनुभव पत्र सरपंच से जारी थे। भींडर के वाना, मजावड़ा, अमरपुरा खालसा, बाठरड़ा कला, वरणी, सेमारी के भोराई पाल, ऋषभदेव की कानूवाड़ा, झाड़ाेल की गोराणा, कोटड़ा की तेजावास, मेरपुर व सलूंबर की मैथुड़ी और दमाणा (झाड़ोल) में पारदर्शिता नहीं बरती गई।

सलेक्शन कमेटी पर नजर

विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति के जरिए साल भर पहले संविदा आधार पर हर ग्राम पंचायत में तीन पंचायत सहायकों की भर्ती हुई थी। संबंधित स्कूल प्रिंसिपल या प्रधानाध्यापक इस कमेटी का अध्यक्ष होता है। नियुक्ति पाने वालों को छह हजार रुपए मासिक के अाधार पर पंचायत से भुगतान हुआ। गड़बड़ियां सामने आने और पुष्टि के बाद चयन कमेटी में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। जिला प्रशासन में इसकी कवायद शुरू हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार कई जगह राजनीतिक दबाव के चलते भी योग्य आवेदकों को दरकिनार कर दूसरों का चयन कर लिया गया।

परिवेदनाओं का निस्तारण कर तत्काल आवश्यक एक्शन लिया है। चयन कमेटी के खिलाफ एक्शन और संबंधित पंचायत सहायकों को हुए भुगतान की वसूली के मामले में जांच हो रही है। नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

-बिष्णु चरण मल्लिक, कलेक्टर, उदयपुर