युवाओं को मिल रहा तकनीकी इनोवेशन का मौका

युवाओं को मिल रहा तकनीकी इनोवेशन का मौका
युवाओं को मिल रहा तकनीकी इनोवेशन का मौका

युवाओं को मिल रहा तकनीकी इनोवेशन का मौका


दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित एपीजे स्कूल के 12वीं के स्टूडेंट हैं अंश आहूजा और आकांक्षा रानी। अंश जहां बायोलॉजी में रुचि रखते हैं,वहीं आकांक्षा को टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि में दिलचस्पी है। लेकिन दोनों ने एक समूह के रूप में हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) एवं आइबीएम द्वारा आयोजित‘ हैकाथॉन-एआइ फॉर बेटर इंडिया’ में अपने प्रोजेक्ट ‘हेल्थहब’ के लिए पहला पुरस्कार हासिल किया है।

इस प्रोजेक्ट के बारे में अंश बताते हैं,‘हम सभी जानते हैं कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की क्या स्थिति है। इसलिए हमने ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को ध्यान में रखकर एक किट (प्रोटोटाइप) तैयार किया है, जिसमें एआइ की मदद से अस्पताल गए बिना शरीर के तापमान एवं अन्य लक्षणों से बीमारी व उसके कारणों का पता लगाया जा सकता है। इसके बाद मरीज की विस्तृत जानकारी किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को भेजी जाती है, जो उन्हें जरूरी दवाएं व इलाज की जानकारी देते हैं।

आकांक्षा के अनुसार, किट में इमेज रिकॉग्निशन तकनीक एवं सेंसर्स लगे हैं,जिससे एक व्यक्ति अपना तापमान एवं अन्य लक्षण उसमें दर्ज कर सकता है। अंश कहते हैं कि इससे पहले उन्हें एआइ के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं थी। लेकिन प्रोजेक्ट करने एवं हैकाथॉन में शामिल होने के बाद थोड़ी दिलचस्पी जगी है। आत्मविश्वास आया है। कम्युनिकेशन स्किल विकसित हुई है। आकांक्षा की मानें,तो इस तरह के प्लेटफॉर्म से स्टूडेंट अपनी स्किल्स को और निखार सकते हैं। जैसे,मुझे वन बिलियन फाउंडेशन द्वारा आयोजित एआइ वर्कशॉप से बहुत कुछ सीखने को मिला था। वह इस प्रतियोगिता में काफी काम आया।

स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन की शुरुआत : दोस्तो, वर्ष 2017 में पहली बार तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) के इनोवेशन सेल और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ने कुछ निजी संगठनों के साथ मिलकर ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन’ का आयोजन शुरू किया था। यह एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जो छात्रों को दैनिक जीवन एवं विभिन्न क्षेत्रों में आने वाली समस्याओं का हल निकालने के लिए मंच प्रदान करता है। ये समस्याएं केंद्रीय विभागों, राज्य मंत्रालयों और उद्योगों की ओर से साझा की जाती हैं। स्टूडेंट्स का समूह अपनी इच्छानुसार किसी एक समस्या (आइडिया) पर काम कर उसका समाधान निकालने की कोशिश करता है। कोविड-19 की वजह से इस साल इसका चौथा संस्करण वर्चुअली आयोजित किया गया। इस बार केंद्र सरकार के 37 विभागों, 17 राज्यों की सरकारों एवं 20 उद्योगों की करीब 343 समस्याओं का हल निकालने के लिए देशभर के 40 नोडल सेंटर्स के जरिए दस हजार छात्रों ने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन में हिस्सा लिया था।

तकरीबन 36 घंटे चले इस हैकाथॉन (सॉफ्टवेयर एडिशन) के अंत में दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया की इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी फैकल्टी की ‘टीम मॉन्क्स’ (एनएस 275 प्रॉब्लम स्टेटमेंट में) विजेता रही। छह सदस्यीय इस टीम को एक लाख रूपये का इनाम भी मिला। ‘टीम मॉन्क्स’ के सदस्य रहे कंप्यूटर इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर के छात्र गौरव चौधरी बताते हैं, ‘हमने बिहार सरकार के कृषि विभाग की ओर से रखी गई दो समस्याओं का हल निकालने की कोशिश की। पहली समस्या थी कि फसल के उत्पादन को कैसे बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि राज्य को हर वर्ष बाढ़ की समस्या से जूझना पड़ता है। उससे फसल का काफी नुकसान होता है। दूसरा मुद्दा था, लैंड यूजेज सिस्टम डेवलप करना ताकि वन क्षेत्र, नदियों-जल स्रोतों, सूखा एवं बाढ़ प्रभावित व रिहायशी इलाकों की सही जानकारी हो। साथ ही, प्रभावी तरीके से भविष्य के लिए योजनाएं बनाई जा सकें।